RGKar case: कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सबूत मिटाने के आरोपों की नए सिरे से जांच का दिया आदेश

Edited By Updated: 21 May, 2026 03:51 PM

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पश्चिम बंगाल के साल 2024 के आरजी कर मामले में सबूतों को मिटाने के आरोपों पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने सख्त निर्देश दिए हैं।कलकत्ता उच्च न्यायालय ने वारदात से जुड़े कथित सबूतों को नष्ट करने और उनके साथ छेड़छाड़ के आरोपों की नए सिरे से जांच करने का एक बड़ा...

 नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल के साल 2024 के आरजी कर मामले में सबूतों को मिटाने के आरोपों पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने सख्त निर्देश दिए हैं।कलकत्ता उच्च न्यायालय ने वारदात से जुड़े कथित सबूतों को नष्ट करने और उनके साथ छेड़छाड़ के आरोपों की नए सिरे से जांच करने का एक बड़ा आदेश जारी किया है। अदालत ने पीड़ित परिवार द्वारा उठाए गए गंभीर सवालों और आशंकाओं को ध्यान में रखते हुए यह कड़ा कदम उठाया है।

तीन सदस्यीय SIT करेगी जांच, 25 जून तक सौंपनी होगी रिपोर्ट

जस्टिस शम्पा सरकार और जस्टिस तीर्थंकर घोष की खंडपीठ ने आज (21 मई 2026) इस मामले में आदेश जारी किया। कोर्ट के निर्देशानुसार, इस तीन सदस्यीय एसआईटी (SIT) की कमान CBI के ज्वाइंट डायरेक्टर (इस्टर्न ज़ोन) के हाथों में होगी। एसआईटी को आदेश दिया गया है कि वह घटना वाली रात पीड़ित डॉक्टर द्वारा डिनर (रात का भोजन) करने के समय से लेकर, अगले दिन उसके अंतिम संस्कार (क्रिमेशन) होने तक की पूरी कड़ियों और घटनाक्रम की नए सिरे से गहन जांच करे। इस री-इन्वेस्टिगेशन के लिए सीबीआई (CBI) किसी भी संदिग्ध या संबंधित व्यक्ति को तलब कर उससे पूछताछ कर सकती है। इस जांच की विस्तृत रिपोर्ट 25 जून 2026 तक अदालत के समक्ष पेश करनी होगी।

पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष पर भी कसा शिकंजा, ED को मिली हरी झंडी

इसी मामले से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में, आरजी कर मेडिकल कॉलेज के विवादित पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।  मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर आधिकारिक सरकारी आदेश साझा करते हुए बताया कि पश्चिम बंगाल सरकार ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को संदीप घोष के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में मुकदमा चलाने (Sanction of Prosecution) की मंजूरी दे दी है। शुभेंदु अधिकारी ने कहा, "पिछली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार ने अनैतिक रूप से इस मामले की जांच प्रक्रिया को लंबे समय तक रोके रखा था। लेकिन कानून से ऊपर कोई नहीं है और सच को हमेशा के लिए दबाया नहीं जा सकता।"

क्या था पूरा मामला

  • 9 अगस्त 2024: आरजी कर मेडिकल कॉलेज के सेमिनार रूम में 31 वर्षीय पोस्टग्रेजुएट ट्रेनी महिला डॉक्टर का शव मिला था, जिसके बाद पूरे देश में न्याय की मांग को लेकर भारी आक्रोश और विरोध प्रदर्शन हुए थे।
  • नवंबर 2025: कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश पर ही सीबीआई ने अस्पताल में हुए करोड़ों रुपये के वित्तीय घोटालों और भ्रष्टाचार के मामले में संदीप घोष, डॉ. आशीष कुमार पांडेय, बिप्लब सिंहा समेत अन्य के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
  • पॉलीग्राफ टेस्ट और जमानत: जांच के दौरान सीबीआई ने संदीप घोष का पॉलीग्राफ टेस्ट भी कराया था। हालांकि, बाद में कानून के मुताबिक निर्धारित 90 दिनों के भीतर सीबीआई द्वारा चार्जशीट दाखिल न कर पाने के कारण सियालदह कोर्ट से संदीप घोष और ताला थाना के पूर्व ओसी अभिजीत मंडल को जमानत मिल गई थी।

अब हाईकोर्ट द्वारा गठित नई एसआईटी (SIT) इस बात का पता लगाएगी कि क्या वाकई इस खौफनाक वारदात के पीछे सबूतों को योजनाबद्ध तरीके से नष्ट किया गया था।

 

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