ट्रंप ने डील से निकाला नाम तो पाकिस्तान ने बदले तेवर, ईरानी विदेश मंत्री अराघची को बुलाया इस्लामाबाद

Edited By Updated: 04 Aug, 2026 07:01 PM

pakistan invites iranian fm araghchi for talks amid renewed u s iran tensions

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच पाकिस्तान ने कूटनीतिक सक्रियता बढ़ाते हुए ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची को जल्द इस्लामाबाद आने का न्योता दिया है। पाकिस्तान खुद को संभावित मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा है। हालांकि ट्रंप ने हालिया बयानों में सऊदी अरब, कतर...

Islamabad: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच पाकिस्तान ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची को जल्द से जल्द इस्लामाबाद आने का न्योता दिया है। पाकिस्तान का यह कदम ऐसे समय आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत को लेकर लगातार अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इशाक डार और अब्बास अराघची के बीच बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा की। डार ने अराघची को उनकी सुविधा के अनुसार जल्द पाकिस्तान आने का निमंत्रण दिया।

 

इस्लामाबाद की कोशिश खुद को अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित कूटनीतिक पुल और मध्यस्थ के रूप में पेश करने की है। पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक, पर्दे के पीछे बातचीत और संपर्क जारी हैं और पाकिस्तान तनाव कम कराने में भूमिका निभाना चाहता है। यानी पाकिस्तान सीधे तौर पर युद्ध में शामिल होने के बजाय बातचीत की मेज पर अपनी जगह मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान के लिए सबसे दिलचस्प बात यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हालिया बयानों में ईरान के साथ बातचीत के संदर्भ में सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात का जिक्र किया, लेकिन पाकिस्तान का नाम प्रमुख मध्यस्थों के तौर पर नहीं लिया। यही वजह है कि इस्लामाबाद का अराघची को निमंत्रण और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पाकिस्तान शायद यह संदेश देना चाहता है कि अमेरिकी बयानों में उसका नाम भले न हो, लेकिन तेहरान के साथ उसके कूटनीतिक संपर्क अभी भी सक्रिय हैं।

 

पाकिस्तान को हालांकि पूरी तरह बाहर नहीं किया गया है। ईरानी पक्ष पहले भी इस्लामाबाद की मध्यस्थ भूमिका का संकेत देता रहा है। यही वजह है कि पाकिस्तान अब सीधे तेहरान के साथ अपने संपर्कों को और मजबूत करने में जुटा है। अराघची को बुलाने के साथ-साथ पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के अध्यक्ष अयाज सादिक ने ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ को भी इस्लामाबाद आने का न्योता दिया है।  पाकिस्तान का दावा है कि वह पहले भी अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक प्रयासों में भूमिका निभाता रहा है। इस्लामाबाद ने अप्रैल में शांति वार्ताओं की मेजबानी की थी और बाद में स्विट्जरलैंड में हुई तकनीकी स्तर की बातचीत में भी हिस्सा लिया था। हालांकि, इसके बाद तनाव फिर बढ़ गया और बातचीत की प्रक्रिया प्रभावित हुई।

 

 

अब सबकी नजर इस बात पर है कि अराघची पाकिस्तान का निमंत्रण स्वीकार करते हैं या नहीं। अगर वह इस्लामाबाद आते हैं तो पाकिस्तान इसे अपनी मध्यस्थ भूमिका की बड़ी कूटनीतिक सफलता के तौर पर पेश कर सकता है। लेकिन अगर ईरान और अमेरिका के बीच सीधे या किसी दूसरे क्षेत्रीय देश की मदद से बातचीत आगे बढ़ती है, तो पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिश सीमित रह सकती है।  फिलहाल इतना साफ है कि इस्लामाबाद इस संकट में खुद को किनारे नहीं देखना चाहता और तेहरान के साथ सक्रिय संपर्क के जरिए अपनी कूटनीतिक अहमियत बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
 
 

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