किसी को क्षमा कर देना ही सबसे बड़ा बदला

Edited By Updated: 21 Mar, 2026 05:46 AM

forgiving someone is the greatest revenge

स्कूल के दिनों में एक कविता ‘यूसुफ’ हमें पढ़ाई जाती थी। उस कविता का मेरे जीवन में बड़ा प्रभाव रहा। आतंकवादी, जो बमों और बंदूकों से लोगों की छाती को छलनी-छलनी कर रहे हैं, उन्हें ‘यूसुफ’ कविता अवश्य पढऩी चाहिए। एक अदालत उस प्रभु की है, जिसमें सब से...

स्कूल के दिनों में एक कविता ‘यूसुफ’ हमें पढ़ाई जाती थी। उस कविता का मेरे जीवन में बड़ा प्रभाव रहा। आतंकवादी, जो बमों और बंदूकों से लोगों की छाती को छलनी-छलनी कर रहे हैं, उन्हें ‘यूसुफ’ कविता अवश्य पढऩी चाहिए। एक अदालत उस प्रभु की है, जिसमें सब से न्याय होता है। आतंकवादी शायद नहीं जानते कि कयामत के दिन ‘यम कंकरू’ इन आतंकियों को बालों से पकड़ कर, घसीटते-घसीटते शरीर में बर्छे, भाले मारते ‘धर्मराज’ के सामने ला पटकेंगे। ईश्वर को तुम्हें अपने कर्मों का हिसाब देना ही होगा। 

दोस्तो, आओ, पहले ‘यूसुफ’ की कहानी को सुन लें। एक रात रेगिस्तान के शांत वातावरण के बीच एक शरणार्थी ने ‘यूसुफ’ के घर में रात बिताई। शरणार्थी ने ‘यूसुफ’ को अपना परिचय दिया। प्रात: सूर्योदय से पूर्व यूसुफ ने आगन्तुक को जगा कर कहा, ‘‘महाराज, सूर्योदय समीप है। आपकी सेवा में कुछ धन अर्पित कर रहा हूं। मैंने अपना सबसे तेज दौडऩे वाला घोड़ा भी आपको अन्यत्र ले जाने के लिए तैयार कर दिया है। सुबह होने पर आपको कोई पहचान न ले। आपकी सेवा में मेरे द्वारा कोई कमी रह गई हो तो मुझे क्षमा करना।’’ यूसुफ के हृदय में पवित्रता थी। उसके व्यवहार ने शरणार्थी के हृदय में भी ज्ञान का उजाला भर दिया था। शरणार्थी के मन का अंधेरा मिट गया था। यूसुफ शांत, पुण्यभूत, सत्य और आनंद से भरा हुआ था। उसके हृदय में सुमधुर पवित्रता और आंखों में सहजता का भाव था। 

‘यूसुफ’ के इस आकर्षक व्यवहार ने आगंतुक के हृदय को परिवर्तित कर दिया था। उसे एहसास हो गया था कि मैंने ‘यूसुफ’ के ज्येष्ठ पुत्र का वध कर कैसा अनर्थ किया था और इधर यह व्यक्ति पूर्णत: शांत, भाव विहीन, एकटक मुझे निहार रहा है? आगंतुक ने पश्चाताप की मुद्रा में पृथ्वी पर सिर झुका दिया। आगंतुक के मुख पर अद्भुत भाव थे। उसने सिसकते हुए ‘यूसुफ’ से कहा, ‘‘शेख मैं अब आपको इस अवस्था में छोड़कर कैसे जा सकता हूं? क्या मैं कृतघ्न हो जाऊं? आप ने मुझे आश्रय दिया, शांति दी, प्रकाश दिया, सुरक्षा दी। मेरे जैसे भटकते हुए राही को राह दिखाई। मेरी आत्मा को अपने प्रकाश से भर दिया। मेरा जीवन तो मेरे लिए एक बोझ बन चुका था। मैं अपने मन के भाव को कैसे समझाऊं।’’

