अफसरों के नाकारापन से नहीं थमेंगे नालंदा मंदिर जैसे हादसे

Edited By Updated: 04 Apr, 2026 03:40 AM

the incompetence of officials will not prevent accidents like the nalanda temple

सरकारी मशीनरी के नाकारा होने के कारण देश में धार्मिक आयोजनों में भगदड़ जैसे हादसे रुक नहीं रहे। इस शृंखला में नालंदा मंदिर का हादसा भी जुड़ गया है, जहां भगदड़ में 9 लोगों की जान चली गई। आठ महिलाओं की भीड़ में दबने से मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक...

सरकारी मशीनरी के नाकारा होने के कारण देश में धार्मिक आयोजनों में भगदड़ जैसे हादसे रुक नहीं रहे। इस शृंखला में नालंदा मंदिर का हादसा भी जुड़ गया है, जहां भगदड़ में 9 लोगों की जान चली गई। आठ महिलाओं की भीड़ में दबने से मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक पुरुष ने अस्पताल में दम तोड़ा। चैत्र महीने के आखिरी मंगलवार को शीतला अष्टमी के मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस मंदिर में पहुंचे थे। वहां मेला भी लगा था। मंदिर में जुटी 10,000 की भीड़ के लिए एक भी पुलिस वाले की तैनाती नहीं थी। यह हालत है देश में जिम्मेदार मानी जाने वाली चुनी हुई सरकारों की। अधिकारी इस बात का आकलन ही नहीं कर सके कि इतने बड़े आयोजन में कोई हादसा भी हो सकता है। 

कुंभ मेले, मंदिर दर्शन, सत्संग, त्यौहार और रेलवे स्टेशनों पर ट्रेन पकडऩे की होड़ जैसी घटनाएं न केवल आस्था की प्रतीक हैं, बल्कि प्रबंधन की कमी के कारण अक्सर जानलेवा साबित होती रही हैं। साल-दर-साल मची भगदड़ की घटनाओं में सैंकड़ों निर्दोष जिंदगियां चली जाती हैं, जिनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। ये हादसे मुख्य रूप से सुरक्षा व्यवस्थाओं की चूक, अफवाहें, संकरी जगहों पर अत्यधिक भीड़ और प्रशासन की लापरवाही के कारण होती हैं। देश के सरकारी तंत्र ने विगत वर्षों में हुए इस तरह के हादसों से कोई सबक नहीं सीखा। यही वजह है कि ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति थम नहीं रही। विगत एक दशक में ऐसा शायद ही कोई साल गया होगा, जब भगदड़ में मौतों की दर्दनाक घटनाएं सामने नहीं आई होंगी।

3 मई, 2025 को गोवा के श्री लैरे देवी मंदिर के वार्षिक मेले में पूजा-अर्चना के दौरान भगदड़ मची। इसमें 6 श्रद्धालुओं की मौत हुई और लगभग 55 लोग घायल हुए। 15 फरवरी, 2025 को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर प्रयागराज कुंभ में शामिल होने के लिए ट्रेन पकडऩे की होड़ के चलते मची भगदड़ में 18 यात्रियों की जान गई। 9 जनवरी, 2025 को प्रयागराज महाकुंभ के संगम क्षेत्र में भगदड़ में 30 तीर्थयात्रियों की मौत हुई और 60 लोग घायल हुए। इसी तरह 8 जनवरी, 2025 को आंध्र प्रदेश के तिरुपति में श्री वेंकटेश्वर मंदिर में 6 श्रद्धालुओं की मौत हुई।
2 जुलाई, 2024 को उत्तर प्रदेश के हाथरस में संत भोले बाबा (नारायण साकार हरि) के सत्संग के बाद भगदड़ मची। इस घटना में कुल 121 लोगों की मौत हुई, जिनमें अधिकांश महिलाएं और बच्चे थे। यह हादसा सुरक्षा प्रबंधों की कमी के चलते हुआ। 31 मार्च, 2023 को मध्य प्रदेश के इंदौर में रामनवमी पर ढाई तालाब की बावड़ी की छत गिरने से भगदड़ मच गई। इस हादसे में 36 तीर्थयात्रियों की मौत हुई और 16 अन्य घायल हुए। 

भीड़-नियंत्रण में चूक यहां भी जानलेवा साबित हुई। इन हादसों के अलावा विगत वर्षों में कटरा जम्मू में वैष्णो देवी मंदिर, महाराष्ट्र के मंधर देवी, नासिक में कुंभ स्नान, आंध्र प्रदेश के राजामुंद्री, बिहार के पटना में गांधी मैदान, मध्य प्रदेश के दतिया में पुल पर अफवाह फैलने, हरिद्वार में हर की पौड़ी घाट पर आयोजित गायत्री महायज्ञ आयोजन, उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़, जोधपुर में चामुंडा देवी मंदिर, हिमाचल के नैना देवी में भगदड़ के दौरान सैंकड़ों लोगों की जान चली गई थी।

नालंदा में हुए दर्दनाक हादसे के बाद अन्य हादसों की तरह जांच कमेटी बना दी गई। बिहार सरकार की तरफ से मृतकों के परिजनों को सांत्वना राशि की घोषणा कर दी गई। राजनीतिक दलों के नेताओं की तरफ से औपचारिकता निभाते हुए घडिय़ाली आंसू बहाए गए। किन्तु एक भी जिम्मेदार अफसर के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज नहीं की गई। अन्य हादसों की तरह इस हादसे में भी एक भी अफसर को जेल नहीं होगी। किसी का भी बाल बांका नहीं होगा, होगा भी तो सिर्फ दिखावे के लिए छोटे कर्मचारी अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।

देश में परंपरा रही है कि बड़े अफसर हर बार बच निकलते हैं। इस लिहाज से बिहार की यह घटना इससे अलग नहीं है। सरकारों ने न पहले हुए ऐसे हादसों से कोई सबक सीखा था, न ही बिहार हादसे से सीखेंगे। ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति देश में जारी रहेगी। ऐसे हादसों में सरकारी कुप्रबंधन की वजह से आम लोगों की मौत होती रहेगी और सरकारें तमाशबीन बनी रहेंगी।-योगेन्द्र योगी
    

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