CM शुभेंदु अधिकारी का बड़ा फैसला: बंगाल में मौलवियों की सैलरी बंद, महिलाओं को 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता

Edited By Updated: 20 May, 2026 01:54 PM

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पश्चिम बंगाल सरकार ने मंगलवार को धर्म आधारित सरकार से मिलने सभी योजनाओं को बंद कर दिया है। शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि मौलवियों, मदरसा को धर्म के आधार पर किसी भी योजना को अब लाभ नहीं दिया जाएगा। आप को बता दें कि ममता बनर्जी सरकार 2012 से इमामों को हर...

नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल सरकार ने मंगलवार को धर्म आधारित सरकार से मिलने सभी योजनाओं को बंद कर दिया है। शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि मौलवियों, मदरसा को धर्म के आधार पर किसी भी योजना को अब लाभ नहीं दिया जाएगा। आप को बता दें कि ममता बनर्जी सरकार 2012 से इमामों को हर महीने 3000 और पुजारियों को 2000 रुपए भत्ता दे रही थी। ये भत्ता 41,205 इमामों और इसके अलावा 39,028 मुअज्जिनों को भी मस्जिद से अजान करने के लिए भत्ता दिया जा रहा था। मतलब इस योजना के 80,000 से ज्यादा लाभार्थी मुसलमान थे। पुजारियों को तो बहुत हंगामे के बाद 2020 में जोड़ा गया। और मात्र  4,800 पुजारियों को दिया जा रहा था। 

महिलाओं को 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता को मंजूरी
वहीं सरकार ने राज्य की महिलाओं के लिए 'अन्नपूर्णा' वित्तीय सहायता योजना को मंगलवार को अधिसूचित कर दिया, जो मौजूदा 'लक्ष्मी भंडार' योजना की जगह लेगी। अधिसूचना के मुताबिक, अन्नपूर्णा योजना एक जून से लागू होगी और इसके तहत महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। 

ओबीसी आरक्षण को लेकर लिया ये फैसला 
2010 से पहले राज्य की ओबीसी आरक्षण सूची में शामिल 66 समुदायों को नियमित कर दिया, जिससे सात फीसदी कोटे के लिए उनकी पात्रता बहाल हो गई। यह कदम राज्य मंत्रिमंडल के उस निर्णय के बाद उठाया गया है, जिसके तहत मई 2024 के कलकत्ता उच्च न्यायालय के एक फैसले के अनुपालन में राज्य की मौजूदा अन्य पिछड़ा जाति (ओबीसी) सूची को रद्द कर दिया गया था। 

सरकारी सेवाओं में सात प्रतिशत आरक्षण
उच्च न्यायालय के फैसले में 2010 और 2012 के बीच जोड़े गए 77 अतिरिक्त समुदायों को जारी किए गए ओबीसी दर्जे और प्रमाण पत्रों को रद्द कर दिया गया था। विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में प्रस्तावित जनगणना से पहले यह घटनाक्रम जातिगत समीकरणों को नया रूप दे सकता है और इसके दूरगामी सामाजिक-आर्थिक परिणाम हो सकते हैं। राज्य के पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि एक ही श्रेणी में रखे गए ये समुदाय (जिनमें से तीन मुस्लिम समुदाय हैं) अब सरकारी सेवाओं में सात प्रतिशत आरक्षण के पात्र होंगे। वर्तमान नियमितीकरण ने पिछली प्रणाली का स्थान ले लिया है, जिसमें 'अधिक पिछड़ा' के रूप में पहचाने जाने वाले वर्ग 'ए' के ​​तहत 10 प्रतिशत और 'पिछड़ा' के रूप में पहचाने जाने वाले वर्ग 'बी' के तहत सात प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान था। 

मंत्रिमंडल की बैठक के बाद लिया फैसला 
ओबीसी सूची में कपाली, कुर्मी, सुद्रधर, कर्मकार, सूत्रधार, स्वर्णकार, नापित, तांती, धानुक, कसाई, खंडैत, तुरहा, देवंगा और गोला जैसे कई पारंपरिक एवं सामाजिक समुदाय शामिल हैं। इस सूची में शामिल तीन मुस्लिम समुदाय पहाड़िया, हज्जाम और चौदुली हैं। मंगलवार को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के बाद सामाजिक कल्याण मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने एक संवाददाता सम्मेलन में मौजूदा ओबीसी सूची को रद्द करने की घोषणा की थी। उन्होंने इसे अदालत के निर्देशों के अनुरूप सामाजिक न्याय और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया निर्णय बताया था। 


 

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