‘हिमाचल में नशा रोकने के लिए’ सरकार और पंचायतें हुईं जागरूक!

Edited By Updated: 27 Mar, 2026 04:05 AM

government and panchayats mobilize to curb drug abuse in himachal

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में पेश की गई एक रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी, 2023 से जनवरी, 2026 तक राज्य में नशा विरोधी कानून एन.डी.पी.एस. के 4246 मामले दर्ज किए गए और इन मामलों में 6000 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुईं। नशे के इन बढ़ते मामलों से इस पहाड़ी राज्य...

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में पेश की गई एक रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी, 2023 से जनवरी, 2026 तक राज्य में नशा विरोधी कानून एन.डी.पी.एस. के 4246 मामले दर्ज किए गए और इन मामलों में 6000 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुईं। नशे के इन बढ़ते मामलों से इस पहाड़ी राज्य में फैल रहे नशे के जाल के बारे में आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है। नशे के इस जाल से निकलने के लिए हिमाचल प्रदेश की सरकार ने पिछले साल नवम्बर महीने में राज्य व्यापी एंटी-चिट्टा जन आंदोलन की शुरुआत की थी और अब इसी अभियान के तहत हिमाचल की सरकार बड़े फैसले ले रही है। इन फैसलों के तहत न सिर्फ नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है बल्कि इन मामलों में शामिल पुलिस कर्मियों को बर्खास्त भी किया जा रहा है। 

10 मार्च, 2026 को शिमला के न्यू शिमला थाना पुलिस द्वारा दर्ज मामले में ‘मोगा’ (पंजाब) निवासी ‘संदीप शर्मा’ और ‘सिरमौर’ निवासी ‘प्रिया’ से हुई 562 ‘स्ट्रिप्स’, 11.57 ग्राम ‘एल.एस.डी.’ की बरामदगी की जांच के दौरान एस.टी.एफ. कुल्लू के कांस्टेबलों ‘नितेश’ व ‘अशोक’ तथा हैड कांस्टेबलों ‘राजेश कुमार’ तथा ‘समीर कुमार’ की संलिप्तता सामने आने के बाद चारों को प्रदेश पुलिस विभाग ने सेवा से बर्खास्त कर दिया है। हिमाचल प्रदेश में नशे के खिलाफ जीरो टॉलरैंस की नीति को सख्ती से लागू करते हुए अब तक 21 पुलिस कर्मी सेवा मुक्त किए जा चुके हैं। सिर्फ ‘शिमला’ पुलिस ने ही नशे के खिलाफ अभियान शुरू होने के बाद एन.डी.पी.एस. के 73 मामलों में 136 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया है। इनमें पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार के अलावा अन्य राज्यों के नशा तस्कर भी शामिल हैं। 23 मार्च को हिमाचल प्रदेश की कैबिनेट द्वारा लिए गए एक अन्य फैसले के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में चिट्टा तस्करी के मामले में जिस भी व्यक्ति पर आरोप तय हो जाएंगे, वह पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव नहीं लड़ पाएगा। 

हिमाचल प्रदेश में बढ़ रहे नशे के रुझान को नियंत्रित करने के लिए अब आम जनता भी इसमें हिस्सेदार बनने लगी है। इसके अंतर्गत ‘चंबा’ की द्रमण पंचायत के काथला गांव में किसी भी व्यक्ति या परिवार की चिट्टे जैसे गंभीर मादक पदार्थ की तस्करी में संलिप्तता पाए जाने पर उनका सामाजिक बहिष्कार करने का फैसला लिया गया है। काली माता महिला मंडल के सदस्यों की एक महत्वपूर्ण बैठक में लिए गए इस फैसले को लेकर महिला मंडल प्रधान कुंता देवी, कोषाध्यक्ष सुनो देवी तथा सचिव प्रिया ने बताया कि बैठक में सर्वसम्मति से नशा उन्मूलन को लेकर जागरूकता अभियान चलाने  तथा इस सामाजिक बुराई के विरुद्ध संगठित रूप से संघर्ष करने का भी निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि गांव में चिट्टा व अन्य नशे की बिक्री किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी ताकि भावी पीढ़ी को बेहतर भविष्य उपलब्ध करवाया जा सके।

देश में  फैल रहे नशे के जाल का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2025 की नैशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के मुताबिक 2023 में देश भर में एन.डी.पी.एस. के 1.25 लाख से ज्यादा मामले दर्ज किए गए। ऐसे में हिमाचल प्रदेश की सरकार द्वारा नशे में संलिप्त पुलिस कर्मियों की बर्खास्तगी और नशे की तस्करी में शामिल लोगों के पंचायत चुनाव लडऩे पर रोक लगाने जैसे फैसले जहां सरकार की इस मामले में गंभीरता को दर्शाते हैं, वहीं दूसरी तरफ चंबा की पंचायत का नशे के तस्करों का सामाजिक बहिष्कार का फैसला इस मामले में जनता की जागरूकता का प्रतीक है। यदि सभी राज्यों की सरकारें इस मामले में गंभीरता से काम लें और नशे के खिलाफ पंचायत स्तर तक इसी तरह से गंभीरता से कार्रवाई हो तो नशे की इस बुराई पर कुछ हद तक काबू पाया जा सकता है।-विजय कुमार

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