Edited By jyoti choudhary,Updated: 25 Jul, 2026 03:41 PM

देश के वित्तीय क्षेत्र में ग्राहकों की सुविधा बढ़ाने के लिए सरकार कॉमन कस्टमर ID सिस्टम लागू करने की तैयारी कर रही है। इस व्यवस्था के तहत बैंक, बीमा और भविष्य में म्यूचुअल फंड जैसी सभी वित्तीय सेवाओं के लिए अलग-अलग कस्टमर ID की जरूरत नहीं होगी।...
बिजनेस डेस्कः देश के वित्तीय क्षेत्र में ग्राहकों की सुविधा बढ़ाने के लिए सरकार कॉमन कस्टमर ID सिस्टम लागू करने की तैयारी कर रही है। इस व्यवस्था के तहत बैंक, बीमा और भविष्य में म्यूचुअल फंड जैसी सभी वित्तीय सेवाओं के लिए अलग-अलग कस्टमर ID की जरूरत नहीं होगी। शुरुआती चरण में बैंक और बीमा कंपनियां अगस्त से इस सिस्टम को अपनाने की तैयारी कर रही हैं, जबकि बाद में एसेट मैनेजमेंट कंपनियों को भी इससे जोड़ा जाएगा।
नए सिस्टम का आधार सेंट्रल नो योर कस्टमर (CKYC) होगा। इसके जरिए ग्राहक की सहमति मिलने पर एक बार सत्यापित की गई जानकारी का उपयोग विभिन्न वित्तीय संस्थानों में किया जा सकेगा। इससे बार-बार KYC दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता कम होगी और ग्राहक अपने रिकॉर्ड भी आसानी से देख सकेंगे।
जानकारों के मुताबिक, इस व्यवस्था पर करीब एक दशक से काम चल रहा है। इसका उद्देश्य सिंगापुर और यूरोपीय देशों की तरह एकीकृत डिजिटल पहचान ढांचा तैयार करना है, जिससे सभी वित्तीय उत्पादों तक पहुंच आसान और तेज हो सके।
नियामकों का मानना है कि कॉमन कस्टमर ID सिस्टम वित्तीय धोखाधड़ी की पहचान और रोकथाम में भी मदद करेगा। अगले चरण में म्यूचुअल फंड और ब्रोकरेज कंपनियों को भी इस प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। इस परियोजना पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), सेबी (SEBI) और इरडा (IRDAI) मिलकर काम कर रहे हैं, ताकि देश में वित्तीय सेवाओं की पहुंच और उपयोग दोनों को बढ़ाया जा सके।