ईरान जंग में भारत बना प्रमुख विश्व खिलाड़ी ! तेल संकट पर संभाला मोर्चा, होर्मुज़ से सबसे अधिक 8 भारतीय जहाज़ करवाए पार

Edited By Updated: 05 Apr, 2026 12:02 PM

8 indian vessels have crossed strait of hormuz among highest in the world

India ने मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच बड़ी रणनीतिक मजबूती दिखाई है। Strait of Hormuz से 8 भारतीय जहाज सुरक्षित गुजर चुके हैं, जिससे ईंधन सप्लाई बनी रही। Iran के नियंत्रण के बावजूद भारत की ऊर्जा सुरक्षा फिलहाल मजबूत है।

International Desk: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष के बीच India के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक Strait of Hormuz, जहां इस समय युद्ध जैसे हालात हैं, वहां से भारत के कम से कम 8 जहाज सफलतापूर्वक गुजर चुके हैं।यह वही जलमार्ग है, जहां से दुनिया का लगभग 20% तेल ट्रांसपोर्ट होता है। लेकिन Iran ने यहां अपनी पकड़ मजबूत कर ली है और कई जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित किया जा रहा है। इसके बावजूद भारत के जहाजों का सुरक्षित पार होना एक बड़ी रणनीतिक सफलता माना जा रहा है।

 

Strait of Hormuz  सुरक्षित निकले  जहाज
सुरक्षित पार होने वाले भारतीय जहाजों में कई बड़े टैंकर शामिल हैं। इन जहाजों ने भारत के विभिन्न बंदरगाहों जैसे मुंद्रा, कांडला और अन्य जगहों पर सुरक्षित पहुंचकर देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया।

  • Green Sanvi – लगभग 46,650 टन LPG के साथ
  • BW TYR और BW ELM – करीब 94,000 टन LPG
  • Pine Gas और Jag Vasant – 92,612 टन LPG
  • MT Shivalik और MT Nanda Devi – 92,712 टन LPG
  • Jag Laadki – 80,886 टन कच्चा तेल (UAE से)

 

नौसेना की बड़ी भूमिका
इस पूरे ऑपरेशन में भारतीय नौसेना की भूमिका बेहद अहम रही। युद्ध के हालात को देखते हुए नौसेना के युद्धपोत अलर्ट पर थे और जरूरत पड़ने पर जहाजों को सुरक्षा देने के लिए तैयार थे। इससे भारतीय जहाजों को जोखिम भरे क्षेत्र में भी सुरक्षित रास्ता मिल सका।

 

ऊर्जा सुरक्षा पर क्या असर?
मिडिल ईस्ट में युद्ध के कारण तेल और गैस की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ा है। लेकिन भारत ने समय रहते अपने जहाजों को सुरक्षित निकालकर यह सुनिश्चित किया कि देश में LPG और कच्चे तेल की कमी न हो। सरकार लगातार ईरान के साथ बातचीत कर रही है ताकि भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिलता रहे।

 

ईरान की चेतावनी और शर्त
Iran ने साफ कहा है कि “non-hostile” यानी गैर-शत्रुतापूर्ण जहाजों को ही होर्मुज से गुजरने दिया जाएगा। इसका मतलब है कि अमेरिका और इजराइल से जुड़े जहाजों को रोका जा सकता है।स्थिति को और गंभीर बनाते हुए ईरान ने Bab el-Mandeb Strait पर भी दबाव बनाने के संकेत दिए हैं। यह जलमार्ग भी वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम है। अगर यहां भी तनाव बढ़ता है, तो दुनिया की सप्लाई चेन को बड़ा झटका लग सकता है।कुल मिलाकर, जहां एक तरफ मिडिल ईस्ट में युद्ध से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा रहा है, वहीं दूसरी तरफ भारत ने अपनी रणनीति, कूटनीति और नौसेना की ताकत से हालात को संभाल लिया है। 

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