दिल्ली हाई कोर्ट ने Dhruv Rathee के YouTube Video पर GAC को 15 दिन में फैसला देने का दिया आदेश

Edited By Updated: 03 Jul, 2026 02:29 PM

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Dhruv Rathee: दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र की 'शिकायत अपीलीय समिति' (Grievance Appellate Committee) से कहा कि वह यूट्यूबर ध्रुव राठी के एक "अपमानजनक" वीडियो को हटाने की मांग वाली याचिका पर 15 दिनों के भीतर फ़ैसला करे। याचिका में कहा गया था...

 

Dhruv Rathee: दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र की 'शिकायत अपीलीय समिति' (Grievance Appellate Committee) से कहा कि वह यूट्यूबर ध्रुव राठी के एक "अपमानजनक" वीडियो को हटाने की मांग वाली याचिका पर 15 दिनों के भीतर फ़ैसला करे। याचिका में कहा गया था कि इस वीडियो से लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने वकील अमिता सचदेवा की याचिका पर सुनवाई करते हुए अपीलीय समिति को इस मामले पर जल्द फ़ैसला लेने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेश की किसी भी तरह की अनदेखी को "सख्ती" से देखा जाएगा।

कोर्ट ने कहा, "अपीलीय प्राधिकरण याचिकाकर्ता की अपील पर 15 दिनों के भीतर जल्द से जल्द फ़ैसला करेगा और कोर्ट को इसकी जानकारी देगा। अगर आगे भी कोई शिकायत होती है, तो आप नई याचिका दायर कर सकती हैं।"

याचिकाकर्ता का तर्क था कि दो महीने से ज़्यादा समय बीत जाने के बाद भी, केंद्र सरकार द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी (IT) नियमों के तहत बनाई गई समिति ने उनकी अपील पर कोई फ़ैसला नहीं लिया है। यह अपील आपत्तिजनक वीडियो को तुरंत हटाने से गूगल के इनकार के खिलाफ़ दायर की गई थी। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि किसी मध्यस्थ (इंटरमीडियरी) की यह कानूनी ज़िम्मेदारी है कि वह उचित सावधानी बरते और ऐसा कंटेंट हटाए, जिसमें बहुसंख्यक समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाली पोस्ट भी शामिल हों।

गूगल के वकील ने कहा कि उसने याचिकाकर्ता द्वारा दायर अपील का जवाब दे दिया है। याचिका में सचदेवा ने कहा कि राठी ने 21 मार्च को एक बेहद अपमानजनक और सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील वीडियो पोस्ट किया था। इस वीडियो को YouTube पर लाखों बार देखा गया है और इसमें "भगवान श्री राम, भगवान श्री कृष्ण और सीता देवी का अपमान करने वाले झूठे, भ्रामक और उकसावे वाले बयान" हैं। 

याचिका में कहा गया है कि दिल्ली पुलिस के साइबर सेल में शिकायत भेजने के अलावा, सचदेवा ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियमों के तहत YouTube के रेजिडेंट शिकायत अधिकारी के पास औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी और आपत्तिजनक वीडियो को तुरंत हटाने की मांग की थी।

हालांकि, शिकायत अधिकारी ने कहा कि वे "अपनी कम्युनिटी गाइडलाइंस के किसी भी उल्लंघन की पहचान करने में असमर्थ" हैं। इसके बाद 27 मार्च को 'शिकायत अपीलीय समिति' के समक्ष अपील दायर की गई। याचिका में कहा गया है, ".... अपील पर तीस दिनों के भीतर फ़ैसला करने की कानूनी अनिवार्यता के बावजूद, शिकायत अपीलीय समिति (Grievance Appellate Committee) इसका निपटारा करने में नाकाम रही है। विवादित वीडियो YouTube पर अभी भी सबके लिए उपलब्ध है और इससे करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को लगातार ठेस पहुंच रही है।"

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