Edited By Vatika,Updated: 27 Jan, 2026 05:12 PM

पंजाब के सरकारी स्कूलों में लंबे समय से सेवाएं दे रहे कंप्यूटर अध्यापकों का गुस्सा
बटाला (साहिल, योगी): पंजाब के सरकारी स्कूलों में लंबे समय से सेवाएं दे रहे कंप्यूटर अध्यापकों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है। शिक्षा विभाग में वर्षों से काम कर रहे इन अध्यापकों ने सरकार पर वादाखिलाफी और टालमटोल की नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। कंप्यूटर फैकल्टी एसोसिएशन पंजाब ने ‘मिशन 2027’ की शुरुआत करते हुए संघर्ष को राज्यव्यापी रूप देने की घोषणा की है।
एसोसिएशन के प्रधान प्रदीप कुमार मलूका, जसपाल (फतेहगढ़ साहिब), लखविंदर सिंह (फिरोजपुर), परमवीर सिंह पम्मी, पवन शर्मा (जालंधर), हरचरण सिंह और जतिंदर सिंह सोढ़ी ने बताया कि पंजाब के सरकारी स्कूलों में करीब 6600 कंप्यूटर अध्यापक पिछले लगभग 20 वर्षों से बेहद कम वेतन और बिना किसी पक्की सेवा शर्तों के काम कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने सत्ता में आने से पहले बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन अब उन वादों को भुला दिया गया है।
हर फ्रंट पर सरकार को घेरेंगे कंप्यूटर अध्यापक
नेताओं ने कहा कि ‘मिशन 2027’ के तहत संघर्ष अब किसी एक जिले या क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। पंजाब के हर विधानसभा हलके और सरकार के हर सार्वजनिक कार्यक्रम में कंप्यूटर अध्यापक पहुंचकर विरोध दर्ज कराएंगे। मंत्री या विधायक जहां भी जाएंगे, वहां अध्यापक काली पट्टियां और बैनर लेकर सरकार की वादाखिलाफी उजागर करेंगे। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर #सीएफ_मिशन2027 के नाम से मुहिम चलाई जाएगी, जिसमें अध्यापक अपनी समस्याओं और सरकार की अनदेखी को जनता के सामने रखेंगे।
शिक्षा मंत्री का ‘दिवाली गिफ्ट’ निकला जुमला
अध्यापक नेताओं ने कहा कि 15 सितंबर 2022 को शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने दिवाली के मौके पर कंप्यूटर अध्यापकों की मांगें पूरी करने का ऐलान किया था। मंत्री ने भरोसा दिलाया था कि उन्हें विभाग में पक्का किया जाएगा और छठे वेतन आयोग का लाभ दिया जाएगा। लेकिन समय बीतने के बावजूद यह घोषणा महज सियासी जुमला साबित हुई है।
क्या हैं कंप्यूटर अध्यापकों की मुख्य मांगें?
अध्यापकों की प्रमुख मांग है कि उन्हें बिना शर्त शिक्षा विभाग में नियमित किया जाए, पंजाब सिविल सेवा नियमों के तहत पूरा वेतन व भत्ते दिए जाएं और छठा वेतन आयोग तुरंत लागू किया जाए। इसके अलावा, जिन कंप्यूटर अध्यापकों की ड्यूटी के दौरान या अन्य कारणों से मृत्यु हो चुकी है, उनके आश्रितों को आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी दी जाए। नेताओं के अनुसार अब तक 100 से अधिक अध्यापकों की मौत हो चुकी है, लेकिन सरकार ने उनके परिवारों की कोई सुध नहीं ली। अंत में अध्यापक नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।