2030 तक दोगुनी हो जाएगी चीन की परमाणु ताकत? अरुणाचल प्रदेश से महज इतनी दूर क्या चल रही प्लानिंग

Edited By Updated: 17 Feb, 2026 02:03 AM

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चीन तेजी से अपने परमाणु हथियारों की ताकत बढ़ा रहा है। हाल की रिपोर्टों और सैटेलाइट तस्वीरों से संकेत मिले हैं कि चीन अपने न्यूक्लियर हथियारों के भंडार में लगातार इजाफा कर रहा है। बताया जा रहा है कि 2026 तक चीन के पास करीब 600 परमाणु वॉरहेड हो सकते...

इंटरनेशनल डेस्कः चीन तेजी से अपने परमाणु हथियारों की ताकत बढ़ा रहा है। हाल की रिपोर्टों और सैटेलाइट तस्वीरों से संकेत मिले हैं कि चीन अपने न्यूक्लियर हथियारों के भंडार में लगातार इजाफा कर रहा है। बताया जा रहा है कि 2026 तक चीन के पास करीब 600 परमाणु वॉरहेड हो सकते हैं। इस मामले में वह रूस और अमेरिका के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा परमाणु हथियार भंडार रखने वाला देश बन चुका है।

तुलना करें तो रूस के पास लगभग 5,400 और अमेरिका के पास 5,100 से 5,200 के बीच वॉरहेड बताए जाते हैं। हालांकि चीन अभी इन दोनों देशों से काफी पीछे है, लेकिन उसकी बढ़ती रफ्तार को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि 2030 तक वह 1,000 से ज्यादा वॉरहेड का लक्ष्य हासिल कर सकता है।

सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ खुलासा

मीडिया रिपोर्ट्स, खासकर NYT (न्यूयॉर्क टाइम्स) की रिपोर्ट के मुताबिक, सैटेलाइट इमेज के जरिए चीन की गुप्त तैयारियों का पता चला है। इन तस्वीरों में सिचुआन प्रांत की घाटियों में स्थित दो खास जगहों जिटोंग और पिंगटोंग का जिक्र किया गया है। ये इलाके भारत के अरुणाचल प्रदेश से लगभग 800 किलोमीटर दूर बताए जा रहे हैं।

दावा किया गया है कि यहां हजारों वैज्ञानिक, इंजीनियर और मजदूर पहाड़ों के अंदर बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य कर रहे हैं। रिपोर्ट में इसे एक तरह का “इनलैंड न्यूक्लियर एम्पायर” यानी अंदरूनी परमाणु साम्राज्य बताया गया है।

2019 के बाद तेज हुआ विकास

जियोस्पेशियल इंटेलिजेंस विशेषज्ञ रेनी बाबियार्ज ने इन सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण किया है। उनके अनुसार, 2019 के बाद चीन की अलग-अलग न्यूक्लियर साइट्स पर निर्माण और विस्तार की रफ्तार काफी बढ़ गई है। जमीन के ढांचे में जो बदलाव दिख रहे हैं, वे चीन के सुपरपावर बनने के लक्ष्य के अनुरूप हैं, जिसमें परमाणु हथियार अहम भूमिका निभाते हैं।

क्या यहां हो रही है न्यूक्लियर टेस्टिंग?

रिपोर्ट्स के अनुसार, जिटोंग इलाके में इंजीनियरों ने घाटी क्षेत्र में नए बंकर और मजबूत किलेबंद ढांचे (रैम्पर्ट) बनाए हैं। एक बड़े कॉम्प्लेक्स में भारी पाइपलाइन सिस्टम भी नजर आया है। इससे संकेत मिलता है कि यहां खतरनाक और संवेदनशील सामग्री को संभाला जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बंकरों और संरक्षित स्थानों का इस्तेमाल हाई-एक्सप्लोसिव (उच्च विस्फोटक) की टेस्टिंग के लिए किया जा सकता है। हाई एक्सप्लोसिव की परत के अंदर जब शॉक वेव केंद्र की ओर जाती है, तो उसकी सटीकता जांचने के लिए ब्लास्ट टेस्ट जरूरी होता है। यह प्रक्रिया परमाणु हथियारों के डिजाइन को बेहतर और अधिक प्रभावी बनाने में काम आती है।

2030 तक दोगुना हो सकता है स्टॉक

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2030 तक चीन का परमाणु हथियार भंडार लगभग दोगुना हो सकता है। पेंटागन के आकलन के अनुसार, 2024 के अंत तक चीन के पास 600 से ज्यादा वॉरहेड थे। अनुमान है कि 2030 तक यह संख्या 1,000 तक पहुंच सकती है। हालांकि यह संख्या अब भी रूस और अमेरिका से काफी कम है, लेकिन इतनी तेजी से बढ़ोतरी होना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बन रहा है।

अंतरराष्ट्रीय समझौते पर सवाल

अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि भविष्य में अगर कोई नया परमाणु हथियार नियंत्रण समझौता होता है, तो उसमें चीन को शामिल करना जरूरी होगा। हालांकि बीजिंग ने अब तक ऐसे किसी समझौते में खास दिलचस्पी नहीं दिखाई है। फिलहाल सैटेलाइट तस्वीरों से पूरी जानकारी नहीं मिलती और चीन के पास वास्तविक रूप से कितने वॉरहेड हैं, इसकी सटीक संख्या सार्वजनिक नहीं है। लेकिन इन तस्वीरों में प्लांट और ढांचे का लगातार विस्तार साफ नजर आ रहा है, जो चीन की बढ़ती परमाणु महत्वाकांक्षा की ओर इशारा करता है।

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