पत्थर फेंकने वालों को जेल, हाथों में लैपटॉप और तिरंगा रखने वालों को मिलेगी नौकरी...जम्मू में बोले केंद्रीय मंत्री अमित शाह

Edited By Updated: 16 Sep, 2024 10:32 PM

those who hold laptop and tricolour in their hands will get jobs shah

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां), पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और कांग्रेस आतंकवादियों और पत्थरबाजों को रिहा कराना चाहती हैं, ताकि जम्मू-कश्मीर को फिर से आतंक के गर्त में ले जाया जा सके। शाह ने...

चंद्रकोटः केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां), पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और कांग्रेस आतंकवादियों और पत्थरबाजों को रिहा कराना चाहती हैं, ताकि जम्मू-कश्मीर को फिर से आतंक के गर्त में ले जाया जा सके। शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार इन दलों को आतंकवाद को फिर से मजबूती प्रदान नहीं करने देगी और हाथों में लैपटॉप तथा तिरंगा लेने वाले युवाओं को नौकरी मिलेगी। 

गृह मंत्री ने जम्मू-कश्मीर में पहले चरण के तहत 18 सितंबर को होने वाले मतदान के लिए प्रचार के अंतिम दिन रामबन जिले के चंद्रकोट में एक रैली में कहा, ‘‘पत्थर फेंकने वालों के लिए जेल तैयार हैं।'' उन्होंने केंद्र-शासित प्रदेश में सोमवार को अपनी तीसरी चुनावी रैली को संबोधित करते हुए क्षेत्रीय दलों के पाकिस्तान के साथ वार्ता और सीमापार व्यापार फिर शुरू करने की वकालत करने का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि जब तक आतंकवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता, जब तक ऐसा कुछ नहीं होने वाला। 

विधानसभा चुनावों के लिए जम्मू-कश्मीर भाजपा के घोषणापत्र का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि तीन चरण के चुनावों के बाद एक श्वेत पत्र जारी किया जाएगा, ताकि केंद्र-शासित प्रदेश में पिछले 35 वर्षों में 40,000 से अधिक लोगों के आतंकवाद के कारण जान गंवाने के मामले में जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने पार्टी उम्मीदवार राकेश सिंह ठाकुर (रामबन) और मोहम्मद सलीम भट (बनिहाल) के समर्थन में रैली को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘वे (नेकां, पीडीपी और कांग्रेस) आतंकवादियों और पत्थरबाजों को रिहा कराना चाहते हैं और उन्हें नौकरियां दिलाना चाहते हैं। मैं उन्हें बता देना चाहता हूं कि मोदी सरकार उन युवाओं को नौकरी देगी, जिनके हाथ में लैपटॉप और तिरंगा हो।'' 

शाह ने कहा कि ये दल पाकिस्तान के साथ बातचीत और जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) से सीमापार व्यापार फिर से शुरू करने की वकालत कर रहे हैं। सीमापार व्यापार अप्रैल 2019 में निलंबित कर दिया गया था। 

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