रूस-यूक्रेन युद्ध के अप्रत्याशित परिणाम

Edited By , Updated: 22 May, 2022 04:32 AM

unexpected consequences of the russo ukraine war

आप युद्ध शुरू कर सकते हैं लेकिन निश्चिंत रहें कि कोई और इसे आपके लिए खत्म कर देगा और निश्चित रूप से आपकी शर्तों पर नहीं। यह वह स्थिति है जिसका राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सामना

आप युद्ध शुरू कर सकते हैं लेकिन निश्चिंत रहें कि कोई और इसे आपके लिए खत्म कर देगा और निश्चित रूप से आपकी शर्तों पर नहीं। यह वह स्थिति है जिसका राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सामना कर रहे हैं, क्योंकि यूक्रेन पर रूसी आक्रामकता 24 मई, 2022 को 3 महीने पूरे कर रही है। 

राष्ट्रपति पुतिन ने स्पष्ट रूप से नहीं पढ़ा या उस मामले में चीनी माहिर रणनीतिकार सन त्ज़ु के गहन ज्ञान को समझा, जिन्होंने 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व में अपने ग्रंथ में युद्ध कला बारे लिखा था कि ‘सबसे बड़ी जीत वह है जिसके लिए युद्ध की आवश्यकता नहीं है।’ और ‘बुद्धिमान योद्धा लड़ाई से बचता है।’ यदि राष्ट्रपति पुतिन का यूक्रेन पर आक्रमण करने का उद्देश्य उत्तर अटलांटिक संधि गठबंधन (नाटो) के पूर्व की ओर विस्तार को रोकना और रूस के लाभ के लिए यूरोपीय सुरक्षा वास्तुकला को फिर से व्यवस्थित करना था, तो उन्होंने बिल्कुल विपरीत हासिल किया है। 

2007 में म्यूनिख सुरक्षा शिखर सम्मेलन में पुतिन ने नाटो के पूर्व की ओर विस्तार के बारे में स्पष्ट रूप से अपनी आपत्ति व्यक्त की थी कि ‘‘नाटो के विस्तार का गठबंधन के आधुनिकीकरण या यूरोप में सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ कोई संबंध नहीं है। इसके विपरीत, यह प्रतिनिधित्व करता है एक गंभीर उत्तेजना का, जो आपसी विश्वास के स्तर को कम करती है। संयुक्त राष्ट्र के विपरीत नाटो एक सार्वभौमिक संगठन नहीं है। यह सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण सैन्य और राजनीतिक गठबंधन है, सैन्य और राजनीतिक! खैर, अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करना किसी भी संप्रभु राज्य का अधिकार है। हम इसके खिलाफ बहस नहीं कर रहे। बेशक हम इस पर आपत्ति भी नहीं कर रहे, लेकिन इस विस्तार के दौरान हमारी सीमाओं पर सैन्य बुनियादी ढांचे को रखना क्यों जरूरी है?’’ 

पुतिन का यह 2007 का भाषण अमरीका के नेतृत्व वाली एकध्रुवीय प्रणाली के सबसे कठोर खंडन का प्रतिनिधित्व करता है, जो 1989 में बॢलन युद्ध के पतन के बाद अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था का केंद्र बिंदू बन गया था। उसके बाद के कार्यों में, अगस्त 2008 में जॉॢजया पर आक्रमण या 6 साल बाद यूक्रेन के खिलाफ व्यापक सैन्य अभियान, जिससे रूस ने क्रीमिया और पूर्वी यूक्रेन के डोनबास क्षेत्र के बड़े क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया और इसकी उपस्थिति ट्रांसनिस्ट्रिया, आधिकारिक तौर पर प्रिडनेस्ट्रोवियन मोल्डावियन रिपब्लिक (पी.एम.आर.) में बढ़ गई। ये सभी पश्चिमी गठबंधन की ‘लाल रेखा’ का परीक्षण करने के लिए डिजाइन किए गए थे। 

