Edited By ,Updated: 09 Mar, 2026 05:49 AM

अब तक की कहानी : ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में प्रयासरत भारत ने 2 मार्च को कनाडा की कंपनी कैमेको के साथ 2.6 अरब कनाडियन डॉलर का समझौता किया । इस समझौते के तहत भारत को 2027 से 2035 के बीच लगभग 10,000 टन यूरेनियम की आपूॢत सुनिश्चित की गई है।
अब तक की कहानी : ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में प्रयासरत भारत ने 2 मार्च को कनाडा की कंपनी कैमेको के साथ 2.6 अरब कनाडियन डॉलर का समझौता किया । इस समझौते के तहत भारत को 2027 से 2035 के बीच लगभग 10,000 टन यूरेनियम की आपूॢत सुनिश्चित की गई है।
भारत के पास यूरेनियम का कितना भंडार : भारत में यूरेनियम के घरेलू और आयातित भंडार दोनों मौजूद हैं। घरेलू भंडार में 4.2-4.3 लाख टन अयस्क है, जो झारखंड के जादुगुडा और तुरमडीह तथा आंध्र प्रदेश के तुम्मलपल्ले की प्रमुख खानों में फैला हुआ है। इस अयस्क से निकाले जा सकने वाले यूरेनियम की मात्रा 76,000-92,000 टन होने का अनुमान है।
अयस्क और धातु के बीच परिमाण का अंतर इसलिए है क्योंकि भारतीय अयस्क ‘निम्न श्रेणी’ का है (0.02-0.45 प्रतिशत सांद्रता), जबकि कनाडा में उच्च श्रेणी का अयस्क पाया जाता है (भारतीय अयस्क से 10-100 गुना अधिक समृद्ध)। मात्रा के हिसाब से कैमेको विश्व के 3 सबसे बड़े यूरेनियम उत्पादकों में से एक है। यूरेनियम अयस्क का आयात करना इसे निकालने की तुलना में सस्ता है लेकिन इसका उपयोग कानूनी तौर पर परमाणु हथियारों में नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि भारत घरेलू स्तर पर भी अयस्क का खनन करता है।
क्या इस सौदे में 2010 का समझौता शामिल है : कैमेको के साथ यह समझौता भारत-कनाडा नागरिक परमाणु सहयोग समझौते (एन.सी.ए.) के अंतर्गत आता है। इस पर 2010 में हस्ताक्षर किए गए थे, परमाणु आपूर्तिकत्र्ता समूह द्वारा भारत को ‘क्लीन’ छूट जारी करने के 2 साल बाद, जो बदले में भारत और अमरीका के बीच 123वें परमाणु समझौते के कारण संभव हुई थी। दूसरी ओर, एन.सी.ए. की इस बात के लिए भी आलोचना की गई है कि वह भारत के परमाणु हथियार कार्यक्रम को परोक्ष रूप से समर्थन दे रहा है, भारत नागरिक उपयोग के लिए जितना अधिक यूरेनियम आयात करता है, उतना ही अधिक घरेलू यूरेनियम वह सैन्य उपयोग के लिए सुनिश्चित कर सकता है।
भारत अपने यूरेनियम का उपयोग कैसे करता है : भारत में वर्तमान में लगभग 9 गीगावाट की उत्पादन क्षमता वाले 24 परमाणु रिएक्टर कार्यरत हैं। 700 मैगावाट क्षमता वाले प्रैशराइज्ड हैवी वाटर रिएक्टर (पी.एच.डब्ल्यू.आर.) वर्तमान में भारत की कुल बिजली का 6.7 गीगावाट, यानी लगभग 3 प्रतिशत उत्पादन करते हैं और इनमें ईंधन के रूप में यूरेनियम का उपयोग होता है। सरकार 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावाट तक बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, भूमि अधिग्रहण और स्थानीय विरोध प्रदर्शनों के कारण इस योगदान को बढ़ाने के पिछले प्रयास बाधित हुए हैं।
ट्रॉम्बे में स्थित ‘ध्रुवा’ जैसे अनुसंधान रिएक्टरों में भी यूरेनियम की महत्वपूर्ण मात्रा का उपयोग टैक्नीशियम-99एम और आयोडीन-131 जैसे चिकित्सा समस्थानिकों के उत्पादन और उन्नत सामग्री विज्ञान अनुसंधान के लिए किया जाता है। 2025-26 के केंद्रीय बजट में, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नई पीढ़ी के छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों के विकास के लिए 20,000 करोड़ रुपए आबंटित किए, जो आमतौर पर 3.5 प्रतिशत समृद्ध यूरेनियम का उपयोग करते हैं। घरेलू यूरेनियम का उपयोग परमाणु युद्धक हथियारों (जिनकी संख्या वर्तमान में लगभग 170 होने का अनुमान है) और परमाणु ऊर्जा से चलने वाली आई.एन.एस. अरिहंत श्रेणी की पनडुब्बियों के लिए भी किया जाता है।
भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम कैसा चल रहा है : भारत वर्तमान में तीन चरणों वाले कार्यक्रम के पहले चरण से दूसरे चरण में प्रवेश कर रहा है। पहले चरण में, फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पी.एच.आर.) बिजली उत्पादन के लिए प्राकृतिक यूरेनियम-235 का उपयोग करेंगे और प्लूटोनियम-239 उप-उत्पाद के रूप में प्राप्त होगा। दूसरे चरण में, फास्ट ब्रीडर रिएक्टर बिजली उत्पादन, यूरेनियम-233 और अतिरिक्त प्लूटोनियम-239 के मिश्रित ऑक्साइड ईंधन का उपयोग करेंगे। (इन रिएक्टरों को फास्ट ब्रीडर रिएक्टर इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये खपत से अधिक ईंधन का उत्पादन करते हैं।) कलपक्कम में स्थित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पी.एफ.बी.आर.) वर्तमान में चालू होने के उन्नत चरण में है।
अंतत:, उन्नत भारी जल रिएक्टर ईंधन के रूप में प्लूटोनियम-239 और थोरियम-232 का उपयोग करेंगे, जिससे बिजली और यूरेनियम-233 का उत्पादन होगा। होमी जे. भाभा ने इस तीन-चरणीय कार्यक्रम की परिकल्पना इस तथ्य का लाभ उठाने के लिए की थी कि भारत में विश्व के थोरियम भंडार का 20-25 प्रतिशत हिस्सा मौजूद है। हालांकि, इस कार्यक्रम में कई बार देरी हुई और लागत में भी भारी वृद्धि हुई है। डी.ए.ई. के पूर्व अध्यक्ष अनिल काकोडकर ने बताया है कि एक फास्ट ब्रीडर रिएक्टर द्वारा दूसरे रिएक्टर को शुरू करने के लिए पर्याप्त ईंधन उत्पादन करने में लगने वाला समय (डबलिंग टाइम) वर्तमान में 15-20 वर्ष है। इस प्रकार, 100 गीगावाट बिजली उत्पादन के लिए भारत को कई डबलिंग चक्रों से गुजरना होगा, जो यूरेनियम की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए किए जा रहे कई समझौतों का कारण हो सकता है।-वासुदेवन मुकुंथ