Edited By Tanuja,Updated: 18 Jun, 2026 12:17 PM

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने एक अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत ईरान यूरेनियम भंडार सीमित करेगा, जबकि अमेरिका तेल निर्यात पर छूट देगा। होर्मुज जलडमरूमध्य फिर खुलेगा और 60 दिनों तक स्थायी शांति...
Washington: पश्चिम एशिया में महीनों से जारी तनाव और युद्ध के बीच अमेरिका और ईरान ने एक महत्वपूर्ण अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian द्वारा हस्ताक्षरित इस समझौते के लागू होते ही युद्धविराम प्रभावी हो गया है और दोनों देशों के बीच स्थायी समझौते के लिए 60 दिन की नई वार्ता प्रक्रिया शुरू हो गई है। समझौते की मध्यस्थता करने वाले Shehbaz Sharif ने दावा किया कि दोनों नेताओं के हस्ताक्षर के बाद समझौता तत्काल प्रभाव से लागू हो गया। इस समझौते के तहत अमेरिका ने ईरान को तत्काल तेल निर्यात पर महत्वपूर्ण छूट देने का फैसला किया है। इसके बाद ईरान वैश्विक बाजार में बिना बड़ी बाधाओं के अपना कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद बेच सकेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार यह अमेरिका की सबसे बड़ी रियायतों में से एक है, क्योंकि तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंध ही ईरान पर दबाव बनाने का सबसे प्रभावी हथियार माने जाते थे। इसके अलावा भविष्य में ईरान पर लगे अमेरिकी, संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने का रास्ता भी खुल गया है। समझौते का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा Strait of Hormuz को दोबारा खोलना है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और प्राकृतिक गैस का व्यापार इसी मार्ग से होता है। युद्ध के दौरान जहाजों पर हमलों और सुरक्षा खतरों के कारण यहां आवाजाही लगभग ठप हो गई थी, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल मच गई थी।
समझौते के अनुसार
- जलडमरूमध्य तत्काल प्रभाव से खोला जाएगा।
- अगले 30 दिनों में सामान्य जहाजरानी बहाल की जाएगी।
- शुरुआती 60 दिनों तक कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।
- समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाया जाएगा।
- अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त की जाएगी।
परमाणु कार्यक्रम पर क्या सहमति बनी?
- समझौते के अनुसार ईरान ने दोहराया है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा।
- ईरान अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार को कम करेगा।
- संवर्धित यूरेनियम को अंतरराष्ट्रीय निगरानी में डाउनब्लेंड किया जाएगा।
- अंतिम समझौते तक परमाणु गतिविधियों में यथास्थिति बनाए रखी जाएगी।
अमेरिका कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा।
- हालांकि यूरेनियम संवर्धन के भविष्य और परमाणु कार्यक्रम की अंतिम रूपरेखा पर अभी सहमति नहीं बनी है।
- 300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण पैकेज का प्रस्ताव
- समझौते में ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की योजना का भी उल्लेख किया गया है।
- अमेरिकी उपराष्ट्रपति J. D. Vance के अनुसार यह निवेश मुख्य रूप से खाड़ी देशों से आने की उम्मीद है।
- हालांकि यह राशि अंतिम समझौते और आगे की वार्ताओं पर निर्भर करेगी।
- समझौते पर हस्ताक्षर के बावजूद ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने सैन्य विकल्प पूरी तरह बंद नहीं किए हैं।
- उन्होंने कहा कि यह केवल एक समझौता ज्ञापन है और यदि अमेरिका को लगे कि समझौते का पालन नहीं हो रहा, तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला रहेगा।
- यह बयान बताता है कि दोनों देशों के बीच अविश्वास अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
इजराइल में बढ़ी चिंता
यह समझौता Benjamin Netanyahu की सरकार के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। इजराइल लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर कड़ा रुख अपनाता रहा है। समझौते में लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता और युद्ध समाप्ति की बात भी शामिल है, जिस पर इजराइल ने पहले ही आपत्ति जताई है। इजराइली मीडिया और विपक्षी दलों ने भी समझौते के कई पहलुओं पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
दुनिया पर क्या असर पड़ेगा?
- भारत के लिए तेल की कीमतों में राहत मिल सकती है।
- ऊर्जा आयात लागत कम हो सकती है।
- पश्चिम एशिया में स्थिरता बढ़ने से व्यापार को फायदा होगा।
- चीन के लिए ईरानी तेल की आपूर्ति और आसान हो सकती है।
- ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
- वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए तेल और गैस बाजार में स्थिरता आने की संभावना।
- समुद्री व्यापार सामान्य होने से शिपिंग लागत कम हो सकती है।
- महंगाई पर दबाव घट सकता है।
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