पूर्व IPS का पुलिस पर आरोप – टूथपेस्ट और नकदी नहीं लौटाई, कोर्ट ने रिपोर्ट मांगी

Edited By Updated: 14 Jan, 2026 01:53 PM

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उत्तर प्रदेश के देवरिया में पुलिस की ईमानदारी पर उस वक्त बड़े सवालिया निशान लग गए, जब एक पूर्व आईपीएस अधिकारी ने अपनी ही बरामदगी में 'हेरफेर' का आरोप लगाया। जालसाजी के आरोप में सलाखों के पीछे पहुंचे पूर्व पुलिस अफसर अमिताभ ठाकुर और खाकी के बीच अब...

नेशनल डेस्क: उत्तर प्रदेश के देवरिया में पुलिस की ईमानदारी पर उस वक्त बड़े सवालिया निशान लग गए, जब एक पूर्व आईपीएस अधिकारी ने अपनी ही बरामदगी में 'हेरफेर' का आरोप लगाया। जालसाजी के आरोप में सलाखों के पीछे पहुंचे पूर्व पुलिस अफसर अमिताभ ठाकुर और खाकी के बीच अब सामान और नकदी की वापसी को लेकर कानूनी जंग छिड़ गई है।

 क्या है पूरा विवाद?
1999 के एक पुराने धोखाधड़ी मामले (पत्नी के नाम औद्योगिक भूखंड आवंटन) में 10 दिसंबर 2025 से जेल में बंद अमिताभ ठाकुर ने देवरिया पुलिस की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने अदालत के सामने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं:- पूर्व आईपीएस का दावा है कि गिरफ्तारी के समय पुलिस ने उनके पास से 42,000 रुपये नकद लिए थे। लेकिन जब कोर्ट के आदेश पर सामान वापस किया गया, तो उनके पैरवीकार अतुल कुमार को महज 7,208 रुपये ही लौटाए गए। आरोप है कि पुलिस के कब्जे में रहे उनके दोनों मोबाइल फोन के 'लॉक' टूटे हुए मिले हैं, जिससे डेटा चोरी या छेड़छाड़ की आशंका बढ़ गई है। न केवल बड़ी रकम, बल्कि उनके पास से बरामद किया गया 'टूथपेस्ट' तक पुलिस ने वापस नहीं किया है।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रभारी) शैलजा मिश्रा की अदालत ने इसे गंभीरता से लिया है। एक पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारी द्वारा लगाए गए इन आरोपों ने जिला प्रशासन में हलचल मचा दी है। अदालत ने देवरिया कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक (SHO) को नोटिस जारी कर 23 जनवरी 2026 तक पूरे मामले की विस्तृत आख्या (रिपोर्ट) पेश करने का हुक्म दिया है। अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि कोतवाली पुलिस अदालत में शेष धनराशि और सामान के गायब होने पर क्या स्पष्टीकरण देती है।

अमिताभ ठाकुर पर आरोप है कि उन्होंने पद का दुरुपयोग कर अपनी पत्नी नूतन ठाकुर के नाम पर गलत तरीके से प्लॉट आवंटित कराए थे। इसी मामले में कानूनी कार्रवाई के बाद वे फिलहाल देवरिया जिला जेल में निरुद्ध हैं। क्या पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज जब्ती और वास्तविक सामान के बीच वाकई कोई अंतर है? या फिर यह कानूनी प्रक्रिया को उलझाने की कोई रणनीति है? इसका फैसला अदालत में पुलिस की रिपोर्ट आने के बाद ही होगा।

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