Edited By Tanuja,Updated: 06 Jun, 2026 06:32 PM

सिंगापुर सरकार ने भारतीय समुदाय को निशाना बनाने और नस्लीय विभाजन फैलाने वाले 14 सोशल मीडिया पोस्ट हटाने का आदेश दिया है। अधिकारियों के अनुसार यह सामग्री संभवतः चीन से उत्पन्न हुई थी। सरकार ने कहा कि बहुजातीय समाज में नस्लीय सद्भाव को कमजोर करने की...
International Desk: सिंगापुर (Singapore) सरकार ने भारतीय समुदाय को निशाना बनाने और देश के बहुसांस्कृतिक सामाजिक ढांचे को कमजोर करने वाले 14 सोशल मीडिया पोस्ट हटाने का आदेश जारी किया है। सरकार के अनुसार ये पोस्ट नस्लीय तनाव भड़काने वाले थे और सिंगापुर के सामाजिक सद्भाव के लिए खतरा पैदा कर सकते थे। सिंगापुर के गृह मंत्रालय ने बताया कि पुलिस ने Online Criminal Harms Act (OCHA) के तहत कार्रवाई करते हुए YouTube, Facebook और X (Twitter) पर मौजूद 14 पोस्ट हटाने के निर्देश दिए हैं। सोशल मीडिया कंपनियों से यह भी कहा गया है कि वे आवश्यक तकनीकी कदम उठाएं ताकि सिंगापुर के उपयोगकर्ताओं को ये पोस्ट दिखाई न दें।
सिंगापुर के गृह मामलों के राज्य मंत्री Edwin Tong ने कहा कि प्रारंभिक जांच के अनुसार यह सामग्री विदेश से आई प्रतीत होती है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार जांच में संकेत मिले हैं कि विवादित सामग्री संभवतः चीन स्थित किसी ऑनलाइन मंच पर तैयार की गई और बाद में अन्य प्लेटफॉर्मों तथा वेबसाइटों के माध्यम से प्रसारित हुई। एडविन टोंग ने कहा कि "ये वीडियो और पोस्ट हमारे बहुजातीय समाज पर हमला करते हैं और लोगों को नस्ल के आधार पर बांटने की कोशिश करते हैं।" उन्होंने स्पष्ट किया कि सिंगापुर की पहचान विभिन्न समुदायों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और समान सम्मान पर आधारित है।
सिंगापुर की आबादी में भारतीयों की भूमिका
भारतीय समुदाय लंबे समय से सिंगापुर के आर्थिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है।
- सिंगापुर की लगभग 60 लाख की आबादी में लगभग 75% लोग चीनी मूल के हैं।
- लगभग 15% मलय मूल के हैं।
- लगभग 7 से 9% भारतीय मूल के हैं।
- शेष अन्य समुदायों से संबंधित हैं।
सिंगापुर सरकार ने कहा है कि नस्लीय नफरत फैलाने वाले कंटेंट को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। किसी भी समुदाय के खिलाफ भेदभावपूर्ण प्रचार पर कार्रवाई होगी। सोशल मीडिया का इस्तेमाल सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने के लिए नहीं होने दिया जाएगा। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब दुनिया के कई देशों में सोशल मीडिया के जरिए नस्लीय और सामुदायिक तनाव बढ़ाने की घटनाएं सामने आ रही हैं।