Edited By ,Updated: 01 Sep, 2026 05:16 AM

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने अपनी प्रमुख 10,000 करोड़ रुपए की ‘प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना’ (पी.एम.एफ.एम.ई.) को 5 साल का विस्तार देने की मांग की है। पी.एम.एफ.एम.ई. क्या है?
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने अपनी प्रमुख 10,000 करोड़ रुपए की ‘प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना’ (पी.एम.एफ.एम.ई.) को 5 साल का विस्तार देने की मांग की है। पी.एम.एफ.एम.ई. क्या है? 29 जून, 2020 को एक केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में शुरू की गई पी.एम.एफ.एम.ई. को वित्त वर्ष 2020-25 के लिए 10,000 करोड़ रुपए आबंटित किए गए थे। बाद में इस योजना को वित्त वर्ष 2025-26 तक और उसके बाद 30 सितम्बर 2026 तक जारी रखा गया।
यह उद्यमियों को नई इकाइयां स्थापित करने या मौजूदा इकाइयों के उन्नयन (अपग्रेडेशन) के लिए वित्तीय, तकनीकी और व्यावसायिक सहायता प्रदान करती है। योजना के तहत व्यय को केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 के अनुपात में सांझा किया जाता है, जबकि पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए यह अनुपात 90:10 है। विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों के लिए केंद्र और केंद्र शासित प्रदेश 60:40 के अनुपात में लागत सांझी करते हैं, जबकि अन्य केंद्र शासित प्रदेशों के लिए केंद्र 100 प्रतिशत खर्च वहन करता है। यह योजना पात्र सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के लिए 35 प्रतिशत क्रैडिट-लिंक्ड पूंजीगत सबसिडी प्रदान करती है, जिसमें 30 लाख रुपए तक की लागत वाली परियोजनाओं के लिए सबसिडी सहायता उपलब्ध है।इस योजना का उद्देश्य छोटे और अनौपचारिक खाद्य प्रसंस्करण व्यवसायों को औपचारिक बनने, अपने परिचालन में सुधार करने और संस्थागत वित्त तक पहुंच प्राप्त करने में मदद करना है।
औपचारिकीकरण क्यों महत्वपूर्ण?
औपचारिकीकरण छोटे व्यवसायों को अनौपचारिक संचालन से संगठित संरचनाओं में स्थानांतरित होने में मदद कर सकता है। सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए यह बेहतर उपकरण, पैकेजिंग, गुणवत्ता मानकों और प्रौद्योगिकी में निवेश में भी सहायता कर सकता है।
इससे उत्पादकता में सुधार हो सकता है और फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। औपचारिक व्यवसायों के लिए संगठित खुदरा विक्रेताओं (रिटेलर्स) और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म तक पहुंचना भी आसान हो सकता है, जिससे उनकी बाजार पहुंच का विस्तार होता है। सरकार के लिए, अधिक औपचारिकीकरण से इस क्षेत्र की दृश्यता (विजिबिलिटी) में सुधार होता है, जिससे वित्तीय सहायता और बुनियादी ढांचे के समर्थन को बेहतर ढंग से लक्षित करना संभव हो पाता है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब कृषि और संबद्ध क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था में लगभग 16 प्रतिशत का योगदान करते हैं और 46 प्रतिशत कार्यबल कृषि पर निर्भर है।
इसका प्रदर्शन कैसा रहा है?
30 जून तक, 5,954.57 करोड़ रुपए की क्रैेडिट-लिंक्ड सबसिडी और लगभग 14,480.24 करोड़ रुपए के निजी निवेश के साथ 2,00,421 सूक्ष्म खाद्य उद्यमों को मंजूरी दी जा चुकी है। 40 प्रतिशत से अधिक लाभार्थी महिला उद्यमी हैं, जो समावेशी विकास और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने में योजना की भूमिका को उजागर करता है।पी.एम.एफ.एम.ई. भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभरी है, जिससे विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के सूक्ष्म और छोटे खाद्य उद्यमियों को लाभ हुआ है।-विजय सी. रॉय