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भक्त को दर्शन देने प्रकट हुए हनुमान, ज्योतिषीय उपचार के लिए लगता है भक्तों का तांता

  • भक्त को दर्शन देने प्रकट हुए हनुमान, ज्योतिषीय उपचार के लिए लगता है भक्तों का तांता
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Wednesday, November 02, 2016-2:58 PM

हर संकट से बचाने वाले रुद्रावतार हनुमान जी माता अंजनी और वानर राज केसरी के पुत्र हैं। हालांकि हनुमान जी की जन्मतिथि पर कई मतभेद हैं लेकिन अधिकतर लोग चैत्र शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को ही हनुमान जयंती के रूप में मानते हैं।


 हनुमान जी के जन्म का वर्णन वायु पुराण में किया गया है। हर संकट को दूर करने वाले माने जाते हैं हनुमान जी इसलिए उन्हें संकटमोचन भी कहा गया है। वाराणसी में स्थापित संकट मोचन हनुमान मंदिर हनुमान जी के कई पवित्र मंदिरों में से एक है। यह बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के नजदीक दुर्गा मंदिर और नए विश्वनाथ मंदिर के रास्ते में स्थित है। संकटमोचन का अर्थ है परेशानियों अथवा दुखों को हरने वाला। यहां हनुमान जयंती के दौरान एक विशेष शोभायात्रा निकाली जाती है जो दुर्गाकुंड से सटे ऐतिहासिक दुर्गा मंदिर से लेकर संकटमोचन तक चलती है। 


भगवान हनुमान जी को प्रसाद के रूप में शुद्ध घी के बेसन के लड्डू चढ़ाए जाते हैं। भगवान हनुमान के गले में गेंदे के फूलों की माला सुशोभित रहती है। इस मंदिर की एक विशेषता यह है कि भगवान हनुमान की मूर्ति मिट्टी की बनी है। माना जाता है कि इस मंदिर की स्थापना वहीं हुई है जहां गोस्वामी तुलसीदास जी को पहली बार हनुमान जी ने दर्शन दिया था। संकटमोचन मंदिर की स्थापना गोस्वामी तुलसीदास ने की थी।


परम्पराओं की मानें तो कहा जाता है कि मंदिर में नियमित रूप से आगंतुकों पर भगवान हनुमान की विशेष कृपा होती है। हर मंगलवार और शनिवार को हजारों की संख्या में लोग भगवान हनुमान को पूजा-अर्चना अर्पित करने के लिए कतार में खड़े रहते हैं।  वैदिक ज्योतिष के अनुसार भगवान हनुमान मनुष्यों को शनि ग्रह के क्रोध से बचाते हैं अथवा जिन लोगों की कुंडलियों में शनि गलत स्थान पर स्थित होता है वे विशेष रूप से ज्योतिषीय उपचार के लिए इस मंदिर में आते हैं। 


कुछ ज्योतिषियों का मानना है कि हनुमान जी की पूजा करने से मंगल ग्रह की वजह से बुरे प्रभाव को बेअसर किया जा सकता है। जानकारी के अनुसार संकटमोचन फाऊंडेशन की स्थापना मंदिर के महंत श्री वीरभद्र मिश्र द्वारा 1982 में हुई थी। यहां हनुमान जयंती के दिन से विशाल भव्य संगीत समारोह आरंभ होता है जिसकी शुरूआत पं. कैली महाराज ने की थी। कार्तिक मास में नवाह्न पाठ होता है जिसमें विश्व के मशहूर कथा वाचक राम कथा का गान करते हैं।

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