यूसुफ ने कहा, ‘‘मैं तो एक साधारण व्यक्ति हूं। सबको रोजी-रोटी तो भगवान देता है। यदि कोई मेरे घर में दो घड़ी आश्रय पा गया तो मैं धन्य हूं। कोई मेरे घर भोजन कर गया तो मेरा घर पवित्र हो गया। मैं तो कृतज्ञ हुआ कि आपने मुझे सम्मान दिया। जैसे मैं भगवान के घर में रह रहा हूं, आनंदपूर्वक भोजन पा रहा हूं, तो यह उस परम पिता प्रभु की मेहरबानी है। इसमें मेरा क्या लगा?’’ आगंतुक ने कहा, ‘‘ मैं कैसे बताऊं कि कुकर्मी, पतित इब्राहिम के लिए आपने क्या किया है? मैं इब्राहिम वही व्यक्ति हूं, जिसने तुम्हारे ज्येष्ठ पुत्र का वध किया था। हमारी जाति का कानून है कि हत्यारे का वध करने से ही मृतक को शांति मिलती है। मेरा यह शरीर आपकी सेवा में अर्पित है। आप तलवार से मेरा सिर कलम कर दीजिए। यह कह कर इब्राहिम पत्थर की तरह जड़वत खड़ा हो गया।

उसने सोचा कि मेरा सिर यूसुफ एक झटके में काट देगा परन्तु यूसुफ के मन में सहसा एक तूफान उठ खड़ा हुआ। अपने ज्येष्ठ पुत्र को स्मरण कर, उसके शरीर में सहसा, भावावेश का भूकंप आ गया परन्तु संयमित होते हुए यूसुफ बोले, ‘‘तब तो तुम एकदम निकल जाओ। शीघ्र यहां से जाने की तैयारी करो। फिर कभी इधर मत लौटना। न जाने मेरे मन में दानवता कब उग्र हो जाए? संभवत: मैं अपने कत्र्तव्य को भूल जाऊं। यह तीन गुणा धन लेकर शीघ्र यहां से प्रस्थान कर जाओ।’’ यूसुफ के मन में करुणा भरी हुई थी। उसने इब्राहिम को अपने ज्येष्ठ पुत्र के वध से भी मुक्त कर दिया। क्षमा कर उसने अपने पुत्र का वध करने वाले इब्राहिम के लिए प्रार्थना की-प्रभु इस विधर्मी को क्षमा करना क्योंकि इसको पता ही नहीं कि इसने कितना बड़ा गुनाह किया है। इब्राहिम को क्षमा कर यूसुफ ने बदला ले लिया। यूसुफ ने इब्राहिम को सदा पश्चाताप की अग्नि में जलते रहने के लिए छोड़ दिया। 

‘सिर के बदले में सिर’ का नियम समाज को अराजकता में धकेल देता है। अपराधी को दंड देना, सिर्फ सरकार का काम है, परन्तु सरकारें भ्रष्ट हो चुकी हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी सत्य, अहिंसा, असहयोग और सत्याग्रह के महत्व को समझते थे। इसीलिए उन्होंने कहा था कि ‘थप्पड़ के बदले थप्पड़’ का सिद्धांत मानवता के लिए हानिकारक है। कोई तुम्हारे गाल पर थप्पड़ मारे तो तुम्हें अपना दूसरा गाल भी आगे कर देना चाहिए ताकि थप्पड़ मारने वाला पश्चाताप की अग्नि में जलता रहे। यही न्याय है। समाज को इसी राह पर चलना है। क्षमा किसी दुर्बल व्यक्ति का शस्त्र नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली व्यक्ति का शृंगार है। यद्यपि बदले के लिए किसी को क्षमा करना मुश्किल है, परन्तु यही तो अनूठा बदला लेना है। प्रभु सदैव अपने बच्चों को क्षमा करते हैं।-मा. मोहन लाल(पूर्व परिवहन मंत्री, पंजाब)

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