‘बुजुर्गों के लिए’ रेल किराए में बंद छूट जल्द बहाल की जाए!

Edited By Updated: 30 Dec, 2025 05:13 AM

discontinued concession on train fares for senior citizens should be restoresoon

भारतीय रेलवे को देश की ‘लाइफ लाइन’ कहा जाता है जिसमें वरिष्ठ नागरिकों समेत रोजाना 2.3 करोड़ लोग यात्रा करते हैं। ‘कोरोना’ महामारी से पहले भारतीय रेलवे 58 वर्ष से अधिक आयु की महिला यात्रियों तथा 60 वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों को रेलगाडिय़ों के किराए...

भारतीय रेलवे को देश की ‘लाइफ लाइन’ कहा जाता है जिसमें वरिष्ठ नागरिकों समेत रोजाना 2.3 करोड़ लोग यात्रा करते हैं। ‘कोरोना’ महामारी से पहले भारतीय रेलवे 58 वर्ष से अधिक आयु की महिला यात्रियों तथा 60 वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों को रेलगाडिय़ों के किराए में विशेष छूट देता था। इसके अनुसार रेल किराए में महिलाओं को 50 प्रतिशत तक तथा पुरुषों को 40 प्रतिशत तक छूट मिलती थी। यह छूट सभी मेल/एक्सप्रैस/राजधानी/शताब्दी/दुरंतो आदि रेलगाडिय़ों में उपलब्ध थी जो बुजुर्ग यात्रियों के लिए आर्थिक रूप से बहुत मददगार थी।

महामारी के दौरान वित्तीय दबाव और यात्राओं की अनियमितताओं के कारण यह सुविधा 20 मार्च, 2020 से बंद कर दी गई और अभी तक निलम्बित है। इस कारण बुजुर्ग यात्रियों को अब किराए में छूट नहीं मिलती, जिससे उनकी यात्रा बहुत महंगी हो गई है। ‘सूचना का अधिकार’ के अंतर्गत मांगी गई एक जानकारी के जवाब में बताया गया है कि इस छूट को हटाने से रेलवे को पिछले 4 वर्षों में लगभग 5,800 करोड़ रुपए से अधिक का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हुआ है। उल्लेखनीय है कि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कई बार संसद में कहा है कि चूंकि रेलवे द्वारा यात्रियों को पहले ही भारी सबसिडी दी जा रही है, इसलिए यह छूट बहाल करना संभव नहीं है।

इस बीच संसद की स्थायी समिति ने स्लीपर तथा 3 ए.सी. श्रेणियों में रियायतें बहाल करने की सलाह दी है परंतु सरकार ने अभी तक इस सम्बन्ध में कोई निर्णय नहीं लिया है। विपक्षी दलों ने इस छूट को वापस लेने की आलोचना करते हुए कहा है कि सरकार वरिष्ठï यात्रियों के लिए 1600 करोड़ रुपयों का बोझ नहीं उठा पा रही। बुजुर्ग हमारे देश की सम्पदा है, जिन्होंने अपना जीवन देश को दिया है। उनसे यह सुविधा छीनना उचित नहीं। अत: इस सुविधा को जितनी जल्दी बहाल किया जाएगा बुजुर्ग यात्रियों के लिए उतना ही अच्छा होगा।-विजय कुमार

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