Edited By Anu Malhotra,Updated: 02 Jul, 2026 10:59 AM

झारखंड हाई कोर्ट ने ऑफिस से चाय और बिस्कुट घर ले जाने के आरोपी चपरासी की बर्खास्तगी को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि 17 साल की सेवा के बाद एक छोटी सी गलती के लिए कर्मचारी को नौकरी से निकालना बहुत कठोर कदम था और यह न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।...
Peon 17-Year Job: झारखंड हाई कोर्ट ने ऑफिस से चाय और बिस्कुट घर ले जाने के आरोपी चपरासी की बर्खास्तगी को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि 17 साल की सेवा के बाद एक छोटी सी गलती के लिए कर्मचारी को नौकरी से निकालना बहुत कठोर कदम था और यह न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। कोर्ट ने रंजीत कुमार हिमांशु को बहाल कर दिया, जिन्होंने बोकारो जिला ग्रामीण विकास एजेंसी (DRDA) में कॉन्ट्रैक्ट पर चपरासी के तौर पर काम किया था।
चीफ जस्टिस एमएस सोनाक और जस्टिस राजेश शंकर की डिवीजन बेंच ने प्रशासन के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि सजा गलती के अनुपात में होनी चाहिए। अगर किसी कर्मचारी की गलती से सरकारी सिस्टम को कोई गंभीर नुकसान नहीं हुआ है, तो कठोर कार्रवाई को सही नहीं ठहराया जा सकता। यह मामला मार्च 2022 का है, जब तत्कालीन डिप्टी डेवलपमेंट कमिश्नर (DDC) ने इस कथित घटना को लेकर हिमांशु को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। हालांकि, नोटिस में उन चीजों का साफ तौर पर जिक्र नहीं था जो कथित तौर पर गायब थीं।
सुनवाई के दौरान, हिमांशु के वकील ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने ऑफिस में बची चायपत्ती और बिस्कुट घर ले जाने की बात स्वीकार की थी और नोटिस मिलने के बाद वे चीजें वापस कर दी थीं। इसके बावजूद, 2 मई 2022 को उनकी कॉन्ट्रैक्ट वाली नौकरी खत्म कर दी गई।
हाई कोर्ट ने कहा कि प्रशासन बर्खास्तगी जैसी कठोर सजा देने से पहले कर्मचारी के लंबे सेवा रिकॉर्ड और आरोप की प्रकृति पर विचार करने में नाकाम रहा।कोर्ट ने DRDA बोकारो को निर्देश दिया कि वे 10 जुलाई से पहले हिमांशु को बहाल करें और 30 जुलाई तक उनकी बकाया सैलरी का 50 प्रतिशत हिस्सा भुगतान करें।