पश्चिम ने मास्को द्वारा भूमि हड़पने की इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया नहीं करने का फैसला किया। सीरिया में रूसी सफलताओं ने यह सुनिश्चित करने के मामले में कि असद शासन सत्ता  में रहता है, के साथ अगस्त 2021 में अफगानिस्तान से अपमानजनक अमरीकी वापसी ने क्रेमलिन में शासन को उसके अगले दुस्साहस के लिए मंच तैयार करने के लिए प्रेरित किया। हालांकि यह वह जगह है जहां पुतिन ने बल प्रदर्शन के लिए गलत गणना की।

अगर पुतिन ने यूक्रेन की सीमाओं पर अपनी सेना का जमावड़ा रखा होता और अपने जमीनी स्तर के कमांडरों को यूक्रेन में उथल-पुथल करने की अनुमति दी होती, जिससे इरादे और संकल्प दोनों का प्रदर्शन होता तो वह वर्तमान तबाही की तुलना में यूरोपीय सुरक्षा वास्तुकला को अपने लाभ के लिए अधिक कुशलता से पुनव्र्यवस्थित करने में सफल हो सकते थे। 

हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि यूक्रेन एक शतरंज के टुकड़े से ज्यादा कुछ नहीं है और वह भी एकध्रुवीय विश्व व्यवस्था को आकार देने के लिए बड़ी रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता में एक मोहरा है, जो अब कम से कम 2008 से काम कर रहा है, वह वर्ष जब महान आॢथक मंदी आई थी। यूक्रेन के हितों का बलिदान, जिसका भाग्य किसी भी मामले में पश्चिम की ओर नहीं है, भले ही वर्तमान युद्ध का परिणाम जो भी हो, पश्चिमी सहयोगियों के लिए एक पलक झपकने से अधिक नहीं होगा। किसी भी मामले में आज पश्चिमी गठबंधन ने रूसियों के साथ अंतिम यूक्रेनी रहने तक लडऩे का फैसला किया है। 

यूक्रेन पर इस कुत्सित आक्रमण को शुरू करके पुतिन ने यूरोपीय कबूतरों के बीच बिल्ली को छोड़ दिया है। 2022 की फरवरी में किसी को भी यकीन नहीं था कि यूक्रेन के लिए यह बाजीगरी कहां जाकर रुकेगी, जिसके ताश के पत्तों की तरह बिखरने की उम्मीद थी। इसने यूरोप को पहले की तरह एकजुट किया, जैसा कि 1939 के बाद हिटलर के हमले का विरोध करने के लिए वे एक साथ आए थे। 

इसका परिणाम तटस्थ और रूस के लिए मैत्रीपूर्ण राष्ट्रों को भी नाटो की कक्षा में धकेलने के रूप में निकल रहा है। सैद्धांतिक रूप से फिनलैंड, जिसने 6 अप्रैल, 1948 को तत्कालीन सोवियत संघ के साथ एक शांति संधि पर हस्ताक्षर किए थे, जिसने मास्को को हेलसिंकी की विदेश और सुरक्षा नीतियों को निर्देशित करने का अधिकार दिया था, अंतत: 20 जनवरी, 1992 को की गई एक अन्य संधि द्वारा रूसी भालू के चंगुल से खुद को निकालने में सफल रहा।

पहले की अधीनता को नकारते हुए, लेकिन व्यावहारिक तौर पर फिनलैंड आज तक रूस के सुरक्षा हितों के प्रति सचेत रहा। अब यह सब बदलना तय है। स्वीडन और फिनलैंड, दोनों देश नाटो में शामिल होने के लिए आवेदन करने के लिए तैयार हैं। नाटो को अपनी सीमाओं से दूर धकेलने के रूस के प्रयास के रूप में जो शुरू हुआ, वह केवल नाटो को पहले की तुलना में और भी करीब ला रहा है।-मनीष तिवारी

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