कस्टडी डेथ पर हाई कोर्ट सख्त, परिवार को 18 लाख मुआवजा,... पुलिस को नसीहत

Edited By Updated: 02 Jul, 2026 06:11 PM

the high court is strict on custodial deaths offering 18 lakh rupees in compens

दिल्ली उच्च न्यायालय ने साल 2018 में पुलिस हिरासत के दौरान आत्महत्या करने वाले 19 वर्षीय युवक के परिजन को 18 लाख रुपये से अधिक का मुआवजा देने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने कहा है कि हिरासत में मौत केवल निजी त्रासदी नहीं, बल्कि व्यवस्था से...

नेशनल डेस्क: दिल्ली उच्च न्यायालय ने साल 2018 में पुलिस हिरासत के दौरान आत्महत्या करने वाले 19 वर्षीय युवक के परिजन को 18 लाख रुपये से अधिक का मुआवजा देने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने कहा है कि हिरासत में मौत केवल निजी त्रासदी नहीं, बल्कि व्यवस्था से जुड़ी गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि हिरासत में होने वाली कोई भी मौत—चाहे वह हिंसा, लापरवाही, अस्पष्ट परिस्थितियों या आत्महत्या के कारण हुई हो—न केवल व्यक्ति की गरिमा पर सवाल खड़े करती है, बल्कि न्यायिक व्यवस्था की विश्वसनीयता को भी प्रभावित करती है।

अधिकारियों के कर्तव्य-पालन में चूक 
अदालत ने एक जुलाई के अपने फैसले में कहा, "जब कोई व्यक्ति हिरासत में होता है, तब वह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्राप्त अपने मौलिक अधिकारों से वंचित नहीं होता। ऐसे में उसकी जान और गरिमा की रक्षा करना राज्य का पूर्ण और अपरिहार्य दायित्व है। हिरासत में होने वाली किसी भी अप्राकृतिक मौत, चाहे वह आत्महत्या ही क्यों न हो, को राज्य की जिम्मेदारी से अलग एक निजी घटना नहीं माना जा सकता। यह उन अधिकारियों के कर्तव्य-पालन में चूक को दर्शाती है, जिन्हें उस व्यक्ति की सुरक्षा और देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

कांस्टेबल पर मारपीट करने का आरोप 
दिल्ली पुलिस ने व्यक्ति को 15 जनवरी 2018 को कड़कड़डूमा अदालत परिसर से गिरफ्तार किया था। मृतक के पिता व याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि जब वह अपने बेटे से मिलने गए, तो उन्हें भी कुछ घंटों के लिए हवालात में रखा गया और एक उप-निरीक्षक तथा एक कांस्टेबल ने उनके साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की गई तथा धमकियां दीं। पिता ने आरोप लगाया कि उन अधिकारियों ने उनके बेटे को रिहा करने के लिए 20,000 से 30,000 रुपये की मांग भी की थी।

हिरासत में आत्महत्या 
अदालत को बताया गया कि अगली सुबह एक "स्थानीय नेता" ने याचिकाकर्ता को फोन करके बताया कि उनके बेटे ने हिरासत में आत्महत्या कर ली है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कहा गया है कि मृत्यु का कारण फंदा लगाने की वजह से दम घुटना था। याचिकाकर्ता को मुआवजे के लिए पात्र मानते हुए अदालत ने अपने आदेश में कहा, "प्रतिवादियों को निर्देश दिया जाता है कि वे आज से आठ सप्ताह के अंदर याचिकाकर्ता को 18,44,400 रुपये का मुआवजा अदा करें।
 

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