‘अंग्रेजों के इंगलैंड में’ भारतीय गाड़ रहे सफलता के झंडे!

Edited By Updated: 27 May, 2026 03:08 AM

indians are flying the flag of success in  british england

अंग्रेजों ने वर्ष 1764 से 1857 तक ‘ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी’ के  तौर पर परोक्ष रूप से 93 वर्ष तक और फिर 1858 से 1947 तक 90 वर्ष तक इंगलैंड सरकार ने प्रत्यक्ष रूप से शासन किया।

अंग्रेजों ने वर्ष 1764 से 1857 तक ‘ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी’ के  तौर पर परोक्ष रूप से 93 वर्ष तक और फिर 1858 से 1947 तक 90 वर्ष तक इंगलैंड सरकार ने प्रत्यक्ष रूप से शासन किया।  इस प्रकार अंग्रेजों का भारत पर 183 वर्ष शासन रहा तथा इंगलैंड की लेबर पार्टी की सरकार के फैसलों के कारण ही 15 अगस्त, 1947 को भारत को अंग्रेजों के शासन से मुक्ति मिली थी। 

20 फरवरी, 1947 को इंगलैंड के प्रधानमंत्री ‘क्लेमेंट एटली’ ने इंगलैंड की संसद में यह ऐतिहासिक घोषणा की थी कि इंगलैंड सरकार 30 जून, 1948 से पहले भारत को पूरी सत्ता सौंप देगी। इसके बाद भारत के अंतिम वायसराय ‘लार्ड माऊंटबेटन’ ने भारत की आजादी की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया और अंतत: 15 अगस्त, 1947 को भारत को स्वतंत्रता मिल गई। स्वतंत्रता के बाद और उससे पहले भी कई भारतीय वैज्ञानिक, डाक्टर और इंजीनियर इंगलैंड तथा अन्य देशों में बसने शुरू हो गए थे। स्वतंत्रता से पूर्व इंगलैंड में शिक्षा प्राप्त करने के लिए जाने वालों में महात्मा गांधी भी शामिल थे जो 1888 में बैरिस्टर बनने के लिए लंदन गए थे जहां उन्होंने 1891 में अपनी डिग्री पूरी की थी।

भारत की स्वतंत्रता के समय और उसके बाद इंगलैंड की सरकार को श्रमिकों, डाक्टरों और इंजीनियरों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा था। इसे पूरा करने के लिए अंग्रेजों ने भारत तथा अन्य राष्ट्रमंडल देशों से प्रतिभाशाली लोगों को अपने देश में आने के लिए आकॢषत किया जिसका कई भारतीयों ने लाभ उठाया और वहां जा कर बस गए। पिछले 79 वर्षों के दौरान भारतीय मूल के लोगों ने इंगलैंड में हर क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है। वहां भारतीय नामों वाले अनेक इलाके कायम हो चुके हैं जहां भारतीय मूल के लोगों ने एक मिनी भारत ही बसा लिया है तथा इंगलैंड की राजनीति, अर्थव्यवस्था और व्यापार में अपनी सफलता के झंडे गाड़ कर निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। इंगलैंड की संसद में चुने जाने वाले पहले भारतीय पारसी मूल के सांसद ‘दादा भाई नौरोजी’ थे तथा वहां की संसद में भारतीय मूल के सांसदों और नेताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। इंगलैंड की वर्तमान संसद में भारतीय मूल के 29 सांसद हैं। यह इंगलैंड के इतिहास में प्रवासियों की अब तक की सबसे बड़ी राजनीतिक भागीदारी है। ‘ऋषि सुनक’ ने अक्तूबर, 2022 से जुलाई, 2024 तक इंगलैंड के भारतीय मूल के पहले प्रधानमंत्री के रूप में देश का नेतृत्व किया। 

इंगलैंड के उच्च सदन ‘हाऊस आफ लार्ड्स’ में भी कई दशकों से भारतीय मूल के लॉर्ड (जालंधर, पंजाब के रहने वाले ‘लॉर्ड स्वराज पॉल’, ‘लॉर्ड मेघनाद देसाई’ आदि) वहां के नीति-निर्माण में योगदान देते रहे हैं। इंगलैंड की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और वहां रोजगार पैदा करने में भारतीय मूल के अरबपतियों और भारतीय कम्पनियों का बहुत बड़ा योगदान रहा है। इनमें ‘हिंदुजा परिवार’ (अशोक लेलैंड) और ‘लोढ़ा परिवार’ जैसे भारतीय मूल के व्यवसायी अक्सर ‘संडे टाइम्स रिच लिस्ट’ में ब्रिटेन के सबसे अमीर लोगों की सूची में शीर्ष पर रहते हैं।
‘टाटा समूह’ भी इंगलैंड के सबसे बड़े निजी रोजगारदाताओं में से एक है। इंगलैंड की सबसे प्रतिष्ठित कार कम्पनियों ‘जगुआर-लैंड रोवर’ का मालिक टाटा ग्रुप ही है जिसे ‘रतन टाटा’ ने खरीदा था। ‘टाटा स्टील’ भी वहां के औद्योगिक ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा है।दूरसंचार और ऊर्जा क्षेत्र में ‘सुनील भारती मित्तल’ (‘भारती एयरटैल’ के चेयरमैन) को भारत-ब्रिटेन व्यापार संबंधों को मजबूत करने के लिए ‘सम्राट चाल्र्स तृतीय’ द्वारा आनरेरी ‘नाइटहुड’ के खिताब से सम्मानित किया गया। 

हाल ही में हरियाणा के ‘तुषार कुमार’ और उनकी मां ‘परवीन रानी’ इंगलैंड में मेयर चुने गए हैं। वे 2013 में वहां गए थे और वहीं बस गए। ‘तुषार कुमार’ ने 13 मई को इंगलैंड के ‘एल्स्ट्री’ और ‘बोरेहमवुड टाऊन काऊंसिल’ के अब तक के सबसे कम उम्र के भारतीय मूल का मेयर बनकर इतिहास रच दिया है जबकि उनकी मां परवीन रानी 20 मई को ‘हर्ट्समेयर बरो काऊंसिल’ की भारतीय मूल की पहली मेयर चुनी गई हैं। इस परिवार का पैतृक गांव हरियाणा के ‘खरखौदा’ में है। यकीनन आज इंगलैंड ही नहीं विश्व के ओर-छोर में भारतीय अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करवा रहे हैं जिस पर हर देशवासी गर्व कर सकता है।—विजय कुमार 

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