क्या भारत के कमजोर वर्ग कर रहे हैं अवैध धन-दौलत के धंधों की ओर रुख?

Edited By Updated: 24 Jun, 2026 05:27 AM

are india s weaker sections turning to illegal money making businesses

भारत में कहीं, एक डिलीवरी राइडर 12 घंटे की शिफ्ट खत्म करके गेमिंग ऐप खोलता है। दूसरे शहर में, एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी, जो गेमिंग ऐप जैसी दिखने वाली किसी चीज के झांसे में आ जाता है, फिशिंग स्कैम का शिकार होकर अपनी सारी बचत खो बैठता है। एक...

भारत में कहीं, एक डिलीवरी राइडर 12 घंटे की शिफ्ट खत्म करके गेमिंग ऐप खोलता है। दूसरे शहर में, एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी, जो गेमिंग ऐप जैसी दिखने वाली किसी चीज के झांसे में आ जाता है, फिशिंग स्कैम का शिकार होकर अपनी सारी बचत खो बैठता है। एक व्यापारी खुद को एक ऐसे विदेशी, अनियमित ‘तीन पत्ती’ प्लेटफॉर्म पर पाता है, जो इसी कार्ड गेम के लिए बनाया गया है। ये अब अलग-थलग घटनाएं नहीं हैं। ये सभी मिलकर आर्थिक असुरक्षा और बढ़ती आकांक्षाओं के बीच टकराव को दर्शाती हैं। 

भारत में ऑनलाइन गेमिंग का इतना बड़ा विस्तार रातों-रात नहीं हुआ। कोविड महामारी ने इसे वास्तव में गति प्रदान की। जब लॉकडाऊन के कारण कार्यालय और आजीविका ठप्प हो गए, तो लाखों लोगों ने आय और मनोरंजन के लिए स्मार्टफोन का सहारा लिया। घर से काम करने के कारण स्क्रीन टाइम में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। यू.पी.आई. क्रांति ने पहले ही आसान भुगतान की व्यवस्था कर दी थी। 2019 में कम उपयोगकत्र्ता आधार वाले प्लेटफॉर्म ने 2020-21 में कई गुना वृद्धि दर्ज की। अनुमान के अनुसार, भारत में अब 59 करोड़ से अधिक गेमर हैं, जो दुनिया की सबसे बड़ी गेमिंग आबादी में से एक है। 

डिजिटल पहुंच में वृद्धि के बावजूद, आय और नौकरियों की गुणवत्ता अभी भी कम है। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पी.एल.एफ.एस.) के अनुसार, भारत की अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में गैर-कृषि कार्यबल का तीन-चौथाई से अधिक हिस्सा कार्यरत है। इन श्रमिकों के पास नौकरी की कोई सुरक्षा नहीं है। 2025 में, शहरी युवाओं (15-29 वर्ष की आयु) की बेरोजगारी दर 13.6 प्रतिशत थी। सेवानिवृत्ति और अन्य सुविधाओं वाली औपचारिक नौकरियां इस पीढ़ी के लिए अभी तक सुलभ नहीं हैं। गेमिंग प्लेटफॉर्म महत्वाकांक्षा और अवसर के बीच के इस अंतर को पाटने में सहायक प्रतीत होते हैं, क्योंकि ये गेमर्स को उनके कौशल के आधार पर कमाई करने का मौका प्रदान करते हैं।

आर्थिक तंगी लगातार बढ़ती जा रही है। वैश्विक ऊर्जा संकट के चलते घरेलू ऊर्जा की कीमतें  बढ़ गई हैं। अप्रैल में थोक ईंधन और बिजली की महंगाई दर सालाना आधार पर 24.71 प्रतिशत तक पहुंच गई। कम मुनाफे पर काम करने वाले दिहाड़ी मजदूर, चाय बागान मजदूर या छोटे व्यापारी के लिए, रोजमर्रा की जरूरतों के बढ़ते घरेलू बिल नियमित भोजन और खाली रसोई के बीच का अंतर हो सकते हैं। जब नियमित खर्चे मजदूरी से अधिक हो जाते हैं, तो ‘जल्दी पैसा’ कमाने का आकर्षण बहुत बढ़ जाता है। 

सामाजिक जोखिमों को पहचानते हुए, सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन एवं विनियमन अधिनियम (पी.आर.ओ.जी.) 2025 पेश किया, जिसका उद्देश्य इंटरनैट पर खेले जाने वाले धन-आधारित खेलों पर प्रतिबंध लगाना था। इससे समस्या का समाधान नहीं हुआ, क्योंकि उपयोगकत्र्ता विनियमित भारतीय प्लेटफार्मों से भारतीय अधिकार क्षेत्र से बाहर स्थित अवैध विदेशी वैबसाइटों पर चले गए। इस समस्या से निपटने के लिए, मार्च 2026 तक, इलैक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 8,300 से अधिक अवैध सट्टेबाजी और जुआ साइटों को अवरुद्ध कर दिया था। ये हस्तक्षेप अच्छे इरादे से किए गए थे लेकिन समस्या बनी रही। डिजिटल सुरक्षा कवच कमजोर होते हैं और दृढ़ निश्चयी उपयोगकत्र्ता उनसे बचने के तरीके ढूंढ लेते हैं, यही कारण हो सकता है कि जुए के कर्ज से जुड़े वित्तीय नुकसान और आत्महत्याओं की खबरें ङ्क्षचताजनक नियमितता के साथ सामने आती रहती हैं। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 भारत भर में बढ़ती डिजिटल लत और गेमिंग एवं जुए के बीच बढ़ते अंतर्संबंध के बारे में चेतावनी देता है। सर्वेक्षण में अखिल भारतीय अध्ययन के आधार पर नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता पर बल दिया गया है।

नीतिगत अवरोध खड़े करने की बजाय, जो कमजोर समूहों को शारीरिक जुए या अनौपचारिक गेमिंग की ओर धकेल सकते हैं, हमें उनकी बुनियादी जरूरतों और मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों पर ध्यान देना चाहिए। विश्व की सबसे बड़ी आबादी वाले देश भारत के लिए अपने डिजिटल भविष्य को सुरक्षित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। हम कितनी सफलता प्राप्त करते हैं, इसका आकलन अंतत: इस बात से होगा कि डिजिटल विकास को कितनी जिम्मेदारी से नियंत्रित किया जाता है और हमारे नागरिक कैसा व्यवहार करते हैं।-अंगना पाराशर शर्मा और अर्पिता मुखर्जी

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!