सही लक्ष्य पर नजर...!

Edited By Updated: 16 May, 2026 05:37 AM

eyes on the right target

कुछ साल पहले, मैं एक बहुत लंबे प्रेरणादायक भाषण में बैठा था। वक्ता कड़ी मेहनत के बारे में भावुक होकर चिल्लाया, ‘‘कड़ी मेहनत करो!’’ उसने गरजते हुए कहा, ‘‘सफलता केवल कड़ी मेहनत से ही मिलती है!’’ लगभग एक घंटे तक उसने आलस्य पर हमला किया, अनुशासन की...

कुछ साल पहले, मैं एक बहुत लंबे प्रेरणादायक भाषण में बैठा था। वक्ता कड़ी मेहनत के बारे में भावुक होकर चिल्लाया, ‘‘कड़ी मेहनत करो!’’ उसने गरजते हुए कहा, ‘‘सफलता केवल कड़ी मेहनत से ही मिलती है!’’ लगभग एक घंटे तक उसने आलस्य पर हमला किया, अनुशासन की प्रशंसा की और संभवत: आधी भीड़ को डायरी खरीदने और सुबह 5 बजे उठने के लिए डरा दिया। अंत में आयोजक ने मेरी ओर देखा और पूछा, ‘‘बॉब, क्या तुम्हारे पास जोडऩे के लिए कुछ है?’’ ‘‘हां,’’ मैंने कहा, ‘‘अपनी नजर लक्ष्य पर रखो!’’

फिर थोड़ा रुककर मैंने जोड़ा, ‘‘और अपनी नजर सही लक्ष्य पर रखो!’’ जंगल में एक शानदार बारासिंगा का पीछा करते हुए शिकारी कुत्ते  की एक पुरानी कहानी है। अचानक एक लोमड़ी उसके रास्ते में आ गई, तो कुत्ते ने बारासिंगे को भुला दिया और लोमड़ी का पीछा करने लगा। फिर एक खरगोश दिखाई दिया। कुत्ते ने लोमड़ी को भुला दिया और खरगोश का पीछा करने लगा। थोड़ी देर बाद एक चूहा रास्ते से गुजरा। कुत्ते ने खरगोश को भुला दिया और चूहे का पीछा करने लगा, जो एक बिल में घुस गया। उस बेचारे जीव की कल्पना करें। उसने दिन की शुरुआत महानता का पीछा करते हुए की और अंत एक चूहे के बिल में ताकते हुए किया। हम में से बहुत से लोग ऐसा ही करते हैं। हम जीवन की शुरुआत सपनों और उद्देश्यों के साथ करते हैं, फिर हर गुजरते प्रलोभन, डर, शॉर्टकट और चमकती वस्तु से विचलित हो जाते हैं।
और दुख की बात है कि आज राजनीति भी ऐसी ही हो गई है। राष्ट्र निर्माण पर नजर रखने की बजाय, कई नेता केवल अगला चुनाव जीतने पर ही अपनी नजर रखते हैं। और एक बार जब जीत ही एकमात्र लक्ष्य बन जाती है, तो हर जगह शॉर्टकट दिखाई देने लगते हैं।

धोखाधड़ी, हेरफेर, झूठे वादे, विभाजन, डर। हर संभव हथकंडे का इस्तेमाल करो, किसी तरह सत्ता हथियायो और जीत का जश्न मनाओ। लेकिन शॉर्टकट वाली जीत कमजोर नेता पैदा करती है। जो व्यक्ति धोखाधड़ी के जरिए शीर्ष पर पहुंचता है, वह हमेशा इस बात से डरता है कि कोई और भी उसके साथ वैसा ही धोखा करेगा। विभाजन के जरिए ऊपर आने वाले नेता को जीवित रहने के लिए लोगों को विभाजित करते रहना पड़ता है। और जो दूसरों को फंसाते हैं, वे अंतत: खुद ही जाल में गिर जाते हैं। वास्तविक नेतृत्व धीरे-धीरे बनता है। मांसपेशी की तरह। चरित्र की तरह। विश्वास की तरह। इसमें समय लगता है। सालों पहले तैराक फ्लोरेंस चैडविक ने घने कोहरे के बीच कैटालिना द्वीप से कैलिफोर्निया तट तक तैरने की कोशिश की थी। थका देने वाले 15 घंटों के बाद उसने हार मान ली।

बाद में उसे पता चला कि वह तट से आधे मील से भी कम दूरी पर थी। ‘‘यह कोहरे की वजह से था,’’ उसने बाद में समझाया, ‘‘अगर मैं तट देख पाती, तो मैं इसे पूरा कर लेती।’’ 2 महीने बाद उसने फिर कोशिश की और सफल रही, क्योंकि उसने तट को अपने दिमाग में स्थिर रखा था। एक देश को अपनी नजरें असली तट पर रखनी चाहिएं। शिक्षा, ईमानदारी, नौकरियां, स्वास्थ्य, न्याय, शांति, न कि अंतहीन विकर्षण और राजनीतिक तमाशा। क्योंकि जब नेता असली लक्ष्य से नजर हटा लेते हैं, तो पूरा देश बारासिंगों की बजाय चूहों का पीछा करने लगता है। शॉर्टकट से त्वरित जीत तो मिलती है लेकिन शायद ही कभी स्थायी सफलता। और धोखाधड़ी के तरीकों से ऊपर चढऩे वाले कई लोग, अंतत: पाते हैं कि उन्होंने अपना ‘जीत’ का सिंहासन एक ‘ट्रैपडोर’ पर बनाया है...!-दूर की कौड़ी राबर्ट क्लीमैंट्स

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