Edited By ,Updated: 14 Aug, 2026 03:39 AM

हवाई यात्रा आज आम आदमी की जरूरत बन चुकी है। लाखों यात्री रोज आसमान में उड़ान भरते हैं, इस भरोसे के साथ कि उनके जीवन की बागडोर संभालने वाले पायलट पूरी तरह सचेत, स्वस्थ और नशे से
मुक्त होंगे।
हवाई यात्रा आज आम आदमी की जरूरत बन चुकी है। लाखों यात्री रोज आसमान में उड़ान भरते हैं, इस भरोसे के साथ कि उनके जीवन की बागडोर संभालने वाले पायलट पूरी तरह सचेत, स्वस्थ और नशे से मुक्त होंगे। लेकिन जब भी कोई पायलट नशे या नशीले पदार्थ के प्रभाव में कॉकपिट में बैठता है, तो यह भरोसा टूट जाता है। यह सिर्फ नियम उल्लंघन नहीं, बल्कि सैंकड़ों जिंदगियों के साथ खिलवाड़ है।
भारत में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डी.जी.सी.ए.) के नियम काफी सख्त माने जाते हैं। एयरक्राफ्ट रूल्स 1937 के नियम 24 और सिविल एविएशन रिक्वायरमैंट्स (सी.ए.आर.) सैक्शन 5, सीरीज एफ के तहत पायलट और क्रू को उड़ान शुरू होने से कम से कम 12 घंटे पहले किसी भी नशीले पदार्थ, सेडेटिव, नार्कोटिक या स्टिमुलैंट का सेवन पूरी तरह प्रतिबंधित है। कानून के मुताबिक ‘ब्लड अल्कोहल कंसन्ट्रेशन’ (बी.ए.सी.) जीरो होना चाहिए। हर पायलट और क्रू का ‘प्री-फ्लाइट ब्रेथ एनालाइजर टैस्ट’ अनिवार्य है। कुछ मामलों में ‘पोस्ट-फ्लाइट टैस्ट’ भी जरूरी है। इसके साथ ही साइकोएक्टिव पदार्थों (जैसे मारिजुआना) के लिए भी सख्त डोप टैस्ट के प्रावधान हैं।
डी.जी.सी.ए. के नियमों के अनुसार, पहली बार ‘प्री-फ्लाइट पॉजिटिव’ आने पर आमतौर पर 3महीने का लाइसैंस निलंबन, दूसरी बार 3 साल और तीसरी बार स्थायी रद्दीकरण का प्रावधान है। पोस्ट फ्लाइट पॉजिटिव पर पहली बार भी 1 साल तक निलंबनहो सकता है। गौरतलब है कि टैस्ट से इंकार को भी ‘पॉजिटिव’ माना जाता है। इसके बावजूद इनकेआंकड़े ङ्क्षचताजनक हैं। 2023 की पहली छमाही में ही 33 पायलट और 97 केबिन क्रू ड्यूटी पर नशे में पाए गए। हाल के उदाहरण चौंकाने वाले हैं। दिसम्बर 2025 में वैंकूवर एयरपोर्ट पर एयर इंडिया के एक पायलट को उड़ान से पहले हटाया गया क्योंकि ‘ब्रैथ एनालाइजर टैस्ट’ में बहुत ज्यादा अल्कोहल पाया गया। नतीजतन फ्लाइट घंटों देरी से निकली। ताजा मामला अगस्त 2026 में एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली फ्लाइट की अचानक 300 फुट ऊंचाई घटने और कई यात्रियों के घायल होने के बाद पायलट-इन-कमांड का डोप टैस्ट पॉजिटिव आया, जिसमें मारिजुआना की पुष्टि हुई। इतना ही नहीं, यात्रियों ने पायलट की अजीब चाल और व्यवहार की शिकायत भी की। जिस कारण डी.जी.सी.ए. ने दोनों पायलट को ड्यूटी से हटाया।
ऐसा सिर्फ भारत में ही नहीं होता, दुनिया भर में भी ऐसे कई मामले हैं। अमरीका में एफ.ए.ए. के नियम 8 घंटे की ‘अब्स्टिनैंस’ और 0.04 प्रतिशत बी.ए.सी. लिमिट के हैं, जबकि यूरोप में ई.ए.एस.ए. 0.02 प्रतिशत तक अनुमति देता है। परंतु भारत का ‘जीरो टॉलरैंस’ कहीं ज्यादा कठोर है। फिर भी उल्लंघन होते हैं क्योंकि कभी-कभी सिस्टम में सेंध भी लग जाती है। ऐसे में पायलट की जिम्मेदारी सबसे बड़ी होती है। मैडिकल सॢटफिकेट और फिटनैस के लिए ईमानदारी जरूरी है। अगर ऐसी कोई दवा ली है, जिसमें नशीले पदार्थ होते हैं तो कंपनी डॉक्टर से सलाह अनिवार्य है, क्योंकि कई दवाएं भी ‘ब्रैथ टैस्ट पॉजिटिव’ कर सकती हैं। नशा निर्णय लेने की क्षमता, रिएक्शन टाइम, स्पेसियल ओरिएंटेशन और आपात स्थिति संभालने की शक्ति को बुरी तरह प्रभावित करता है। थकान के साथ मिलाकर यह घातक हो जाता है। छोटी सी गलती से प्लेन क्रैश हो सकता है, सैंकड़ों मौतें हो सकती हैं।
डी.जी.सी.ए. जैसे नियामक की जिम्मेदारी है कि वह नियमित और सरप्राइज चैक करे, टैस्टिंग की विश्वसनीयता सुनिश्चित करे और उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई करे। नियमों को और कठोर बनाया गया है, वीडियो रिकॉॄडग अनिवार्य की गई है, रिपोॄटग 24 घंटे में जरूरी है। लेकिन सवाल उठता है कि क्या हमेशा सख्ती बरती जाती है? कई मामलों में पहली गलती पर 3 महीने का निलंबन और ‘रिहैबिलिटेशन’ का रास्ता खुला छोड़ दिया जाता है। वहीं कुछ निजी चार्टर सेवाओं में कैप्टन एच.एस. विर्दी जैसे मामलों में डी.जी.सी.ए. द्वारा कथित तौर पर हल्की सजा देने की शिकायतें भी सामने आई हैं, जहां गंभीर उल्लंघन के बावजूद मामूली सजा दी गई। ऐसे कई उदाहरण हैं जो नियामक की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करते हैं। यात्री सुरक्षा में कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
डी.जी.सी.ए. ने कई मामलों में सख्ती भी दिखाई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी जीरो टॉलरैंस नीति को बरकरार रखा है। लेकिन प्राइवेट चार्टर और छोटे ऑप्रेटर्स पर नजर रखना चुनौती है। एयरलाइंस को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। सिर्फ नियम बनाने से काम नहीं चलेगा, लागू करने और उदाहरण पेश करने की भी जरूरत है। यात्री का भरोसा तभी बनेगा जब हर उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई हो। आसमान सुरक्षित तभी रहेगा, जब कॉकपिट में पूरी तरह जागरूक और नशे से मुक्त हाथ होंगे। सरकार, डी.जी.सी.ए. और एयरलाइंस को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी पायलट यात्रियों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ न कर सके। सुरक्षा कोई समझौता नहीं, बल्कि पूर्ण प्रतिबद्धता है।-रजनीश कपूर