‘एल.पी.जी. संकट बढ़ने से कालाबाजारी तेज’ सरकार को बढ़ानी होगी सख्ती!

Edited By Updated: 03 Apr, 2026 04:01 AM

black marketing on rise as lpg crisis worsens  govt must tighten its grip

अमरीका और इसराईल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर किए गए हमले के बाद पूरी दुनिया में पैट्रोलियम पदार्थों और गैस की किल्लत पैदा हो गई है। दरअसल ईरान ने हमले के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट आफ होर्मुज) को बंद कर दिया है। दुनिया भर को कच्चे तेल और गैस...

अमरीका और इसराईल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर किए गए हमले के बाद पूरी दुनिया में पैट्रोलियम पदार्थों और गैस की किल्लत पैदा हो गई है। दरअसल ईरान ने हमले के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट आफ होर्मुज) को बंद कर दिया है। दुनिया भर को कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति का 20 प्रतिशत हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। 

देश में एल.पी.जी. की कमी के कारण रैस्टोरैंट कारोबार पर संकट आ गया है और देश के लगभग 10 प्रतिशत ढाबे और रैस्टोरैंट बंद हो गए हैं और कई जगह रैस्टोरैंट्स ने खाने की कीमतें बढ़ा दी हैं तथा अपने मैन्यू में आइटमें कम कर दी हैं। इसी बीच उद्योगों और ढाबों में इस्तेमाल होने वाले कमर्शियल सिलैंडर की कीमत बुधवार को एक बार फिर 195.50 रुपए बढ़ाई गई और दिल्ली में 19 किलोग्राम के कमर्शियल सिलैंडर की कीमत अब 2078.50 रुपए हो गई है। इससे पहले, 7 मार्च को 14.2 किलोग्राम के घरेलू एल.पी.जी. के सिलैंडर की कीमत 60 रुपए बढ़ाई गई थी। इसके साथ ही हवाई जहाज में इस्तेमाल होने वाले एयर टर्बाइनल फ्यूल (ए.टी.एफ.) की कीमतों में भी 8.6 प्रतिशत की वृद्धि की गई है और यह बढ़ कर 1,04,927 रुपए प्रति किलो लीटर हो गया है।

देश भर में पैदा हुई एल.पी.जी. की कमी के कारण इसकी काला बाजारी भी जोरों पर है। दिल्ली में कुछ स्थानों पर घरेलू रसोई गैस का सिलैंडर 4500 रुपए में बेचा जा रहा है जबकि कमॢशयल सिलैंडर 6000 रुपए तक बिक रहे हैं। पैट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की एक वरिष्ठ अधिकारी सुजाता शर्मा ने बताया कि एल.पी.जी. की कालाबाजारी रोकने के लिए 1 अप्रैल को लगभग 2600 छापे मारे गए और लगभग 700 सिलैंडर जब्त किए गए। इस संकट के कारण दुनिया भर में पैट्रोल, डीजल 30 से 50 प्रतिशत महंगा हो गया है लेकिन केंद्र ने पैट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने की बजाय 27 मार्च को पैट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी को 10 प्रतिशत कम करके इसका बोझ सरकारी तेल कम्पनियों पर डाल दिया है। इसके साथ ही ईरान युद्ध के बाद भारत ने 40 देशों से कच्चा तेल मंगवाना शुरू किया है और इसी कारण अब होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए भारत में सिर्फ 30 प्रतिशत तेल और गैस ही भारत आ रही है जबकि युद्ध से पहले इस मार्ग से भारत 55 प्रतिशत तेल मंगवा रहा था। इसके अलावा भारत ने प्लास्टिक और दवाइयों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पैट्रोकैमिकल्स सहित 40 उत्पादों पर आयात कर में छूट देने की घोषणा की है। इस फैसले से छोटे उद्योगों में लागत का दबाव कम होगा। 

देश भर में पैदा हुए रसोई गैस के संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 मार्च को सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ ऑनलाइन मीटिंग की और 1 अप्रैल को इसी मुद्दे पर  कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सी.सी.एस.) की बैठक की अध्यक्षता की।  इस दौरान पी.एन.जी. और एल.पी.जी. की आपूर्ति बढ़ाने पर जोर दिया गया, उर्वरकों की उपलब्धता का आकलन और भविष्य की रणनीति पर विचार-विमर्श हुआ। इसके साथ ही कालाबाजारी व जमाखोरी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए। इस स्थिति से निपटने के लिए रसोई गैस की कालाबाजारी को रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को आपसी तालमेल के साथ काम करना चाहिए और कालाबाजारी करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। इसके अलावा आम जनता को भी अब रसोई गैस के विकल्प के तौर पर बिजली से चलने वाले इंडक्शन चूल्हे का इस्तेमाल बढ़ाना चाहिए और घरों के अलावा रैस्टोरैंटों और ढाबों में भी इस तरह के चूल्हे विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किए जाने चाहिएं। इस तरह के कदमों से ही हम मौजूदा संकट से कुछ हद तक निपट सकते हैं।—विजय कुमार  

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