ट्रम्प ईरान में वेनेजुएला जैसी स्थिति चाहते हैं लेकिन यह इतना आसान नहीं

Edited By Updated: 09 Mar, 2026 05:23 AM

trump wants a situation like venezuela in iran but it is not so easy

19 अगस्त, 1953 को ईरान के प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसादेघ, जो एक लोकतांत्रिक सरकार के अध्यक्ष थे, को तख्तापलट के जरिए सत्ता से हटा दिया गया, जिससे ईरान को शाह मोहम्मद रजा पहलवी के शासन में लाया गया। इस तख्तापलट को यूनाइटिड किंगडम (एम.आई. 6) और अमरीका...

19 अगस्त, 1953 को ईरान के प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसादेघ, जो एक लोकतांत्रिक सरकार के अध्यक्ष थे, को तख्तापलट के जरिए सत्ता से हटा दिया गया, जिससे ईरान को शाह मोहम्मद रजा पहलवी के शासन में लाया गया। इस तख्तापलट को यूनाइटिड किंगडम (एम.आई. 6) और अमरीका (सी.आई.ए.) ने अंजाम दिया था। इसका एक प्रमुख मकसद मोसादेघ द्वारा देश के तेल उद्योग के राष्ट्रीयकरण के बाद ईरान में ब्रिटिश तेल हितों की रक्षा करना था। 

याद रहे उस समय ड्वाइट डी. आइजनहावर अमरीका के राष्ट्रपति और विंस्टन चॢचल ब्रिटेन के प्रधानमंत्री थे। दोनों को लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए लडऩे वाले योद्धाओं के रूप में जाना जाता था। जब वे अपने आॢथक  हितों के लिए किसी देश की स्वतंत्रता को नष्ट और तेल भंडार पर कब्जा कर सकते थे, तो ट्रम्प और नेतन्याहू द्वारा ईरान पर किए गए हमले और चल रहे युद्ध के पीछे किसी को भी तर्कसंगत कारण खोजने की क्या आवश्यकता है? ट्रम्प ईरान में वेनेजुएला जैसी स्थिति चाहते हैं, जल्दी जीत हासिल कर, वहां ऐसी सरकार बनाएं जिसे वह नियंत्रित कर सकें और वहां के तेल संसाधनों तक पहुंच प्राप्त कर सकें। हालांकि पिछले 7 दिनों से इसराईल और ट्रम्प ईरान पर बमबारी कर रहे हैं, कभी जहाजों पर तो कभी जल शोधन आपूर्ति पर, परन्तु कभी-कभी बात वह समझौते की करते हैं। 

तो सवाल यह है कि उन्हें किसी समझौते के लिए बातचीत करनी हो वह  किससे करेंगे? संभवत: उस प्रैसीडैंशियल काऊंसिल से, जिसने खामेनेई की मृत्यु के बाद अंतरिम रूप से पद संभाला है, जिसमें राष्ट्रपति पेजेश्कियन और न्यायपालिका के प्रमुख शामिल हैं। परन्तु वह ऐसा नहीं कर सकते, क्योंकि वास्तविक शक्ति 2 लोगों के हाथ में है-राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अली लारीजानी और वर्तमान संसद अध्यक्ष मोहम्मद-बाघेर गालिबाफ। दोनों ही रैवोल्यूशनरी गाडर््स के कमांडर रह चुके हैं और शासन चलाने का अच्छा अनुभव रखते हैं। लेकिन खामेनेई के साथ ही लगभग 10 शीर्ष नेता पहले ही मारे जा चुके हैं। अगर ये दोनों इसराईली हमलों से बच जाते हैं, जो उन सभी को निशाना बनाना चाहता है, जो नेतृत्व के रूप में आगे आते हैं, तब भी वे वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति की तरह कोई समझौता नहीं करेंगे। वेनेजुएला में डेल्सी रोड्रिगेज ने राष्ट्रपति को हटाने की कार्रवाई से पहले ही ट्रम्प के साथ एक समझौता कर लिया था। लेकिन ईरानी ट्रम्प पर भरोसा नहीं करते, क्योंकि पिछले साल भी और अब 10 दिन पहले भी, बातचीत के दौरान ट्रम्प ने उन पर बमबारी की थी।  

यदि कल को पूरा नेतृत्व भी समाप्त हो जाता है, तो भी स्थिति वेनेजुएला जैसी नहीं हो सकती। ऐसी स्थिति में ट्रम्प वेनेजुएला की तरह ईरान में अपनी  पसंद के नेता को थोप सकते हैं, परंतु सवाल यह उठता है कि क्या लोग उसे स्वीकार करेंगे, जो एक दमनकारी तानाशाही को खत्म करने के लिए कब से इंतजार कर रहे थे। साथ ही यह भी सवाल है कि 47 साल से अमरीका के साथ टकराव के बाद कौन-सा ईरानी अपने देश का तेल अमरीका के साथ बांटना चाहेगा। कुछ का यह भी मानना है कि एक और विकल्प अमरीका के पास यह हो सकता है कि ईरान के शाही परिवार की सत्ता में वापसी हो, यानी दिवंगत शाह के बेटे रजा पहलवी को सत्ता में लाया जाए, जो अमरीका में रहते हैं लेकिन ईरान में बहुत कम लोग शाह के दमनकारी शासन को भूल पाए हैं। इसलिए वह अतीत की एक खराब याद के रूप में देखा जाता है, जो ईरान के सबसे बड़े दुश्मनों अमरीका और इसराईल की मदद से सत्ता में आएगा। 8 जनवरी को जो लोग विरोध प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतरे थे, उन्हें उम्मीद थी कि ट्रम्प उनकी मदद करेंगे लेकिन अब उन्हें अमरीका पर कोई भरोसा नहीं रहा। 

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1945 में जापान ने अमरीकी सरकार को जिस तरह एक पराजित देश होते हुए स्वीकार कर लिया था, वैसा ईरान में होने की संभावना नहीं है। ईरान की स्थिति अफगानिस्तान या ईराक की तरह भी नहीं हो सकती। जहां तक ईरान के पूर्ण आत्मसमर्पण का सवाल है, वह अभी कुछ दूर की बात है। अभी तो ईरान के पास मध्य-पूर्व में सबसे बड़ा और विविध मिसाइल व ड्रोन भंडार है, जो मुख्य रूप से 2,000 किलोमीटर दूर तक की रेंज वाली बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों पर केंद्रित है। सेज्जिल, इमाद, शाहाब-3 और खोर्रमशहर-4 (खैबर)। ईरान की सभी प्रमुख मिसाइलें भूमिगत सुविधाओं में हैं, ईरान ने 1985 में इनका उत्पादन शुरू कर दिया था। तो अब आगे क्या होगा? क्या ट्रम्प के पास इस क्षेत्र में बिना दमन के शांति स्थापित करने के लिए कोई प्लान है?

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