ट्रम्प की दादागिरी को नियंत्रित करना लाजिमी

Edited By Updated: 04 Oct, 2026 04:51 AM

trump s bullying is essential to control

विश्व की सर्वोच्च संसद संयुक्त राष्ट्र की महासभा के  81वें अधिवेशन में शांति, सुरक्षा और विकास के लिए विभिन्न राष्ट्रों के राष्ट्रीय अध्यक्ष, विदेश मंत्री और प्रतिनिधि अपने भाषणों द्वारा संदेश दे रहे हैं। शक्तिशाली राष्ट्राध्यक्ष अति महत्वपूर्ण...

विश्व की सर्वोच्च संसद संयुक्त राष्ट्र की महासभा के  81वें अधिवेशन में शांति, सुरक्षा और विकास के लिए विभिन्न राष्ट्रों के राष्ट्रीय अध्यक्ष, विदेश मंत्री और प्रतिनिधि अपने भाषणों द्वारा संदेश दे रहे हैं। शक्तिशाली राष्ट्राध्यक्ष अति महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं और उनके भाषण ही भविष्य की दशा और दिशा तय करते हैं। इस समय  प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 90 देश युद्ध ग्रस्त हैं। राष्ट्रपति ट्रम्प ने विश्व के देशों की दरपेश गंभीर समस्याओं और संकट उत्पन्न करने वाली चुनौतियों को देख कर भी नजरअंदाज किया और अपने भाषण में ईरान को आतंकवादी देश कहा और यह धमकी दी कि वह नए सिरे से अमरीका से समझौता करे या सर्वनाश के लिए तैयार हो जाए और अपने व्यक्तिगत कारनामों की बखूबी चर्चा की। 

हकीकत में उनका भाषण आक्रामकता, नकारात्मकता और विध्वंसात्मकता की ओर इशारा करता है। ट्रम्प ने महासभा में खुद को शांति का मसीहा होने का दावा किया कि उसने 8 युद्ध ग्रस्त देशों को अपनी टैरिफ नीति से बचा लिया है और यदि वह ऐसा न करते तो इन देशों में 30 करोड़ से ज्यादा लोग अपनी जानें गंवा बैठते। जबकि हकीकत यह है कि वह न तो रूस और यूक्रेन का युद्ध बंद करवा सके, जो पिछले 4 वर्षों से भारी जानी-माली नुकसान के साथ लगातार जारी है और न ही इसराईल और हमास में युद्धबंदी समय पर करा सके, जिसके कारण गाजा पट्टी में रहने वाले 70,000 से अधिक लोग मारे गए। दूसरे देशों के युद्ध बंद कराने में तो कामयाब नहीं हुए, बल्कि अमरीका ने खुद ही इसराईल के साथ मिलकर ईरान पर खुली बमबारी की, जिसमें हजारों लोग मारे गए। 1,31,000 ईमारतें धराशायी हो गईं।

राष्ट्रपति ट्रम्प का यह डींग मारना  कि उनके पास गोला-बारूद का इतना भंडार है, जिससे वह सालों तक  लड़ाई लड़ सकते हैं और उन्हें नए हथियारों के निर्माण की जरूरत नहीं है। जबकि  उनकी अपनी पेंटागन की अगस्त महीने की रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि अमरीका में हथियारों और गोला-बारूद की कमी का संकट पैदा हो गया है। उनके पास   क्रूज मिसाइल, इंटरसैप्टर मिसाइल और अन्य हथियारों की जबरदस्त कमी हो गई है। मीडिया के अनुसार इस कमी के कारण अमरीका ने ईरान से युद्ध बंद किया है और इसी कारण नाटो देश भी यूक्रेन की सहायता करने में असहाय हो जाएंगे, जिसका फायदा रूस उठाने में चूक नहीं करेगा।

डोनाल्ड ट्रम्प ने अमरीका और वेनेजुएला के तेल को मिलाकर विश्व का 60 प्रतिशत तेल के मालिक होने का दावा किया है, जबकि सर्वे के अनुसार दोनों देशों के पास केवल 22 प्रतिशत तेल है। सारा विश्व जानता है कि वेनेजुएला अमरीका का न तो कोई प्रदेश है और न ही उसका इस पर कोई संवैधानिक और कानूनी अधिकार है, बल्कि वेनेजुएला एक संप्रभुता सम्पन्न राष्ट्र है और अमरीका ने उसके राष्ट्रपति को अपने पास बंदी बना रखा है और उसकी तेल कम्पनियों से अमरीकी तेल कंपनियां तेल खरीद कर दूसरे देशों को बेच रही हैं। वेनेजुएला सरकार किसी भी समय बगावत कर सकती है। ताज्जुब यह है कि अन्य शक्तिशाली देश न तो बाहर से और न ही यू.एन. में वेनेजुएला की सम्प्रभुता के हक में खुल कर समर्थन कर रहे हैं। 

भारी टैरिफ से अमरीका में महंगाई तेजी से बढ़ रही है। जिससे ट्रम्प की लोकप्रियता में कमी आ रही है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण जलवायु परिवर्तन से बड़े-बड़े हिमखंड तेजी से पिघल रहे हैं। यदि ग्लोबल वाॄमग पर नियंत्रण न किया गया तो भविष्य में नदियों के जल में अत्यधिक कमी आ जाएगी। इस मसले को ट्रम्प ने पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है। भारत को भविष्य में अधिक सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि इस बार यू.एन. में कश्मीर पर पहले तुर्की ने और फिर पाकिस्तान ने राग अलापा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने अमरीका की कठपुतली बनकर ट्रम्प की खूब प्रशंसा की और ट्रम्प ने भी पाक प्रधानमंत्री को शाबाशी दी है। दूसरी तरफ तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने मक्का समझौता किया है, जिसे इस्लामिक नाटो का नाम दिया गया है। अमरीका ने ही पाकिस्तान को पहले हथियारों से लैस किया और फिर आतंकवाद का पालन-पोषण करने में हथियार भी दिए और डालरों की वर्षा भी की। 

सिक्योरिटी कौंसिल 5 देशों की प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बन कर रह गई है। भारत की सकारात्मक, सृजनात्मक और रचनात्मक भूमिका को देखते हुए इसे सिक्योरिटी कौंसिल का सदस्य बनाया जाए और ट्रम्प की दादागिरी को नियंत्रित करना लाजिमी है, अन्यथा विश्व के कई देशों में खाद्य पदार्थों की भारी किल्लत, तेल और गैस की कमी और आसमान को छूती महंगाई वर्तमान व्यवस्था में अराजकता फैला देगी।-प्रो. दरबारी लाल 
 

Related Story

    Trending Topics

    img title
    img title

    Be on the top of everything happening around the world.

    Try Premium Service.

    Subscribe Now!