उत्पन्ना एकादशी व्रत: अक्षय पुण्य का भागी बनाएगा समय पर किया गया पारण

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Friday, November 25, 2016-9:02 AM

एकादशी के दिन ब्रह्म मूहर्त में श्री हरि विष्णु की पुष्प, फूल, जल धूप, अक्षत से पूजा की जाती है। इस व्रत में केवल फलाहार का ही भोग लगाया जाता है। यह मोक्ष देने वाला व्रत माना जाता है।


उत्पन्ना एकादशी का व्रत जो जन करता है, वह सभी सुखों को भोगकर अंत में श्री विष्णु जी की शरण में चला जाता है। उनको तीर्थ और दर्शन करने से जो पुण्य़ मिलता है वह एकादशी व्रत के पुण्य के सोलहवें भाग के बराबर भी नही़ं है। इसके अतिरिक्त व्यतीपात योग, संक्रान्ति में तथा चन्द्र-सूर्य ग्रहण में दान देने से और कुरुक्षेत्र में स्नान करने से जो पुण्य मिलता है वही पुण्य मनुष्य को एकादशी का व्रत करने से प्राप्त होता है।


दश श्रेष्ठ ब्राह्माणों को भोजन कराने से जो पुण्य मिलता है। वह पुण्य एकादशी के पुण्य के दसवें भाग के बराबर होता है। निर्जल व्रत करने का आधा फल एक बार भोजन करने के बराबर होता है। इस व्रत में शंख से जल नहीं पीना चाहिए। एकादशी व्रत का फल हजार यज्ञों से भी अधिक है।


उत्पन्ना एकादशी तिथि पारण समय 
26 नवंबर को, पारण (व्रत तोडऩे का) समय- 07:03 से 09:06

पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय-10:11

एकादशी तिथि प्रारम्भ- 24 नवंबर 2016 को 05:25 बजे
एकादशी तिथि समाप्त- 25 नवंबर 2016 को 07:41 बजे
 


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