Edited By Niyati Bhandari,Updated: 21 May, 2026 02:55 PM

Ganga Dussehra 2026: सनातन धर्म में मां गंगा को केवल एक नदी नहीं, बल्कि मोक्षदायिनी और पापों का नाश करने वाली देवी माना गया है। पंचांग के अनुसार, इस वर्ष 25 मई 2026 को गंगा दशहरा का पावन पर्व मनाया जाएगा। इस दिन देश भर के प्रसिद्ध घाटों पर लाखों...
Ganga Dussehra 2026: सनातन धर्म में मां गंगा को केवल एक नदी नहीं, बल्कि मोक्षदायिनी और पापों का नाश करने वाली देवी माना गया है। पंचांग के अनुसार, इस वर्ष 25 मई 2026 को गंगा दशहरा का पावन पर्व मनाया जाएगा। इस दिन देश भर के प्रसिद्ध घाटों पर लाखों श्रद्धालु इस विश्वास के साथ डुबकी लगाते हैं कि उनके कई जन्मों के पाप धुल जाएंगे। लेकिन क्या शास्त्र वाकई यह कहते हैं कि पानी में एक गोता लगाने भर से हर बुरा कर्म मिट जाता है? ऋषियों और मुनियों द्वारा रचित शास्त्रों में इसका एक गहरा और चौंकाने वाला सत्य छिपा है।
गंगा मैया के नाम का उच्चारण सच्चे मन से करने वाले जीव के सभी पाप क्षण भर में नष्ट हो जाते हैं। सभी देवताओं में जैसे श्री विष्णु और लोकों में जैसे ब्रह्मलोक श्रेष्ठ हैं वैसे ही सभी नदियों में गंगा उत्तम है। जिन स्थानों पर गंगा, यमुना और सरस्वती बहती हैं, उन तीर्थों पर स्नान और आचमन करके मनुष्य मोक्ष का भागी बनता है। ऐसा वर्णन श्री पदमपुराण में मिलता है। गंगा धरती के प्राणियों के लिए अमृत का सागर है। इसका जल संसार के दुखों से संतप्त प्राणियों के लिए सुखों का खजाना है।

श्री हरि के चरण कमलों से प्रकट हुई गंगा पापों की स्थूल राशियों तक का भी नाश करने वाली हैं। नर्मदा, सरयू, बेतवा, तापी, पयोषिनी, चन्द्र, विपाशा, कर्मनाशिनी, पुष्पा, पूर्णा, दीपा, विदीपा, तथा सूर्यतन्या यमुना आदि नदियों में स्नान करने से जो पुण्य फल मिलता है वह सभी पुण्य एक गंगा के स्नान से सहज ही मनुष्य को मिल जाता है। गंगा स्नान करने से सहस्त्र गोदान, सौ अश्वमेध यज्ञ करने, सहस्त्र वृषभ दान करने के समान अक्षय फल की प्राप्ति होती है।

हिन्दुओं के प्रत्येक धार्मिक संस्कार में गंगा का जल प्रयोग किया जाता है और गंगा जल के बिना कोई भी धार्मिक संस्कार सफल नहीं माना जाता। शास्त्रों के अनुसार अंत समय में यदि किसी प्राणी के मुख में गंगाजल डाल दिया जाए तो भी जीव को प्रभु का परम धाम प्राप्त होता है।

गंगा में डुबकी लगाने मात्र से हर पाप नहीं धुलता। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार केवल वे पाप क्षमा योग्य होते हैं, जो जाने-अनजाने में या भूल से हुए होते हैं। जो व्यक्ति सोच-समझकर, योजनाबद्ध तरीके से दूसरों को कष्ट पहुंचाते हैं, उनके कर्मों का फल उन्हें अवश्य भुगतना पड़ता है। ऐसे पापों को गंगा मैया भी नहीं धो सकती।
