59 साल की उम्र में मिली मंजिल, 27 वर्षों के संघर्ष के बाद सरकारी शिक्षक बने विजय कुमार शर्मा

Edited By Updated: 26 Sep, 2026 01:16 PM

vijay sharma became a government teacher at the age of 59

शर्मा का कहना है कि उनके लिए यह नौकरी से ज्यादा उस लक्ष्य का पूरा होना है, जिसे उन्होंने वर्ष 1999 में तय किया था। बड़ौत क्षेत्र के बदहवाद गांव निवासी शर्मा का चयन शामली जिले के एक सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय में टीजीटी संस्कृत शिक्षक के पद पर...

बागपत: जहां एक उम्र के बाद लोग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना छोड़ देते हैं, वहीं बागपत के 59 वर्षीय विजय कुमार शर्मा ने सरकारी अध्यापक बनने की कोशिश आखिरी प्रयास तक नहीं छोड़ी और अंततः उन्होंने अपने नाम के अनुरूप विजय हासिल की। वर्ष 1999 में सरकारी अध्यापक बनने का लक्ष्य तय करने वाले विजय ने 27 वर्षों तक तैयारी जारी रखी और अनेक असफल प्रयासों के बाद अब 59 वर्ष की उम्र में उनका नाम सरकारी अध्यापकों की सूची में है। 

शर्मा का कहना है कि उनके लिए यह नौकरी से ज्यादा उस लक्ष्य का पूरा होना है, जिसे उन्होंने वर्ष 1999 में तय किया था। बड़ौत क्षेत्र के बदहवाद गांव निवासी शर्मा का चयन शामली जिले के एक सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय में टीजीटी संस्कृत शिक्षक के पद पर हुआ है। लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में गत सोमवार को आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें नियुक्ति पत्र सौंपा। शर्मा ने बताया कि वह लंबे समय तक शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में शामिल होते रहे। उन्होंने टीजीटी की लिखित परीक्षा छह बार और पीजीटी की परीक्षा चार बार उत्तीर्ण की। करीब आठ बार साक्षात्कार के लिए भी पहुंचे, लेकिन उनका चयन नहीं हुआ। इसके बावजूद उन्होंने तैयारी जारी रखी। इस बार भर्ती प्रक्रिया में साक्षात्कार नहीं होने पर उनका चयन हो गया। 


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26 साल प्राइवेट स्कूल में पढ़ाया, हार नहीं मानी 
दिलचस्प बात यह है कि सरकारी नौकरी की तैयारी के साथ शर्मा ने करीब 26 साल तक निजी विद्यालय में बच्चों को पढ़ाया। वह विवेकानंद विद्यापीठ और दून पब्लिक स्कूल में हिंदी तथा संस्कृत का अध्यापन करते रहे। दून पब्लिक स्कूल के निदेशक प्रशांत जैन के अनुसार, शर्मा अध्यापन के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी जुटे रहते थे। शर्मा के पिता लक्ष्मण सिंह भी शिक्षक थे। उनके दो बेटे उत्तर प्रदेश पुलिस में कार्यरत हैं और तीन बेटियां हैं। उनकी एक बेटी का भी शिक्षक पद पर चयन हुआ है और वह प्रतीक्षा सूची में है। शर्मा कहते हैं कि हर असफल प्रयास के बाद उन्होंने अपनी तैयारी में कुछ न कुछ सुधार किया। उनका मानना है कि उम्र सफलता की राह में बाधा नहीं है, बशर्ते प्रयास जारी रहे। अब 59 वर्ष की उम्र में मिली नियुक्ति शर्मा के लिए 27 वर्षों की उस यात्रा का पड़ाव है, जिसमें कई बार चयन की उम्मीद जगी और टूटी, लेकिन सरकारी शिक्षक बनने का लक्ष्य नहीं डगमगाया। 

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