‘हादसों का कारण बन रहा’ ड्राइविंग के समय मोबाइल का इस्तेमाल!

Edited By Updated: 15 May, 2026 03:35 AM

using mobile phones while driving is causing accidents

विशेषज्ञों के अनुसार मोबाइल फोन पर बात करते समय वाहन चलाना उतना ही खतरनाक है जितना शराब पीकर वाहन चलाना। यही कारण है कि वाहन चलाते समय या कहीं आते-जाते समय सड़क पर या रेल लाइनें पार करते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल अनेक दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है...

विशेषज्ञों के अनुसार मोबाइल फोन पर बात करते समय वाहन चलाना उतना ही खतरनाक है जितना शराब पीकर वाहन चलाना। यही कारण है कि वाहन चलाते समय या कहीं आते-जाते समय सड़क पर या रेल लाइनें पार करते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल अनेक दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है जिसके इसी वर्ष सामने आए चंद उदाहरण निम्न में दर्ज हैं :

* 14 जनवरी को ‘लखनऊ’ (उत्तर प्रदेश) में मोबाइल पर कुछ देखते हुए मोटरसाइकिल पर घर जा रहा एक युवक 15 फुट गहरे गड्ढïे में जा गिरा। 
* 27 जनवरी को ‘जयपुर’ (राजस्थान) में  विधानसभा भवन के सामने मोबाइल पर बात करते हुए तेज रफ्तार से कार दौड़ाते आ रहे ‘भरत’ नामक एक युवक ने एक के बाद एक 4 वाहनों को टक्कर मार कर तोड़ दिया।  
* 13 मार्च को ‘पिंपरी ङ्क्षचचवड़’ (महाराष्टï्र) में स्कूल से साइकिल पर घर लौट रहे ‘फारुख शकील तांबोली’ नामक लड़के को मोबाइल पर बात करते हुए तेज रफ्तार ट्रक ड्राइवर ने रौंद दिया। 
* 14 मार्च को ‘नरवाणा-जींद’ नैशनल हाईवे पर ‘खटकड़-बड़ौदा’ गांव के निकट एक तेज रफ्तार बस डिवाइडर से टकराने के बाद एक गड्ढïे में धंस गई जिससे बस में सवार अनेक यात्री घायल हो गए। प्रत्यक्षदॢशयों के अनुसार बस का ड्राइवर मोबाइल पर वीडियो काल कर रहा था, जिससे उसका ध्यान भटक गया और दुर्र्घटना हो गई।

* 15 मार्च को कस्बा ‘जलालाबाद’ (उत्तर प्रदेश)  में  दिल्ली-सहारनपुर रोड पर तेज गति से जा रही कार के चालक का ध्यान मोबाइल फोन पर होने के कारण कार एक डिवाइडर से टकरा कर खाई में जा गिरी जिससे कार चालक तथा उसके साथी दोनों को ही काफी चोटें आईं। 
* 30 मार्च को ‘हैदराबाद’ (तेलंगाना) में मोबाइल फोन पर बातें करने में व्यस्त एक कार चालक ने सड़क के किनारे खड़े एक रोड रोलर को टक्कर मार दी जिससे कार चालक तथा उसका साथी घायल हो गए तथा कार को भी भारी क्षति पहुंची। 
*  8 अप्रैल को ‘मेरठ’ (उत्तर प्रदेश) में सुबह के समय ‘काली नदी’ के निकट स्कूली बच्चों से भरी बस सड़क के किनारे एक खाई में पलट जाने से 10 बच्चे घायल हो गए। दुर्घटना के समय ड्राइवर अपने मोबाइल फोन पर कुछ देखने में व्यस्त था।
* 12 अप्रैल को ‘अलवर’ (राजस्थान) के ‘पडीसन’ गांव में कानों में ईयर फोन लगा कर रेल पटरी पर बैठकर मोबाइल से गाने सुन रहे ‘मोहन जाटव’ नामक युवक को उसी पटरी पर आ रही रेलगाड़ी की आवाज सुनाई नहीं दी और रेलगाड़ी की चपेट में आ जाने से मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

* 21 अप्रैल को ‘कानपुर’ (उत्तर प्रदेश) में फोन पर बात करते हुए सड़क पार कर रही ‘इशरत खान’ नामक एक महिला को तेज रफ्तार ट्रक ने टक्कर मार दी जिससे उसकी घटनास्थल पर ही जान चली गई। 
* 11 मई को जालंधर छावनी रेलवे स्टेशन के निकट मोबाइल फोन पर बात करते हुए अपने बेटे के साथ रेल लाइन पार कर रही 29 वर्षीय ‘सरिता देवी’ की रेलगाड़ी की चपेट में आने से मौत हो गई। 
‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ का कहना है कि मोबाइल फोन का इस्तेमाल ड्राइविंग से जुड़े कई कार्यों में बाधा डाल सकता है। इससे सही लेन में चलने की स्थिति बनाए रखने की क्षमता और ब्रेक लगाने की रफ्तार कम हो जाती है।
मोबाइल फोन पर बात करते, एस.एम.एस. भेजते, चैटिंग करते या गीत सुनते हुए वाहन चलाने से होने वाली दुर्घटनाओं व मौतों का सिलसिला रोकने के लिए वाहन चलाते हुए मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करना अत्यंत आवश्यक है। पढ़े-लिखे लोगों को विशेष रूप से सोचना चाहिए कि ड्राइविंग करते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल करके वे खतरा मोल क्यों ले रहे हैं। अत: मोबाइल फोन पर बात करते हुए वाहन चलाने वालों और उन्हें रोकने के लिए कोई कार्रवाई न करने वाले ट्रैफिक पुलिस कर्मियों दोनों के ही विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने और उन्हें कठोर दंड देने की जरूरत है।—विजय कुमार

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