West Bengal Election 2026: भवानीपुर सीट पर नामांकन से पहले कोर्ट पहुंचे सुवेंदु अधिकारी, पुलिस पर जानकारी छिपाने का आरोप

Edited By Updated: 19 Mar, 2026 08:36 PM

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भवानीपुर सीट से मुकाबले से पहले सियासत गरमा गई है। विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने नामांकन दाखिल करने से पहले कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भवानीपुर सीट से मुकाबले से पहले सियासत गरमा गई है। विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने नामांकन दाखिल करने से पहले कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

पुलिस पर गंभीर आरोप

सुवेंदु अधिकारी ने अपनी याचिका में राज्य पुलिस पर आरोप लगाया है कि उनके खिलाफ दर्ज मामलों की पूरी और सही जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। उनका कहना है कि इससे नामांकन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

 नामांकन में क्यों जरूरी है पूरी जानकारी?

चुनाव में उम्मीदवार को नामांकन के साथ फॉर्म-26 (एफिडेविट) जमा करना होता है। इसमें उम्मीदवार को अपनी व्यक्तिगत जानकारी, शिक्षा, संपत्ति, आय के स्रोत और आपराधिक मामलों से जुड़ी सभी जानकारी देनी होती है। यदि कोई तथ्य छिपाया जाता है या गलत जानकारी दी जाती है, तो उम्मीदवार का नामांकन रद्द हो सकता है या कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। इसी वजह से अधिकारी ने अदालत से मांग की है कि पुलिस को निर्देश दिया जाए कि उनके खिलाफ दर्ज सभी FIR की पूरी सूची उपलब्ध कराई जाए।

क्या है पूरा मामला?

दिसंबर 2022 में अदालत ने निर्देश दिया था कि बिना कोर्ट की अनुमति के सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ नई FIR दर्ज नहीं होगी। बाद में अक्टूबर 2025 में यह सुरक्षा हटा दी गई और कोर्ट ने कहा कि ऐसी राहत स्थायी नहीं हो सकती। उसी आदेश में अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज कई मामलों को निरस्त करते हुए उन्हें राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था। फरवरी 2026 में उनके काफिले पर हमले के मामले में भी अदालत ने उन्हें अस्थायी राहत दी थी।

सियासी टकराव तेज

सुवेंदु अधिकारी का कहना है कि इन सबके बावजूद पुलिस उन्हें मामलों की स्पष्ट जानकारी नहीं दे रही है, जिससे चुनावी प्रक्रिया में बाधा आ रही है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी के बीच हाई-प्रोफाइल मुकाबले की तैयारी चल रही है।

 जल्द हो सकती है सुनवाई

हाई कोर्ट में इस याचिका पर जल्द सुनवाई होने की उम्मीद है। इस फैसले का असर चुनावी रणनीति और नामांकन प्रक्रिया पर पड़ सकता है।

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