वैश्विक स्तर पर कड़ी कार्रवाई : भारत के लिए एक अवसर

Edited By Updated: 12 Jul, 2026 05:37 AM

global crackdown an opportunity for india

कई देशों की संघीय कानून प्रवर्तन एजैंसियों द्वारा महाद्वीपों में फैले नैटवर्क के साथ अंतर्राष्ट्रीय अपराध गिरोहों के खिलाफ चलाया गया बहु-एजैंसी अभियान स्वागत योग्य है। भारत ने जांच में सक्रिय रूप से सहयोग किया है। जांच के निष्कर्ष दिल्ली के इस लंबे...

कई देशों की संघीय कानून प्रवर्तन एजैंसियों द्वारा महाद्वीपों में फैले नैटवर्क के साथ अंतर्राष्ट्रीय अपराध गिरोहों के खिलाफ चलाया गया बहु-एजैंसी अभियान स्वागत योग्य है। भारत ने जांच में सक्रिय रूप से सहयोग किया है। जांच के निष्कर्ष दिल्ली के इस लंबे समय से चले आ रहे रुख की पुष्टि करते हैं कि विदेशों में सक्रिय आतंकी गुटों में उसकी कोई भूमिका नहीं थी। वर्षों से, भारतीय सरकार को जून 2023 में सरे में खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में संलिप्तता के आरोपों का सामना करना पड़ा था। इस हत्या और तत्कालीन जस्टिन ट्रूडो सरकार द्वारा चलाए गए सार्वजनिक दुष्प्रचार अभियान ने द्विपक्षीय संबंधों को गहरे संकट में डाल दिया था। 

अब, रॉयल कैनेडियन माऊंटेड पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के सार्वजनिक बयान, जिनकी जांच का हवाला पहले भारतीय सुरक्षा प्रतिष्ठान पर संदेह पैदा करने के लिए दिया जाता था, प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के नेतृत्व में नए कनाडाई नेतृत्व की परिपक्वता को दर्शाते हैं। उन्होंने न केवल दोनों देशों के बीच संबंधों को सुधारने के लिए, बल्कि व्यापार और शिक्षा में सहयोग को गति देने के लिए भी कदम उठाए हैं। कई भारतीय छात्रों के लिए कनाडाई विश्वविद्यालय लंबे समय से पसंदीदा गंतव्य रहे हैं लेकिन राजनयिक गतिरोध ने शैक्षिक आदान-प्रदान को बाधित कर दिया था। ओटावा से मिले नए संकेतों से लोगों के बीच संबंधों को नई गति मिलनी चाहिए।

ऑप्रेशन हार्ड बॉल ने कनाडा ही नहीं बल्कि अमरीका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में भी भारतीय प्रवासियों को निशाना बनाने वाले आपराधिक गिरोहों की अंतर्राष्ट्रीय पहुंच को उजागर किया है। भारतीय सुरक्षा एजैंसियां संगठित अपराध और आतंकी नैटवर्क के बीच उभरते गठजोड़ की ओर इशारा करने वाली पहली एजैंसियों में से थीं। इस गठजोड़ ने अलगाववादी समूहों को अपने एजैंडे को वित्तपोषित और कायम रखने में सक्षम बनाया, जबकि सुरक्षा एजैंसियों को ड्रग्स, आतंकवाद और अलगाववाद में एक साथ शामिल गिरोहों का सामना करने के लिए मजबूर किया। जबरन वसूली के फोन, जो कभी मुंबई के पुराने अंडरवल्र्ड से जुड़े थे, अब विदेशों में बसे भारतीयों को आतंकित करने के लिए आपराधिक गिरोहों का पसंदीदा हथियार बन गए हैं। साथी भारतीयों को शिकार बनाते हुए, इन नैटवर्कों ने प्रवासी भारतीयों की प्रतिष्ठा को भी धूमिल किया है, अक्सर कमजोर छात्रों को मोहरे के रूप में इस्तेमाल करके।

यह अभियान भारतीय प्रवासी समुदाय की सुरक्षा बढ़ाने का एक अवसर प्रदान करता है। यह भारत के लिए घरेलू गिरोहों और जबरन वसूली करने वाले गिरोहों को खत्म करने का भी एक मौका है, जो देश के विभिन्न हिस्सों में व्यापारियों को लगातार निशाना बना रहे हैं। संदेश स्पष्ट होना चाहिए। गिरोह संस्कृति की चकाचौंध में फंसे युवाओं को यह समझना होगा कि यह रास्ता सत्ता या समृद्धि की ओर नहीं, बल्कि जेल या देश निकाला की ओर ले जाता है। जो गिरोह कभी अछूत माने जाते थे, अब विभिन्न न्यायक्षेत्रों में उनका पीछा किया जा रहा है। भारत को इस अवसर का लाभ उठाकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि संगठित अपराध एक लाभदायक धंधा न रहे, बल्कि उसे उसके वास्तविक स्वरूप में देखा जाए-एक उच्च जोखिम वाला, शून्य लाभ वाला धंधा।                     -

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