ट्रम्प की ढिठाई, बदले में कुछ नहीं!

Edited By Updated: 15 Feb, 2026 04:08 AM

trump s arrogance nothing in return

यह एक पतंग है.., यह एक चिडिय़ा है.., यह एक हवाई जहाज है। ‘यह क्या है?’ यह सवाल अमरीका और भारत की सरकारों के 6 फरवरी, 2026 को जारी किए गए ज्वॉइंट स्टेटमैंट के लिए एकदम सही है। ज्वॉइंट स्टेटमैंट ने अनगिनत अटकलों को हवा दी है, और भारत सरकार के विवरण से...

यह एक पतंग है.., यह एक चिडिय़ा है.., यह एक हवाई जहाज है। ‘यह क्या है?’ यह सवाल अमरीका और भारत की सरकारों के 6 फरवरी, 2026 को जारी किए गए ज्वॉइंट स्टेटमैंट के लिए एकदम सही है। ज्वॉइंट स्टेटमैंट ने अनगिनत अटकलों को हवा दी है, और भारत सरकार के विवरण से बचने के तरीके ने शक के बादल हटाने में मदद नहीं की। चूंकि मिस्टर ट्रम्प पत्ते खोल रहे हैं, इसलिए ज्वॉइंट स्टेटमैंट शायद अमरीका के लिए ङ्क्षचता की बात न हो, लेकिन भारत के लिए है। जारी किया गया ज्वॉइंट स्टेटमैंट धोखे पर आधारित था। भारतीय बातचीत करने वालों ने 2025 में बार-बार दावा किया कि वे एक द्विपक्षीय ट्रेड एग्रीमैंट (बी.टी.ए.) पर बातचीत कर रहे हैं। कॉमर्स मिनिस्टर ने कई बार कहा कि जल्द ही एक बी.टी.ए. हो जाएगा, असल में, उन्होंने ‘साल के आखिर’ से पहले कहा था। जैसा कि पता चला, ज्वॉइंट स्टेटमैंट कोई बी.टी.ए. नहीं है, यह कोई अंतरिम एग्रीमैंट भी नहीं है, यह एक अंतरिम एग्रीमैंट के लिए एक फ्रेमवर्क है। हमने पहाड़ हिलाया और हमें चूहा मिला।

लेन-देन कहां? : ज्वॉइंट स्टेटमैंट जारी होने के बाद, दोनों पक्षों ने दावा किया कि डील रेसिप्रोकल थी। यह दावा पढऩे वाले की समझ का अपमान है। ज्वॉइंट स्टेटमैंट को सरसरी तौर पर पढऩे से भी पता चल जाएगा कि यह रेसिप्रोसिटी पर आधारित नहीं है। ज्वॉइंट स्टेटमैंट के टेक्स्ट को ध्यान से देखें (जिसे मैंने नीचे ज्यादातर कॉपी किया है) :

-जबकि भारत सभी अमरीकी औद्योगिक सामानों और अमरीका के कई तरह के खाने और खेती के प्रोडक्ट्स पर टैरिफ खत्म कर देगा या कम कर देगा, वहीं यूनाइटेड स्टेट्स भारत के ओरिजिनल सामानों पर 18 प्रतिशत का रेसिप्रोकल टैरिफ लगाएगा (2 अप्रैल, 2025 को लगाए गए 25 प्रतिशत से कम), जिसमें टैक्सटाइल और कपड़े, चमड़ा और जूते, प्लास्टिक और रबड़, ऑर्गेनिक कैमिकल्स, होम डेकोर, कारीगर प्रोडक्ट्स और कुछ मशीनरी शामिल हैं। अमरीका जैनरिक फार्मास्यूटिकल्स, जैम्स और डायमंड्स, और एयरक्राफ्ट पाटर््स समेत कई तरह के सामानों पर रेसिप्रोकल टैरिफ तभी हटाएगा जब ‘इंटरिम एग्रीमैंट सफलतापूर्वक पूरा हो जाएगा’। 0 प्रतिशत बनाम 18 प्रतिशत में रेसिप्रोसिटी कहां है?

-भारत अमरीकी मैडीकल डिवाइस के ट्रेड में लंबे समय से चली आ रही रुकावटों को दूर करने और अमरीकी आई.सी.टी. सामानों के लिए मार्कीट एक्सैस में देरी करने वाले रिस्ट्रिक्टिव इंपोर्ट लाइसैंसिंग प्रोसीजर को खत्म करने पर सहमत है... भारत अमरीकी फूड और एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट्स के ट्रेड में लंबे समय से चली आ रही नॉन-टैरिफ रुकावटों को दूर करने पर भी सहमत है। यूनाइटेड स्टेट्स पर कोई मिलती-जुलती ऑब्लिगेशन नहीं है। नॉन-टैरिफ रुकावटों के मामले में, ऑब्लिगेशन और नो ऑब्लिगेशन के बीच रेसिप्रोसिटी कहां है?
-भारत अगले 5 सालों में 500 बिलियन डॉलर के अमरीकी एनर्जी प्रोडक्ट्स, एयरक्राफ्ट और एयरक्राफ्ट पार्ट्स, कीमती धातुएं, टैक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स और कोकिंग कोल खरीदने का इरादा रखता है। दोनों सरकारें टैक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स में ट्रेड को काफी बढ़ाएंगी - जिसमें ग्राफिक्स प्रोसैसिंग यूनिट्स (जी.पी.यूज) और डाटा सैंटर्स में इस्तेमाल होने वाले दूसरे सामान शामिल हैं। इस पैराग्राफ में बताए गए सभी प्रोडक्ट अमरीकी एक्सपोर्ट सामान हैं, न कि इंडियन सामान, जिन्हें अमरीका खरीदना चाहता है। रेसिप्रोसिटी कहां है?

