Edited By Anu Malhotra,Updated: 27 May, 2026 07:52 AM

Brain Tumor Symptoms: ब्रेन ट्यूमर एक ऐसी गंभीर बीमारी है जिसमें दिमाग या खोपड़ी के अंदर असामान्य कोशिकाएं तेजी से बढ़ने लगती हैं। यह ट्यूमर कभी Non-Cancerous हो सकता है तो कभी कैंसर का रूप भी ले सकता है। डॉक्टरों के अनुसार समय रहते इसके शुरुआती...
Brain Tumor Symptoms: ब्रेन ट्यूमर एक ऐसी गंभीर बीमारी है जिसमें दिमाग या खोपड़ी के अंदर असामान्य कोशिकाएं तेजी से बढ़ने लगती हैं। यह ट्यूमर कभी Non-Cancerous हो सकता है तो कभी कैंसर का रूप भी ले सकता है। डॉक्टरों के अनुसार समय रहते इसके शुरुआती संकेत पहचान लेना बेहद जरूरी है, क्योंकि देर होने पर यह बीमारी जानलेवा बन सकती है।
एक न्यूरोसर्जन ने हाल ही में सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए ब्रेन ट्यूमर के कुछ ऐसे लक्षण बताए हैं जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन यही संकेत भविष्य में बड़ी परेशानी का कारण बन सकते हैं।
लगातार सिरदर्द बना रहना
अगर लंबे समय तक सिरदर्द बना रहता है और दवाइयों के बाद भी आराम नहीं मिलता, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। खासतौर पर सुबह के समय तेज दर्द होना या दर्द का लगातार बढ़ना चिंता की बात हो सकती है।
आंखों की रोशनी पर असर
ब्रेन से जुड़ी समस्या का असर आंखों पर भी पड़ सकता है। धुंधला दिखाई देना, एक चीज दो-दो नजर आना या अचानक विजन कमजोर होना ब्रेन ट्यूमर के शुरुआती संकेत माने जाते हैं।
याददाश्त और फोकस कमजोर होना
अगर किसी व्यक्ति को बार-बार बातें भूलने लगे, ध्यान लगाने में दिक्कत हो या सही शब्द बोलने में परेशानी महसूस हो, तो यह दिमाग से जुड़ी बीमारी का संकेत हो सकता है। कई बार लोग इसे सामान्य तनाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
मूड और व्यवहार में बदलाव
ब्रेन ट्यूमर का असर इंसान के व्यवहार पर भी दिख सकता है। व्यक्ति अचानक चिड़चिड़ा रहने लगता है, मूड खराब रहता है या पहले की तुलना में ज्यादा शांत और गंभीर हो जाता है। ऐसे बदलावों को भी गंभीरता से लेना जरूरी है।
शरीर में झनझनाहट या सुन्नपन
अगर अचानक शरीर के किसी हिस्से में झनझनाहट, कमजोरी या सुन्नपन महसूस हो, तो यह दिमाग में समस्या का संकेत हो सकता है। कुछ मामलों में मरीज को दौरे पड़ने जैसी स्थिति भी हो सकती है।
कब लें डॉक्टर की सलाह?
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ये लक्षण लगातार दिखाई दें या समय के साथ बढ़ने लगें, तो तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट या डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए। शुरुआती स्टेज में बीमारी का पता चलने पर इलाज आसान और ज्यादा असरदार हो सकता है।