Edited By Sanjeev,Updated: 14 Oct, 2026 02:00 PM

असम के मंत्री जयंत मल्लाबरुआ ने बुधवार को हर पांच साल में वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) की मांग की। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया यह पक्का करने के लिए जरूरी है कि राज्य की वोटर लिस्ट में किसी भी विदेशी नागरिक का नाम न रहे। राज्य में...
गुवाहाटी : असम के मंत्री जयंत मल्लाबरुआ ने बुधवार को हर पांच साल में वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) की मांग की। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया यह पक्का करने के लिए जरूरी है कि राज्य की वोटर लिस्ट में किसी भी विदेशी नागरिक का नाम न रहे। राज्य में वोटर लिस्ट के वेरिफिकेशन, नागरिकता और अवैध घुसपैठ को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच बरुआ ने कहा, 'असम में हर कोई SIR चाहता है। असम की वोटर लिस्ट में एक भी विदेशी का नाम नहीं रहना चाहिए।'
1979 से 1985 के बीच असम में चले विदेशियों के खिलाफ आंदोलन का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि राज्य के पास वोटर लिस्ट की नियमित जांच सुनिश्चित करने के खास कारण थे। यह आंदोलन, जो 1985 में 'असम समझौते' (Assam Accord) पर हस्ताक्षर के साथ खत्म हुआ, अवैध घुसपैठियों की पहचान करने और वोटर लिस्ट में उनके शामिल होने से जुड़ी चिंताओं को दूर करने की मांगों पर केंद्रित था। बरुआ का यह बयान असम में वोटर की योग्यता और अवैध घुसपैठियों की पहचान को लेकर जारी राजनीतिक मतभेदों के बीच आया है।
मंत्री ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) से जुड़े आरोपों और बैलेट पेपर से वोटिंग की वापसी की मांग को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्ष की भी आलोचना की। चुनाव हारने के बाद चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने के लिए कांग्रेस पर निशाना साधते हुए बरुआ ने आरोप लगाया कि पार्टी अक्सर जनादेश स्वीकार करने के बजाय EVM को दोष देती है या दूसरी चिंताएं उठाती है। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस कभी जनता के साथ खड़ी नहीं होती, इसीलिए वे हारते रहते हैं और हारने के बाद, वे EVM, कभी-कभी बैलेट पेपर को दोष देते हैं या दूसरे बहाने बनाते हैं।'
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने चुनावी पारदर्शिता और EVM के कामकाज को लेकर चिंताएं जताई हैं, जिससे यह मुद्दा सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष के बीच विवाद का विषय बन गया है। मंगलवार को नलबाड़ी में 'जन जागरण दल' की रैली के बारे में बात करते हुए बरुआ ने दावा किया कि केंद्र और असम में BJP के नेतृत्व वाली सरकारों को महिलाओं और युवाओं से बढ़ता समर्थन मिल रहा है। आयोजकों का दावा है कि रैली में 30,000 से ज्यादा लोग शामिल हुए, हालांकि इस आंकड़े की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
मंत्री ने नागरिकता (संशोधन) कानून (CAA) का विरोध करने वाले समूहों की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि उनका रुख देश के हितों के खिलाफ है। पांच साल के SIR चक्र की उनकी मांग से असम में नागरिकता, मतदाता की पात्रता और अवैध आप्रवासन पर चल रही बहस में एक नया पहलू जुड़ने की उम्मीद है। इस तरह के बदलावों की आवृत्ति और उन्हें लागू करने का फ़ैसला लागू कानूनी ढांचे के तहत सक्षम चुनाव अधिकारियों पर निर्भर करता है।