खुशहाल जीवन चाहते हैं तो रखें इस प्रकार की सोच

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Friday, September 23, 2016-10:01 AM

* तुम्हारा मस्तिष्क भागने की सोच रहा है और उस स्तर पर जाने का प्रयास नहीं कर रहा है, जहां गुरु ले जाना चाहते हैं, तुम्हें उठाना चाहते हैं।

 

* आज भगवान का दिया हुआ एक उपहार है, इसलिए इसे प्रेजेंट कहते हैं।

 

* हमेशा आराम की चाहत में तुम आलसी हो जाते हो। हमेशा पूर्णता की चाहत में तुम क्रोधित हो जाते हो। हमेशा अमीर बनने की चाहत में तुम लालची हो जाते हो।

 

* एक निर्धन व्यक्ति नया साल वर्ष में एक बार मनाता है। एक धनाढ्य व्यक्ति हर दिन लेकिन जो सबसे समृद्ध होता है, वह हर क्षण मनाता है।

 

* प्रेम सब कुछ देता है, कभी भी लेता नहीं।

 

* श्रद्धा यह समझने में है कि आप हमेशा वह पा जाते हैं, जिसकी आपको जरूरत होती है।

 

* प्रेम कोई भावना नहीं है, यह आपका अस्तित्व है।

 

* जीवन ऐसा कुछ नहीं है जिसके प्रति बहुत गंभीर रहा जाए। जीवन तुम्हारे हाथों में खेलने के लिए एक गेंद है। गेंद को पकड़े मत रहो।

 

* इच्छा हमेशा ‘मैं’ पर लटकती रहती है। जब ‘मैं’ स्वयं लुप्त हो रहा हो, इच्छा भी समाप्त हो जाती है, ओझल हो जाती है।

 

* चाहत या इच्छा तब पैदा होती है जब आप खुश नहीं होते। जब आप बहुत खुश होते हैं तब संतोष होता है। संतोष का अर्थ है कोई इच्छा न होना।

 

* यदि तुम लोगों का भला करते हो, तुम अपनी प्रकृति की वजह से करते हो।

 

* मैं आपको बताता हूं, आपके भीतर एक परमानंद का फव्वारा है, प्रसन्नता का झरना है। आपके मूल के भीतर सत्य, प्रकाश, प्रेम है, वहां कोई अपराध बोध नहीं है, वहां कोई डर नहीं है। मनोवैज्ञानिकों ने कभी इतनी गहराई में नहीं देखा।
 


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