Edited By jyoti choudhary,Updated: 22 May, 2026 05:07 PM

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने केंद्र सरकार को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए रिकॉर्ड 2.86 लाख करोड़ रुपए का डिविडेंड देने का फैसला किया है। आरबीआई के केंद्रीय निदेशक मंडल ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह अब तक का सबसे बड़ा लाभांश माना जा रहा है, जिससे...
बिजनेस डेस्कः भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने केंद्र सरकार को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए रिकॉर्ड 2.86 लाख करोड़ रुपए का डिविडेंड देने का फैसला किया है। आरबीआई के केंद्रीय निदेशक मंडल ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह अब तक का सबसे बड़ा लाभांश माना जा रहा है, जिससे सरकार को राजकोषीय मोर्चे पर बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
आरबीआई के अनुसार, केंद्रीय बैंक की आय में पिछले वित्त वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में रिजर्व बैंक की सकल आय में 26.42 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि जोखिम प्रावधान (Risk Provision) से पहले खर्च में 27.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
केंद्रीय बैंक ने बताया कि 31 मार्च 2026 तक उसकी बैलेंस शीट 20.61 प्रतिशत बढ़कर 91.97 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई। आरबीआई ने कहा कि संशोधित इकोनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क (ECF) के तहत बैलेंस शीट के आकार का 4.5 से 7.5 प्रतिशत तक कंटिजेंसी रिस्क बफर बनाए रखने की अनुमति है। इसी ढांचे के तहत लाभांश वितरण का फैसला लिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को मिलने वाला यह बड़ा डिविडेंड वित्तीय घाटा नियंत्रित रखने, पूंजीगत व्यय बढ़ाने और विकास योजनाओं को गति देने में मददगार साबित हो सकता है। साथ ही इससे सरकार को अतिरिक्त उधारी की जरूरत भी कुछ हद तक कम हो सकती है।
पिछले साल RBI ने दिया था ₹2.69 लाख करोड़ का डिविडेंड
पिछले वर्षों की तुलना में भी इस बार लाभांश राशि में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 2024-25 के लिए आरबीआई ने केंद्र सरकार को 2.69 लाख करोड़ रुपए का डिविडेंड दिया था, जबकि उससे पहले यह राशि 2.11 लाख करोड़ रुपए रही थी।
अर्थशास्त्रियों के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार से आय, सरकारी बॉन्ड होल्डिंग और मुद्रा प्रबंधन से होने वाली कमाई में वृद्धि के कारण आरबीआई की आय मजबूत हुई है। यही वजह है कि केंद्रीय बैंक इस बार सरकार को अधिक लाभांश देने की स्थिति में पहुंचा।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम सरकार के लिए सकारात्मक संकेत है और इससे आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिल सकता है। हालांकि, आगे वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और घरेलू मुद्रास्फीति की स्थिति पर भी नजर बनी रहेगी।