कश्मीर की तस्वीर व तकदीर दोनों बदल रहीं

Edited By ,Updated: 06 Aug, 2022 06:50 AM

kashmir s picture and destiny are changing

5 अगस्त, 2019 भारत और जम्मू-कश्मीर के लिए इतिहास का अनुपम दिन है। इसी दिन 7 दशक से अखंड भारत, एक भारत की चिरप्रतीक्षित मांग पूरी हुई और कश्मीर की कश्मीरियत लौटी। प्रधानमंत्री

5 अगस्त, 2019 भारत और जम्मू-कश्मीर के लिए इतिहास का अनुपम दिन है। इसी दिन 7 दशक से अखंड भारत, एक भारत की चिरप्रतीक्षित मांग पूरी हुई और कश्मीर की कश्मीरियत लौटी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जम्मू कश्मीर में विकास और विश्वास के बहाल होते ही इसकी तस्वीर और तकदीर बदल गई। आतंकवाद और परिवारवाद का अस्त हुआ तो खुशहाल कश्मीर की तस्वीर दुनिया को दिखने लगी। 

विकासवाद और राष्ट्रवाद की रोशनी ने कश्मीर को अपना गौरवमयी इतिहास दिया है। इसी का परिणाम रहा कि आजादी के अमृत वर्ष में पहली बार कश्मीर का लाल-चौक तिरंगामय होकर भारत माता की जय के उद्घोष से गूंजा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम हर ओर गुंजायमान हो रहा है। प्रधानमंत्री को कश्मीर के विकास पुरुष के रूप में देखते हुए श्रीनगर को पर्यटकीय राजधानी के रूप में विकसित किए जाने का एक नया मार्ग खुला है, वह मार्ग है विकास का, राष्ट्रवाद का, उज्ज्वल भविष्य का, राष्ट्रीय एकता और अखंडता का। 

जनसंघ से लेकर भाजपा तक कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग मानते हुए इसके लिए अनवरत संघर्ष किया गया। जनसंघ के समय से ही हम एक देश,एक विधान, एक निशान, एक प्रधान का नारा लगाते रहे। डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी कश्मीर के लिए स्वतंत्र भारत के पहले बलिदानी बने। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इसी दृढ़ इच्छाशक्ति और संकल्प ने 5 अगस्त 2019 को कश्मीर से धारा 370 को समाप्त कर एक भारत, अखंड भारत के सपने को साकार किया। फिर धारा 370 की समाप्ति के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर में विकास और विश्वास की बयार बहाई, जिससे भारतीयता का रंग फैला। 

जो कश्मीर भय और देश विरोधी ताकतों का अड्डा हुआ करता था, वहां देशभक्ति का माद्दा दिख रहा है। कभी परिवारवाद और आतंकवाद के चंगुल में फंसा कश्मीर आज राष्ट्रवाद और विकासवाद का झंडा बुलंद कर रहा है। एक देश में एक विधान, एक निशान, एक प्रधान का सपना साकार हुआ। अखंड भारत, एक भारत, समर्थ भारत और सशक्त भारत की लकीर कश्मीर में खींच दी गई। जम्मू-कश्मीर का  सामाजिक, भौगोलिक और आर्थिक एकीकरण सुनिश्चित हो गया है। 

औद्योगिकीकरण के क्षेत्र में जम्मू-कश्मीर देश के पिछड़े राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में से एक था। 5 अगस्त, 2019 से पहले जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक और प्रशासनिक व्यवस्था के तहत देश-विदेश का कोई भी नागरिक जम्मू-कश्मीर में निवेश नहीं कर सकता था और वहां स्थायी रूप से नहीं बस सकता था। इसलिए बाहरी निवेशक जम्मू-कश्मीर में निवेश से कतराते थे। आतंकी हिंसा इसके आर्थिक-औद्योगिक विकास में बाधा थी। बेरोजगारी बढ़ रही थी। सरकारी नौकरी रसूखदारों को ही मिलती थी। पहले जम्मू और कश्मीर के साथ भारत के अन्य राज्यों से भिन्न व्यवहार किया जाता था। इसके कारण यह राज्य मुख्यधारा से दूर था। 

अनुच्छेद 370 के कारण संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार था, लेकिन किसी अन्य विषय से संबंधित कानून को लागू करवाने के लिए केन्द्र को राज्य सरकार की मंजूरी लेनी होती थी। भारत की संसद जम्मू-कश्मीर के संबंध में सीमित क्षेत्र में ही कानून बना सकती थी। अनुच्छेद 370 के कारण से जम्मू-कश्मीर राज्य पर भारतीय संविधान की अधिकतर धाराएं लागू नहीं होती थीं। केन्द्र के 170 कानून जो पहले यहां लागू नहीं होते थे, अब वे इस क्षेत्र में लागू कर दिए गए हैं। वर्तमान में जम्मू-कश्मीर केन्द्र शासित प्रदेश में सभी केंद्रीय कानून लागू हैं। अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। आज परिस्थिति भी पूरी तरह बदल चुकी है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की इच्छाशक्ति से धारा 370 के समाप्त होते ही जम्मू-कश्मीर के लोग अब देश की मुख्यधारा से जुड़ गए हैं। व्यापार और उद्योगों की स्थापना में तेजी आई है। इसका असर राज्य की जी.डी.पी. पर सकारात्मक रूप से दिख रहा है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू कश्मीर में निवेश की सुरक्षा की गारंटी देती नई औद्योगिक नीति का असर नजर आने लगा है। तीन साल के अंतराल में ही दो दर्जन क्षेत्रों में निवेश आने लगे हैं। निवेश के लिए कई समझौते हो चुके हैं। 

डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का ‘एक देश, एक विधान, एक प्रधान’ का संकल्प साकार हुआ तो धरती का स्वर्ग कहा जाने वाला जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अब देश के बाकी हिस्से के साथ विकास की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। देश के साथ कश्मीर के कदम-दर-कदम दशकों के फासले को कम करते हुए नरेन्द्र  मोदी सरकार ने विकास की दौड़ में पीछे छूट रहे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त कर 70 साल की टीस खत्म की है और उसे मुख्यधारा से जोड़ देश के अन्य राज्यों के बराबर लाकर खड़ा किया है। कश्मीर की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल रही है और शीघ्र ही जम्मू-कश्मीर देश के विकसित राज्यों की पंक्ति में आकर खड़ा होगा।-तरुण चुघ (भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री)

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