Edited By Tanuja,Updated: 16 Jul, 2026 08:05 PM

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 40 साल बाद न्यूज़ीलैंड का दौरा कर दोनों देशों के संबंधों को नई मजबूती दी। रोडमैप 2030, 10 समझौते, FTA, 20 अरब डॉलर निवेश और हर साल 5,000 भारतीयों को रोजगार के अवसर जैसे अहम फैसले हुए। दोनों देशों ने इंडो-पैसिफिक सहयोग...
International Desk: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की न्यूज़ीलैंड यात्रा ने दोनों देशों के रिश्तों में नया अध्याय जोड़ दिया है। करीब 40 वर्षों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली न्यूज़ीलैंड यात्रा रही, जिसे भारत-न्यूज़ीलैंड संबंधों के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी और न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने के लिए कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। यात्रा के दौरान दोनों देशों ने 'इंडिया-न्यूज़ीलैंड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप: रोडमैप 2030' पर सहमति जताई। इसके अलावा कृषि, खाद्य प्रौद्योगिकी, निवेश, कौशल विकास, शिक्षा, समुद्री सुरक्षा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 10 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
दोनों देशों के बीच वर्तमान में द्विपक्षीय व्यापार लगभग 2.4 अरब डॉलर का है। इसे बढ़ाने के लिए मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement - FTA) किया गया है। इसके तहत कृषि, फूड टेक्नोलॉजी, निवेश और स्किल मोबिलिटी के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। समझौते के तहत हर साल 5,000 कुशल भारतीय पेशेवरों को न्यूज़ीलैंड में काम करने का अवसर मिलेगा। वहीं न्यूज़ीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है।हालांकि, कृषि व्यापार को लेकर दोनों देशों के अपने-अपने हित बने हुए हैं। न्यूज़ीलैंड चाहता है कि उसके सेब, कीवी फल और मनुका शहद को भारतीय बाजार में अधिक पहुंच मिले, जबकि भारत अपने डेयरी क्षेत्र की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी यात्रा के दौरान न्यूज़ीलैंड में बसे करीब तीन लाख भारतीय मूल के लोगों से भी मुलाकात की। उन्होंने भारतीय समुदाय को दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों का महत्वपूर्ण सेतु बताया। भारतीय समुदाय ने भी प्रधानमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया। यह यात्रा केवल व्यापार तक सीमित नहीं रही। दोनों नेताओं ने हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में शांति, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया। भारत की 'एक्ट ईस्ट नीति' और इंडो-पैसिफिक रणनीति में न्यूज़ीलैंड को अहम साझेदार माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा से दोनों देशों के रिश्तों को नई गति मिली है। हालांकि, इन समझौतों के सफल क्रियान्वयन और दीर्घकालिक सहयोग के लिए लगातार कूटनीतिक संवाद और राजनीतिक इच्छाशक्ति बनाए रखना जरूरी होगा।