Edited By SHUKDEV PRASAD,Updated: 10 Mar, 2026 07:21 PM

सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों को नियंत्रित करने से जुड़े आईटी नियमों पर Supreme Court of India ने अहम फैसला सुनाया है।
नेशनल डेस्क: सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों को नियंत्रित करने से जुड़े आईटी नियमों पर Supreme Court of India ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने उस आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसमें Bombay High Court ने 2023 के सूचना प्रौद्योगिकी नियमों में किए गए कुछ संशोधनों को असंवैधानिक करार दिया था।
इन संशोधनों के तहत केंद्र सरकार को Fact Check Unit (FCU) बनाने का अधिकार दिया गया था, जो सरकारी कामकाज से जुड़ी फर्जी या भ्रामक जानकारी की पहचान कर सोशल मीडिया से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर सकती थी।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुई सुनवाई
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश Surya Kant की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने की। इस पीठ में जस्टिस आर. महादेवन और जस्टिस जॉयमाल्या बागची भी शामिल थे। सुनवाई के दौरान अदालत ने मूल याचिकाकर्ताओं, जिनमें कॉमेडियन Kunal Kamra, Editors Guild of India और Association of Indian Magazines शामिल हैं, को नोटिस जारी किया। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta ने हाई कोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया।
CJI ने सोशल मीडिया पर जताई चिंता
सुनवाई के दौरान CJI ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के कामकाज को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कुछ प्लेटफॉर्म्स पर ऐसी सामग्री तेजी से फैल रही है जो देश की सुरक्षा या नीतियों को नुकसान पहुंचा सकती है, खासकर भारतीय सेना से जुड़ी गलत जानकारी के मामले में। उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है।
याचिकाकर्ताओं की दलील
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने कहा कि मौजूदा आईटी नियमों में पहले से ही ऐसी व्यवस्था है जिसके तहत विवादित सामग्री को 24 घंटे के भीतर हटाया जा सकता है। उन्होंने तर्क दिया कि 2023 के संशोधनों में “भ्रामक जानकारी” की स्पष्ट परिभाषा नहीं दी गई, जिससे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और अन्य मध्यस्थों पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है।
मुंबई हाई कोर्ट ने क्या कहा था
सितंबर 2024 में Bombay High Court ने IT (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Amendment Rules, 2023 के एक प्रमुख प्रावधान को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। अदालत ने कहा था कि यह नियम संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 19(1)(a) (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 19(1)(g) (व्यवसाय की स्वतंत्रता) का उल्लंघन कर सकता है। हाई कोर्ट का मानना था कि ऐसे प्रावधानों से सरकारी सेंसरशिप की आशंका पैदा हो सकती है और इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर “चिलिंग इफेक्ट” पड़ सकता है।
आगे क्या होगा
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस मुद्दे पर स्पष्ट दिशानिर्देश तय करना जरूरी है। अदालत ने केंद्र सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई लगभग छह सप्ताह बाद होने की संभावना है। फिलहाल मुंबई हाई कोर्ट का फैसला लागू रहेगा, जिसका मतलब है कि विवादित प्रावधान और Fact Check Unit (FCU) से जुड़ी व्यवस्था पर रोक बनी रहेगी।