Earthquake in Myanmar : भूकंप के झटकों से हिली धरती, रिक्टर स्केल पर इतनी रही तीव्रता...लोगों में दहशत

Edited By Updated: 17 Feb, 2026 12:57 AM

earthquake in myanmar

16 फरवरी 2026 को म्यांमार में 3.3 तीव्रता का भूकंप आया। यह भूकंप भारतीय समयानुसार (IST) रात 10:04:26 बजे दर्ज किया गया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, भूकंप की गहराई जमीन से 50 किलोमीटर नीचे थी। इसके केंद्र का स्थान 22.99 डिग्री...

इंटरनेशनल डेस्कः 16 फरवरी 2026 को म्यांमार में 3.3 तीव्रता का भूकंप आया। यह भूकंप भारतीय समयानुसार (IST) रात 10:04:26 बजे दर्ज किया गया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, भूकंप की गहराई जमीन से 50 किलोमीटर नीचे थी। इसके केंद्र का स्थान 22.99 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 94.51 डिग्री पूर्वी देशांतर पर दर्ज किया गया। इस संबंध में जानकारी NCS ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए साझा की।

एक दिन पहले भी आए थे तीन भूकंप

15 फरवरी 2026 को भी म्यांमार में एक के बाद एक तीन भूकंप आए थे। पहला भूकंप 4.5 तीव्रता का था, जो सुबह 08:17:20 IST पर आया। इसकी गहराई 100 किलोमीटर थी। इसके केंद्र का स्थान 22.16 डिग्री उत्तर और 94.51 डिग्री पूर्व था। उसी दिन तड़के 00:52:42 IST पर 3.2 तीव्रता का भूकंप आया, जिसकी गहराई 25 किलोमीटर थी। इसके निर्देशांक 23.44 डिग्री उत्तर और 93.49 डिग्री पूर्व दर्ज किए गए। इसके अलावा 00:26:53 IST पर भी 3.2 तीव्रता का एक और भूकंप आया। यह 80 किलोमीटर की गहराई में था और इसके निर्देशांक 23.53 डिग्री उत्तर तथा 94.59 डिग्री पूर्व थे। लगातार आ रहे इन झटकों से क्षेत्र में भूकंपीय गतिविधि बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

क्यों आता है म्यांमार में बार-बार भूकंप?

म्यांमार भूकंप की दृष्टि से बेहद संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है। यह चार प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटों भारतीय, यूरेशियन, सुंडा और बर्मा प्लेट के बीच स्थित है। इन प्लेटों की आपसी टक्कर और खिसकने से जमीन के अंदर दबाव बनता है, जो भूकंप का कारण बनता है। म्यांमार के बीच से एक बड़ा ट्रांसफॉर्म फॉल्ट गुजरता है, जो अंडमान स्प्रेडिंग सेंटर को देश के उत्तरी हिस्से में स्थित Sagaing Fault से जोड़ता है। यही फॉल्ट देश में अधिकतर भूकंपों के लिए जिम्मेदार माना जाता है।

किन इलाकों पर ज्यादा खतरा?

सागाइंग फॉल्ट के कारण म्यांमार के कई बड़े क्षेत्र भूकंप के खतरे में रहते हैं। इनमें सागाइंग, मंडाले, बागो और यांगून जैसे प्रमुख इलाके शामिल हैं। इन क्षेत्रों में देश की लगभग 46 प्रतिशत आबादी रहती है। हालांकि यांगून सीधे फॉल्ट लाइन पर नहीं है, लेकिन इसकी घनी आबादी के कारण वहां भूकंप का जोखिम अधिक माना जाता है।

पहले भी आ चुके हैं बड़े भूकंप

ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि 1903 में बागो क्षेत्र में 7.0 तीव्रता का बड़ा भूकंप आया था, जिसका असर यांगून तक महसूस किया गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि म्यांमार में भूकंप की गतिविधि भविष्य में भी जारी रह सकती है, इसलिए यहां आपदा प्रबंधन और भूकंप-रोधी ढांचे को मजबूत करना बेहद जरूरी है।

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