भारी ठंड के दौरान अंगीठी जला कर सोने से हो रही मौतें

Edited By Updated: 05 Jan, 2023 03:57 AM

deaths due to sleeping by burning fireplace during heavy cold

उत्तर भारत में इन दिनों भारी सर्दी ने जनजीवन अस्त व्यस्त कर दिया है। एक ओर सड़क दुर्घटनाओं में मौतें हो रही हैं तो दूसरी ओर सर्दी से बचने के लिए घरों में अंगीठी जला कर सो रहे लोग जान गंवा रहे हैं :

उत्तर भारत में इन दिनों भारी सर्दी ने जनजीवन अस्त व्यस्त कर दिया है। एक ओर सड़क दुर्घटनाओं में मौतें हो रही हैं तो दूसरी ओर सर्दी से बचने के लिए घरों में अंगीठी जला कर सो रहे लोग जान गंवा रहे हैं : 

* 27 दिसम्बर, 2022 को नैनीताल (उत्तराखंड) के तल्लीताल क्षेत्र में ठंड से बचने के लिए कमरे में अंगीठी जलाकर सो रहे पति-पत्नी बेहोश हो गए जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया। उन दोनों की जान तो बच गई परंतु महिला के गर्भ में पल रहे 8 माह के बच्चे की मौत हो गई। 
* 29 दिसम्बर, 2022 को तरावड़ी (हरियाणा) के एक मकान में अंगीठी जला कर सो रहे 16 वर्षीय किशोर तथा उसकी 10 माह की भांजी की अंगीठी की गैस चढऩे से मृत्यु हो गई। 

* 30 दिसम्बर, 2022 को बरेली (उत्तर प्रदेश) के एक रेस्त्रां के कमरे में अंगीठी जला कर सोए 3 कर्मचारियों में से एक की दम घुटने से मृत्यु हो गई तथा 2 को बेहोशी की हालत में इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया। 
* 31 दिसम्बर, 2022 को रानीखेत (उत्तराखंड) के गांव ‘पंत कोटली’ में घर में सो रहे 16 वर्षीय किशोर की मौत अंगीठी की गैस चढऩे से हो गई जबकि उसके 2 चचेरे भाई बेहोश हो गए। 
* 2 जनवरी, 2023 को मेरठ (उत्तर प्रदेश) में बिना वैंटीलेशन वाले एक मकान में रहने वाले नेपाली दम्पति और उनकी 4 वर्ष की बेटी की, जिसका उसी दिन जन्म दिन था, अंगीठी के धुएं से दम घुटने से मौत हो गई। 

* 3 जनवरी, 2023 को फगवाड़ा (पंजाब) के गांव ‘रिहाना जट्टा’ के निकट एक ढाबे में ठंड से बचने के लिए दरवाजा बंद कर कमरे में अंगीठी जला कर सो रहे 2 व्यक्तियों की गैस चढऩे से जान चली गई। 
* 3 जनवरी, 2023 को ही पटियाला (पंजाब) के ‘मलकाना पत्ती’ इलाके में ठंड से बचने के लिए अंगीठी से आग सेंक रहे पिता-पुत्र झुलस गए।
* 3 जनवरी, 2023 को ही गुरुग्राम (हरियाणा) में डी.एल.एफ. फेज-3 थाना क्षेत्र में एक मकान के सर्वेंट क्वार्टर में एक घरेलू सहायक और सहायिका की बंद कमरे में जलाई अंगीठी के धुएं से दम घुटने से जान चली गई। 

क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों का कहना है कि हवा आने-जाने के लिए कोई व्यवस्था न होने के कारण कार्बन मनोआक्साइड की अधिकता तथा आक्सीजन की कमी  हो जाने से ऐसी दुर्घटनाएं हो रही हैं। अत: कभी भी बंद कमरे में अंगीठी या कांगड़ी जलाकर नहीं सोना चाहिए।—विजय कुमार 

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