विदेशी विश्वविद्यालयों के आने से भारतीय ‘शिक्षा प्रणाली’ में फिर पड़ी जान

Edited By Updated: 21 Sep, 2026 05:36 AM

the arrival of foreign universities has revived the indian education

भारत में विदेशी विश्वविद्यालयों के प्रवेश और विस्तार से एडटेक कंपनियों के लिए नए कारोबारी अवसर पैदा हो रहे हैं, जिससे वैश्विक संस्थानों के साथ सांझेदारी में ऑनलाइन उच्च शिक्षा और पेशेवर पाठ्यक्रमों की मांग बढ़ रही है। सिंपलीलर्न और स्केलर को उम्मीद...

भारत में विदेशी विश्वविद्यालयों के प्रवेश और विस्तार से एडटेक कंपनियों के लिए नए कारोबारी अवसर पैदा हो रहे हैं, जिससे वैश्विक संस्थानों के साथ सांझेदारी में ऑनलाइन उच्च शिक्षा और पेशेवर पाठ्यक्रमों की मांग बढ़ रही है। सिंपलीलर्न और स्केलर को उम्मीद है कि विदेशी विश्वविद्यालयों की बढ़ती उपस्थिति से उनके नामांकन बढ़ाने में मदद मिलेगी, वहीं सात यूनिवर्सिटी जॉइंट वैंचर चलाने वाले एमेरिटस को आने वाले वर्षों में देश में अपने विस्तार में 10-15 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद है। एमेरिटस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी  (सी.ई.ओ.) अश्विन डामेरा ने कहा, ‘‘हम भारत में अपना निवेश दोगुना कर रहे हैं और यह पहल हमारे विकास के केंद्र में है।’’

यह कदम विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यू.जी.सी.) द्वारा ऑस्ट्रेलिया, इटली, यू.के. और अमरीका के 15 विदेशी उच्च शिक्षण संस्थानों को भारत के विभिन्न स्थानों पर परिसर (कैंपस) स्थापित करने के लिए 16 आशय पत्र जारी किए जाने के बाद सामने आया है। प्रस्तावित परिसर बेंगलुरु, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, मुंबई और चेन्नई में आने की उम्मीद है। वर्तमान में, भारत में लगभग 5 परिसर स्थापित किए जा चुके हैं। इनमें साउथैम्प्टन विश्वविद्यालय, क्वीन्स यूनिवर्सिटी बेलफास्ट और ऑस्ट्रेलिया का डीकिन विश्वविद्यालय शामिल हैं। नामांकन बढ़ाने के लिए विदेशी विश्वविद्यालय परिसरों की क्षमता कोई नई बात नहीं है। विदेशी परिसरों वाले भारतीय विश्वविद्यालयों ने भी देखा है कि उन बाजारों में उनकी मौजूदगी उनकी पहुंच बढ़ाने में मदद करती है।

सिंपलीलर्न के सहसंस्थापक कश्यप दलाल ने कहा, ‘‘हमें इनमें से कुछ बाजारों से अपने कुल नामांकन का लगभग 25 प्रतिशत से 30 प्रतिशत हिस्सा मिलता है। यही बात इसे बेहद आकर्षक बनाती है। यह पहुंच का विस्तार करता है और जाहिर तौर पर जैसे-जैसे समय बीतेगा, उम्मीद है कि हम उन बाजारों में और भी अधिक प्रमुख होंगे।’’

बड़े ब्रांड का प्रभाव : स्केलर के संस्थापक अभिमन्यु सक्सेना ने कहा कि हालांकि इस विस्तार से अवसर पैदा होने की उम्मीद है लेकिन अधिक स्थापित वैश्विक विश्वविद्यालयों की मौजूदगी मांग को बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। सक्सेना ने कहा, ‘‘छात्र यह देख रहे हैं कि क्या वे वास्तव में कुछ ऐसा अत्याधुनिक सीख रहे हैं जो उन्हें उनके करियर में आगे ले जाने वाला है। एम.आई.टी., स्टैनफोर्ड और हार्वर्ड के पास ऐसे पाठ्यक्रम हैं और आई.आई.टी. भी इन्हें पेश करते हैं क्योंकि वे इन क्षेत्रों में निरंतर शोध करते हैं।’’

दो मार्ग : विदेशी विश्वविद्यालय भारत में दो मार्गों के माध्यम से परिसर स्थापित कर रहे हैं-यू.जी.सी. के 2023 के नियम और गिफ्ट सिटी आई.एफ.एस.सी. ढांचा, जो अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (आई.एफ.एस.सी.ए.) द्वारा शासित है। यू.जी.सी. का ढांचा पात्र विदेशी उच्च शिक्षण संस्थानों को भारत में परिसर स्थापित करने की अनुमति देता है, जबकि गिफ्ट सिटी मार्ग विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए एक अलग नियामक ढांचा प्रदान करता है। शार्दुल अमरचंद मंगलदास में पार्टनर सादिया खान ने कहा, ‘‘ये नए नियम किसी भी इकाई को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफ.डी.आई.) प्राप्त करने की अनुमति देते हैं, जिसमें एक परिसर स्थापित करने के लिए निजी कंपनी या एल.एल.पी. बनाना भी शामिल है। इसलिए, परिसर स्थापित करने के लिए एक लाभकारी वित्त-ढांचे का उपयोग किया जा सकता है।’’

विदेशी संस्थानों द्वारा प्रस्तावित किए जा रहे कार्यक्रम व्यवसाय (बिजनैस), वित्त (फाइनांस), सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, डाटा साइंस, आॢटफिशियल इंटैलीजैंस (ए.आई.), साइबर सुरक्षा, उद्यमिता (एंटरप्रेन्योरशिप) और बायोमैडिकल साइंसेज जैसे क्षेत्रों से जुड़े हैं।-एलेनजिथ के. जॉनी

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