‘नेपाल-35 साल के बालेन शाह बने प्रधानमंत्री’ भारत से संबंधों में गर्मजोशी की उम्मीद!

Edited By Updated: 28 Mar, 2026 04:09 AM

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नेपाल में 239 साल पुरानी राजशाही व्यवस्था 2008 में खत्म हुई थी। तब से अब तक नेपाल में किसी भी पार्टी ने अपने दम पर सरकार नहीं बनाई। इस बार ‘राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी’ बालेन शाह के नेतृत्व में अपने दम पर बहुमत में आई है। 5 मार्च को हुए चुनाव में...

नेपाल में 239 साल पुरानी राजशाही व्यवस्था 2008 में खत्म हुई थी। तब से अब तक नेपाल में किसी भी पार्टी ने अपने दम पर सरकार नहीं बनाई। इस बार ‘राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी’ बालेन शाह के नेतृत्व में अपने दम पर बहुमत में आई है। 5 मार्च को हुए चुनाव में ‘राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी’ ने 275 में से 182 सीटों पर जीत हासिल की है। 35 साल के बालेन शाह का जन्म काठमांडू के गैर गाऊन में 1990 में हुआ था। बालेन के पिता राम नारायण शाह आयुर्वेद के डॉक्टर हैं और इनकी मां का नाम ध्रुवदेवी शाह है। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है और कई साल से नेपाल के हिप-हॉप संगीत जगत ‘नेफहॉप’ से जुड़े रहे हैं। बालेन शाह मई, 2022 में पहली बार नेपाल की राजधानी काठमांडू के मेयर बने थे। पिछले साल सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ शुरू हुए प्रदर्शनों के दौरान युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता और बढ़ गई। इन प्रदर्शनों में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और आॢथक ठहराव को लेकर भी गुस्सा था। इसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को पद छोडऩा पड़ा। 

नेपाल में जब बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने चुनावी जीत हासिल की तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बालेन शाह को टैलीफोन पर बधाई दी थी और अब शुक्रवार को जब बालेन शाह ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर लिखा कि ‘‘श्री बालेन शाह को नेपाल के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने पर हार्दिक बधाई। उनकी नियुक्ति नेपाल की जनता द्वारा आपके नेतृत्व में जताए गए विश्वास को दर्शाती है। मैं दोनों देशों के लोगों के पारस्परिक लाभ और भारत-नेपाल मित्रता और सहयोग को और भी नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए आपके साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूं।’’ बालेन शाह ने जून, 2023 में ‘काठमांडू’ के मेयर रहते हुए हिन्दी फिल्म ‘आदि पुरुष’ पर पाबंदी लगा दी थी। बालेन को इस बात पर आपत्ति थी कि फिल्म में हिन्दू देवी सीता को भारत से संबंधित बताया गया था। इसके अलावा 2020 में नेपाल के तत्कालीन प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली द्वारा उत्तराखंड के कई हिस्सों को नेपाल का हिस्सा बताने वाले नक्शे को उन्होंने अपने कार्यालय में लगा दिया था। 

इसी प्रकार नेपाल में झापा के दमक में बनने वाले  नेपाल-चीन फ्रैंडशिप इंडस्ट्रियल पार्क को बालेन शाह ने अपने घोषणापत्र से हटा दिया था। यह परियोजना नेपाल-भारत सीमा के पास स्थित संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी ‘चिकन नैक’ के नजदीक है, जो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोडऩे वाली एक संकरी पट्टी है। भारत इस प्रोजैक्ट को लेकर खुश नहीं था और इसे लेकर भारत की कई चिंताएं जगजाहिर हैं। महज तीन साल पहले बनी आर.एस.पी. और बालेन शाह नेपाल की बार्की पार्टियों और नेताओं की तुलना में बिल्कुल नए हैं। भारत के पास नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टियों और नेपाली कांग्रेस पार्टी के साथ काम करने का अनुभव है लेकिन आर.एस.पी. के साथ काम करना भारत के लिए भी नया अनुभव होगा। लिहाजा अब भारतीय विदेश मंत्रालय के अफसरों को भी इस मामले में नेपाल के साथ रिश्तों को लेकर कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी।

अब तक यह धारणा थी कि 2015 में नया संविधान लागू होने के बाद नेपाल में कोई भी पार्टी अपने दम पर सरकार नहीं बना पाएगी लेकिन बालेन शाह ने इस धारणा को भी तोड़ दिया है। बालेन शाह के लिए यही ताकत भी है और एक बड़ी चुनौती भी। ताकत इसलिए कि सरकार किसी के समर्थन पर निर्भर नहीं होगी। चुनौती इस लिहाज से होगी कि बालेन से न सिर्फ नेपाल के लोगों की अपार उम्मीदें हैं बल्कि भारत को भी नेपाल के साथ संबंधों में गर्मजोशी की आशा है क्योंकि नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली का चीन के प्रति झुकाव जग जाहिर था लेकिन फिलहाल बालेन शाह के मामले में ऐसा नजर नहीं आता।—विजय कुमार

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