Anil Agarwal ने वेदांता रिसोर्सेज को विदेशी बाजार में दोबारा सूचीबद्ध करने के संकेत दिए

Edited By Updated: 15 Jun, 2026 05:45 PM

anil agarwal hints at relisting vedanta resources in overseas markets

वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने सोमवार को समूह की मूल कंपनी वेदांता रिसोर्सेज को विदेश में फिर से सूचीबद्ध करने का संकेत देते हुए कहा कि ऐसा करने की तत्काल कोई योजना नहीं है और इसमें लगभग तीन साल लग सकते हैं। अग्रवाल ने वेदांता

मुंबईः वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने सोमवार को समूह की मूल कंपनी वेदांता रिसोर्सेज को विदेश में फिर से सूचीबद्ध करने का संकेत देते हुए कहा कि ऐसा करने की तत्काल कोई योजना नहीं है और इसमें लगभग तीन साल लग सकते हैं। अग्रवाल ने वेदांता रिसोर्सेज को विदेशी बाजार में दोबारा सूचीबद्ध किए जाने के सवाल पर कहा, "अभी यह प्राथमिकता में नहीं है लेकिन भविष्य में अमेरिका या किसी अन्य बाजार में इसे दोबारा सूचीबद्ध करने से उल्लेखनीय मूल्य सृजित किया जा सकता है।" 

वेदांता रिसोर्सेज को लंदन स्टॉक एक्सचेंज से गैर-सूचीबद्ध किया जा चुका है। कंपनी वहां पर एफटीएसई 100 सूचकांक में शामिल थी। अग्रवाल ने कहा कि वेदांता समूह का राजस्व इस समय 23-24 अरब डॉलर है, जिसे बढ़ाकर 50 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि समूह का लक्ष्य धातु, खनन, तेल एवं गैस, बिजली और महत्वपूर्ण खनिज जैसे अपने महत्वपूर्ण कारोबार का विस्तार करते हुए प्रत्येक क्षेत्र को दीर्घकाल में 100 अरब डॉलर के अवसर में बदलना है। इस बीच, वेदांता समूह की चार अलग-अलग इकाइयां- वेदांता एल्युमिनियम मेटल, वेदांता पावर, वेदांता ऑयल एंड गैस और वेदांता आयरन एंड स्टील सोमवार को शेयर बाजार में सूचीबद्ध हो गईं। 

भारतीय बाजार में परिचालन करने वाली वेदांता लिमिटेड के विभिन्न कारोबार को अलग-अलग इकाइयों के रूप में सूचीबद्ध करने के प्रस्ताव पर राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने दिसंबर, 2025 में मुहर लगाई थी। वेदांता लिमिटेड ने यह फैसला अलग-अलग क्षेत्रों के लिए स्वतंत्र व्यवसाय खड़ा करने और वृद्धि अवसरों का फायदा उठाने के लिए किया है। अग्रवाल ने कहा कि कंपनी भारत में बढ़ती धातुओं और ऊर्जा की मांग को देखते हुए उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रही है। 

एल्युमिनियम खपत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में प्रति व्यक्ति खपत केवल तीन किलोग्राम है, जबकि वैश्विक औसत 30-40 किलोग्राम है, जिससे इसमें वृद्धि की बड़ी संभावना है। तेल एवं गैस क्षेत्र में उन्होंने कहा कि कंपनी ने ऐसे भंडार चिह्नित किए हैं, जिनसे अगले तीन वर्षों में उत्पादन बढ़ाकर पांच लाख बैरल प्रतिदिन किया जा सकता है। इस्पात क्षेत्र में कंपनी 1.5 करोड़ टन उत्पादन का लक्ष्य लेकर चल रही है। उन्होंने कहा कि इसके लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा उपलब्ध है। अग्रवाल ने दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति का जिक्र करते हुए कहा कि भविष्य में कंपनी की कुल बिजली उत्पादन क्षमता का 20-25 प्रतिशत हिस्सा परमाणु ऊर्जा से आ सकता है।

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