US सीनेट में ट्रंप के ‘टैरिफ हथियार’ को मंजूरी: भारत को चेतावनी-'रूस से दोस्ती की कीमत चुकाने को रहो तैयार', मिला करारा जवाब

Edited By Updated: 17 Sep, 2026 11:39 AM

us house passes russia sanctions bill india reacts as 100 trump tariff looms

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस पर प्रतिबंध और उसके तेल-गैस खरीदार देशों पर भारी शुल्क लगाने का अधिकार ट्रंप को देने वाला विधेयक पारित कर दिया है। भारत और चीन इसके दायरे में आ सकते हैं। भारत ने कहा है कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों की...

 Washington: रूस से तेल खरीदने को लेकर अमेरिका ने  दबाव बढ़ाने की दिशा में एक और कदम उठाया है।  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस पर प्रतिबंध लगाने तथा भारत और चीन जैसे उसके तेल एवं गैस के व्यापारिक साझेदार देशों पर भारी शुल्क लगाने का अधिकार देने के लिये अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने एक विधेयक पारित किया है । 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' को अमेरिकी सीनेट ने पिछले महीने पारित किया था। प्रतिनिधि सभा ने बुधवार शाम 262-159 मतों से इसे मंजूरी दे दी। अब इसे ट्रंप के पास भेजा जाएगा जिस पर उनके हस्ताक्षर होने के बाद यह कानून बन जाएगा। विधेयक के पक्ष में 203 रिपब्लिकन, 58 डेमोक्रेट और एक निर्दलीय सांसद ने मतदान किया।

 

वहीं, रिपब्लिकन पार्टी के सात और 152 डेमोक्रेट सांसदों ने इस विधेयक का विरोध किया। डेमोक्रेट सांसदों का विरोध मुख्य रूप से ट्रंप को दिए जाने वाले शुल्क लगाने के अधिकार को लेकर था।  अमेरिकी सांसदों की ओर से भारत को रूस से ऊर्जा कारोबार की कीमत चुकाने की चेतावनी के बीच नई दिल्ली ने भी साफ कर दिया है कि 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा और भारत अपने व्यापारिक एवं आर्थिक हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा। इस विधेयक का नाम दक्षिण कैरोलाइना के रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया है, जिनका रूस के खिलाफ इस विधेयक के लिए समर्थन जुटाने में एक साल से अधिक समय बिताने के बाद जुलाई में निधन हो गया था। विधेयक पर बहस के दौरान डेमोक्रेट सांसद रिचर्ड नील ने कहा, ''हम इन राष्ट्रपति को और अधिक शुल्क लगाने का अधिकार देने के पक्ष में नहीं हैं।''

 

विधेयक में रूस के नेतृत्व और उसके ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ उन जहाजों के 'छद्म बेड़ों' पर भी प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है, जो मॉस्को को तेल की आपूर्ति पर लगे प्रतिबंधों से बचने में मदद करते हैं। इसके अलावा इसमें ट्रंप को चीन, भारत और अन्य देशों पर कड़े शुल्क लगाने का अधिकार देने का भी प्रस्ताव है, ताकि इन देशों की रूसी तेल और गैस पर निर्भरता कम की जा सके। इसमें ईरान पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने का भी प्रावधान है। विधेयक पारित होने के बाद पत्रकारों से बातचीत में डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा, ''चीन और भारत, आपको अपना तेल और गैस कहीं और से खरीदना होगा।'' डेमोक्रेट सीनेटर जीन शहीन ने कहा, ''रूस 'शैडो फ्लीट' का इस्तेमाल करके अपना तेल और गैस बेच रहा है, जिसका मतलब है कि इसे बाजार भाव से कम कीमत पर खरीदा जा रहा है और इसकी आपूर्ति मुख्य रूप से चीन और भारत जैसे देशों को हो रही है।'' शहीन ने कहा, ''चीन रूसी तेल और गैस का सबसे बड़ा उपयोगकर्ता है और हमें केवल पुतिन ही नहीं, बल्कि चीन तथा रूसी तेल और गैस खरीदने वाले हर देश को यह कड़ा संदेश देने की जरूरत है कि इसकी कीमत उन्हें चुकानी होगी।'' 

 

भारत का कड़ा संदेश-ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं
अमेरिकी विधेयक पर भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि नई दिल्ली घटनाक्रम पर नजर रख रही है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत अपने 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है और बदलती बाजार परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग स्रोतों से ऊर्जा खरीद जारी रखेगा। विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर हाल के महीनों में अमेरिकी पक्ष के साथ उच्च स्तर पर बातचीत हुई है। भारत ने अमेरिका के समक्ष इस कदम के द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को स्पष्ट रूप से रखा है। भारत ने साथ ही कहा है कि वह अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा। सरकार इन घटनाक्रमों के प्रभावों से निपटने के लिए भारतीय व्यापार और उद्योग संगठनों के साथ मिलकर काम करेगी।

 

 बता दें कि यह विधेयक ऐसे समय पारित हुआ है जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अमेरिका की आधिकारिक यात्रा कुछ ही दिन में होनी है। अमेरिकी सीनेट ने पिछले महीने 86-11 के भारी बहुमत से विधेयक पारित किया था, लेकिन प्रतिनिधि सभा में इसे आगे बढ़ाने की गति धीमी हो गई थी। विधेयक पर मतदान ऐसे समय हुआ है जब यूक्रेन समर्थक समूहों ने अपने पक्ष में समर्थन जुटाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। 'अमेरिकन कोएलिशन फॉर यूक्रेन' द्वारा आयोजित 'यूक्रेन एक्शन समिट' यहां जारी है। इसमें अमेरिकी सांसदों से कीव को लगातार समर्थन देने के लिए पैरवी की जा रही है।

  

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!