जानिए, तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर की आकर्षक बातें

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Wednesday, October 11, 2017-11:21 AM

आंध्र प्रदेश के चितूर जिले में तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर को कौन नहीं जानता। यह भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है। प्रत्येक वर्ष यहां लाखों श्रद्धालु तिरुपति बाला जी के दर्शन के लिए आते हैं। तिरुमाला की वेंकट पहाड़ी पर बना ये मंदिर बहुत ही आकर्षक है। वेंकट पहाड़ी का स्वामी होने के कारण ही इन्हें वेंकटेश्वर कहा जाने लगा। भगवान वेंकटेश्वर को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। कहा जाता है कि भगवान विष्णु ने कुछ समय के लिए पुष्करणी नामक तालाब के किनारे पर निवास किया था जो तिरुनाला के समीप स्थित है। 


तिरुपति वेंकटेश्वर के मंदिर में भगवान विष्णु के अवतार तिरुपति बाला जी का निवास है। यहां भगवान विष्णु के अवतार वेंकटेश्वर अधिक अद्धभूत और अाकर्षक प्रतिमा के रुप में विराजमान है। आइए जानते हैं इस भव्य मंदिर से जुडी कुछ आकर्षक बातें:-

 

इस प्रतिमा के सामने एक मिट्टी का दिया जलता है जो कभी भी नहीं बुझा। कहा जाता है कि ये दिया वर्षों से जल रहा है। 


प्रतिमा पर असली बाल है और बाल कभी उलझते नहीं हमेशा मुलायम रहते हैं। यहां भक्त जन प्रभु तिरुपति वेंकटेश्वर को अपने बाल चढ़ावे के तौर पर अर्पण करते हैं। 


कहा जाता है कि भक्तों द्दारा किए बाल जिस भी कीमत पर बिकते हैं, उस कीमत से वेंकटेश्वर भगवान, कुबेर से लिए गए ऋण को चुकाते हैं। 


मान्यता है कि जितनी कीमत के बाल दिए जाते हैं, वेंकटेश्वर भगवान उससे दस गुना ज्यादा कीमत लौटाते हैं।


वेंकटेश्वर भगवान जी की मूर्ति 990 डिग्री का तापमान बनाए रखती है अभिषेक के समय भी देवता को नियमत रुप से पसीना आता रहता है। मूर्ति हमेशा गिली रहती है चाहे उसे कितना भी सुखाया जाए। 


मंदिर के मुख्य द्दार पर पड़ी छड़ी के बारे में कहा जाता है कि अंनथा अल्वर यह छड़ी का उपयोग भगवान बाला जी के बचपन में उन्हें मारने के लिए करते थे। 


वैकुंठ एकादशी के अवसर पर लोग यहां पर प्रभु के दर्शन के लिए आते हैं, जहां पर आने के पश्चात उनके सभी पाप धुल जाते हैं। 


मान्यता यह भी है कि यहां आने के पश्चात व्यक्ति को जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्ति मिल जाती है।

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