-ज्वॉइंट स्टेटमैंट के साथ एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में, मिस्टर ट्रम्प ने इंडिया द्वारा उठाए गए ‘महत्वपूर्ण कदमों’ का जिक्र किया - इंडिया का रशियन फैडरेशन से सीधे या इनडायरैक्टली तेल इंपोर्ट करना बंद करने का कमिटमैंट, इंडिया का यह रिप्रैजैंटेशन कि वह यूनाइटेड स्टेट्स के एनर्जी प्रोडक्ट्स खरीदेगा और डिफैंस कोऑपरेशन बढ़ाने के लिए अमरीका के साथ इंडिया का फ्रेमवर्क एग्रीमैंट। इसलिए, मिस्टर ट्रम्प ने 6 अगस्त, 2025 को लगाई गई एडिशनल एड वैलोरम रेट ऑफ ड्यूटी (25 प्रतिशत का पीनल टैरिफ) को खत्म करने का फैसला किया। अमरीका से कुछ भी न लेकर भारत से तीन वादे करवाने में रेसिप्रोसिटी कहां है?

खुली धमकी : अगर भारत सीधे या इनडायरैक्टली रशियन फैडरेशन से तेल इंपोर्ट करना फिर से शुरू करता है, तो अमरीकी सरकार और एक्शन लेने पर विचार करेगी, जिसमें शायद भारतीय सामान पर 25 प्रतिशत का पैनल्टी टैरिफ फिर से लगाना शामिल है। 6 फरवरी, 2026 को तय पूरा फ्रेमवर्क एक मुद्दे पर टिका है-रूसी तेल। अमरीका की धमकी और भारत के झुकने के बीच क्या तालमेल है? 2 अप्रैल, 2025 से पहले, भारतीय सामान पर अमरीकी टैरिफ एम.एन.एफ. दर 3 प्रतिशत पर था। चूंकि भारत के पास बाइलेटरल ट्रेड सरप्लस था, इसलिए मिस्टर ट्रम्प ने अपनी संदिग्ध एमरजैंसी पावर्स का इस्तेमाल किया और 25 प्रतिशत का रेसिप्रोकल टैरिफ लगा दिया, जिसे अब घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। कई देशों पर ‘रेसिप्रोकल’ टैरिफ की लीगैलिटी अमरीकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के लिए रिजर्व है और इसे असंवैधानिक बताकर रद्द किया जा सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो भारत को अमरीकी सुप्रीम कोर्ट का शुक्रिया अदा करना होगा, राष्ट्रपति ट्रम्प का नहीं। नतीजा यह होगा कि दोनों देश पहले जैसी स्थिति में लौट जाएंगे, लेकिन अमरीका भारत से कई रियायतें ले लेगा, लेकिन वह कोई रियायत नहीं देगा। कितना अधिक लेन-देन है!

छिपे हुए बोझ : ट्रेड एक्सपर्ट, अजय श्रीवास्तव ने बताया है कि स्टील और एल्युमीनियम पर टैरिफ 50 प्रतिशत और ऑटो कम्पोनैंट्स पर 25 प्रतिशत रहेगा, लेकिन अमरीका के औद्योगिक सामान, कई खेती के सामान, लाल ज्वार, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स, ऑटोमोबाइल और हाई-एंड मोटरसाइकिलों पर ‘भारत बहुत ज्यादा रियायतें दे रहा है’। पहेली यह है कि भारत 5 साल में 500 बिलियन अमरीकी डॉलर में क्या खरीदेगा? इससे अमरीका के साथ भारत का जो थोड़ा ट्रेड सरप्लस है, वह खत्म हो जाएगा। अमरीका के पास कुछ ही सामान हैं जो भारत की इकोनॉमी को मजबूत करने में मदद करेंगे। हमारे पास शायद कोई चारा न बचे, सिवाय इसके कि हम बड़ी मात्रा में महंगे एयरक्राफ्ट/मिलिट्री इक्विपमैंट और ज्यादा लैंडेड कॉस्ट पर अमरीकी तेल खरीदें और हमें यह न पता हो कि उनका क्या करें।-पी. चिदम्बरम

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